माँ की रसोई से टमाटर वाले करेले : कड़वा है पर करेला है

सामान्यत: बच्चे करेला नहीं खाते लेकिन बड़े सुपुत्र भी मेरे हाथ का करेला बड़े शौक से खाते हैं। मुझको बड़ा फ़क्र था मेरे हाथ के करेले बहुत स्वादिष्ट होते हैं, कड़वाहट तो मिलेगी ही नहीं।

मैं तरह तरह के करेले बनाकर खिला चुकी हूँ। हर बार खाने के बाद स्वामी ध्यान विनय पूछते हैं ये कौन -सी सब्ज़ी है?

और मैं गर्व से कहती देखा पता ही नहीं चला आपको भी, ये करेला है।

तो क्या फायदा करेला कड़वा न लगे तो काहे का करेला।

लो जी इतनी मेहनत से करेला बनाया और ये नीम चढ़े करेले-सा ताना सुनो। पर सुनना पड़ता है क्या करे टेढ़ा है पर मेरा है जी।

हद तो तब हो गयी जब एक दिन बच्चों के दादाजी अपने बड़े भाई के घर से करेले की सब्ज़ी लेकर आए। और आदेश दिया गया इस तरह से बनाना है आज से करेले। ये सिर्फ आपके चखने के लिए लेकर आया हूँ ताकि इसे चखकर ऐसे ही बनाकर दिखाएं।

लो जी लम्बे करेले, गोल करेले और भरवां करेले, प्याज़ वाले करेले, गुड़वाले करेले की मेरी सारी रेसिपी फ़ेल, अब नए तरीके से करेले बनेंगे।

मैंने उसे चखा, बस क्या था चखने भर से उसके सारे Ingredients ने मेरी जिह्वा पर अपनी-अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और एक दूसरे के कान में खुसुर-फुसुर करते हुए मेरी मखौल उड़ाते नज़र आये। अब कैसे बनाओगी हम सब को मिलाकर नए स्वाद का करेला? पहले ग्रेवी बनाओगी या पहले करेला पकाओगी? पहले मसाला डालोगी या पहले करेला?

मैंने भी चैलेंज स्वीकार किया, एक जादुई चिराग में तेल डालकर सादा सा तड़का लगाया। और जिस भी चीज़ का स्वाद आया उसको एक साथ डालकर करेले के जिन्न को उसमें कैद कर दिया।

कुछ देर बाद एक कड़छी से चिराग को घिसा और अन्दर से करेले का जिन्न निकलकर आया बोला क्या हुक्म है मेरी काकी?

हें! अब ये काकी कौन है?

अब आका का स्त्रीलिंग आकी होता है चूंकि आकी जैसा शब्द नहीं होता इसलिए आप हुईं मेरी काकी?

तो भतीजे जिन्न अपना जादू दिखाओ और वही वाला स्वाद लेकर आओ जैसा बच्चों के दादाजी को पसंद आया है।

बस क्या था दादाजी की थाली लगाई, पूरा खाना परोसा साथ में करेला।

खाना ख़त्म करते हुए दादाजी शेर जैसी मूंछों के नीचे से अपनी मुस्कुराहट छुपाते हुए अपनी भारी आवाज़ में बोले। – “करेला तो बहुत शानदार बना है।”

अपन ने थाली में बचे करेले को धीरे से आँख मारी। उसने प्रणाम किया और धीरे से थाली से सफाचट।

अब दादाजी का अगला वाक्य। “बस थोड़ा सा कड़ा रह गया है।”

नायक खानदान में कोई मीनमेख न निकाले तो नायक कैसे। ये तो इन नायकों की परंपरा रही है। फुल टू तारीफ़ तो कभी निकलती ही नहीं। लेकिन हम भी तो नायक खानदान की बहू हैं, खूब समझने लगे हैं इनके पेंतरे। चाहे खाना हो, मेरा लेखन हो, जीवन हो या अध्यात्म कोई न कोई कमी ये ज़रूर ले आते हैं ताकि मैं अगली बार अपने कार्य को और उत्कृष्ट कर सकूं।

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अब क्या है ना रेसिपी तो बस एक लाइन की ही थी तो सोचा ये एक लाइन की रेसिपी बनाते समय आप बोर नहीं होना चाहिए इसलिए इस टमाटर वाले करेले के पीछे का इतना लम्बा किस्सा सुनाया।

तो सुनिए आधा किलो पीसे टमाटर में एक चम्मच हल्दी, एक चम्मच लाल मिर्च, तीन चम्मच पीसा धनिया, एक बड़ा चम्मच सीके-पीसे मूंगफली दाने, पाव भर कटे करेले, नमक स्वादानुसार मिलाकर तीन बड़े चम्मच तेल में राई-जीरे और हिंग का तड़का लगाकर कम आंच पर तब तक पकाइए जब तक टमाटर का पानी सूख नहीं जाता और तेल ऊपर नहीं आ जाता.

लो जी तैयार है आपका स्वादिष्ट टमाटर वाला करेला। हाँ करेला बन जाने पर एक बार चेक ज़रूर करें कि करेला अच्छे से पका है या नहीं। वरना तारीफ तो जीभर के मिलेगी लेकिन साथ में ये भी मिलेगा। “बस करेला ज़रा कड़ा रह गया” 🙂

ये रिश्ते भी तो करेले जैसे ही होते हैं, थोड़े से कड़वे लेकिन सबसे अधिक पौष्टिक। वही… टेढ़ा है पर मेरा है टाइप्स 😉

माँ की रसोई में पाव भर भाजी में भी मन जाती है पार्टी!

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