इतिहास के पन्नों से -3 : मुरुगन Vs अफ्रीकन मुरुंगु

पूर्वी अफ्रीका खास कर केन्या, तंजानिया, जिम्बाब्वे, सूडान, उगांडा, इथियोपिया आदि में एक बहुत ही कॉमन भगवान है मने उनके क्रियेटर, प्रोटेक्टर, पालनकर्ता आदि सब। और उनका नाम क्या है मालूम है? तो उनका नाम है ‘मुरुंगु (Murungu)’! इंटरेस्टिंग न ! इन्हें मुलुंगु (Mulungu) भी कहते।

दूसरी इंटरेस्टिंग बात.. इससे पहले भी बता चुके कि ‘जहाँ कहीं भी पहाड़ी (Hillock) होगा, भगवान मुरुगन वहाँ जरूर मिलेंगे!’ और यहाँ भी भगवान मुरुंगु पहाड़ी में ही मिलते हैं। इन्हें पहाड़ का देवता बोलते हैं जो सबकी निगरानी करता है व रखवाली। है न इंटरेस्टिंग।

पूर्वी अफ्रीका के करीब 25 ऐसे एथनिक ग्रुप्स हैं जिनके भगवान मुरुंगु है जो पहाड़ पर विराजमान होते हैं। जिसमें से किकियू(Kikiyu) ट्राइब प्रमुख है। भगवान मुरुंगु के नाम से यहां के लोग अपना सरनेम मुरुंगु/मुरुकु लगाते हैं। लगभग पूरे पूर्वी अफ्रीका में मिलेंगे ये सरनेम।

एक मान्यता के अनुसार Gikiyu जो आदि पुरूष हैं यहाँ के वे भगवान मुरुंगु के साथ साक्षात थे। Gikuyu को भगवान मुरुंगु ‘माउंट केन्या’ ले के आये। यहीं वो एक स्त्री का भी निर्माण किये जिनका नाम था ‘मुम्बी(Mumbi)’ .. और मुम्बी के साथ इनका विवाह कराये।

अब मुम्बी बड़ा इंटरेस्टिंग नाम हो गया न?! (मुंबा देवी) .. तो Gikuyu और Mumbi अफ्रीका के लिए आदिपुरुष व आदिनारी हुए। इन्हीं से आगे वंश बढ़ा। भगवान मुरुंगु माउंट केन्या से दोनों को आशीर्वाद देते कि “हे पुत्र पुत्री! जाओ इस जमीन में राज करो और भावी पीढ़ी का निर्माण.. आज से ये तुम्हारा हुआ!”

तब से प्रत्येक वर्ष भगवान मुरुंगु को माउंट केन्या में जरूर पूजा जाता है व याद किया जाता है।

लेकिन जैसा कि मालूम है कि हलेलुइया कहाँ नहीं पहुँच गए हैं.. आज यहाँ की आबादी का 70% हिस्सा हलेलुइया बन चुका है। … अब बड़े इंटरेस्टिंग की बात है कि यहाँ भी जीसस को मुरुंगु के विभिन्न रूपों में दर्शाया जाता है और बोला जाता कि जीसस ही मुरुंगु है जैसा कि दक्षिण भारत में जीसस बाबा भगवान मुरुगन का भेष धर चुके हैं।

और एक इंटरेस्टिंग बात! जिस तरह से माउंट अरारात, माउंट फूजी, और श्रीलंका का एडम पीक एडम के नाम हो गया .. ‘रामसेतु’ एडम ब्रीज हो गया वैसे ही माउंट केन्या ‘ माउंट एडम’! हो गया.. च्या माइला रे!! .. बोला जाता कि आदम बाबा इसी पहाड़ी पे अपना कदम रखे थे और अफ्रीका में जीवन की शुरुआत किये थे। ताले झोपड़ी के।.. कनवर्टेड लोग तो मानने भी लगे।
लेकिन जो ओरिजनल लोग हैं वे अब भी भगवान मुरुंगु को ही पूजा करते हैं।

इतिहास के पन्नों से – 1 : मुरुगन Vs मर्दुक

इतिहास के पन्नों से – 2 : 7 का चक्कर और सृष्टि का सृजन

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