काँग्रेसियों ने क्यों नहीं पूछा कि ऐसा कौन सा ‘टैक्स’ था जो सरकार के खाते में नहीं जाता था?

काँग्रेसियों को प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाना चाहिए। उन्हें संसद में पूछना चाहिए कि ऐसा कौन सा ‘टैक्स’ था जिसका पैसा सरकार के खाते में नहीं जाता था?

कल लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण अंश यह था जब उन्होंने बताया कि जब तक काँग्रेस सत्ता में थी तब तक बैंकों को लूटने का खेल चलता रहा।

उन्होंने कहा कि आजादी के 60 वर्षों के बाद बैंकों ने कुल 18 लाख करोड़ रुपए लोन के रूप में दिए थे। लेकिन वर्ष 2008 से 2014 के मध्य मात्र 6 साल में यह राशि 18 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपए हो गई।

उन्होंने पूछा कि 6 वर्षों में यह राशि कैसे दुगनी (34 लाख करोड़ रुपए) हो गई?

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि विश्व में इंटरनेट बैंकिंग आने के पहले ही भारत में फोन बैंकिंग शुरू हो गई थी।

इन 6 वर्षों में काँग्रेस ने अपने चहेते लोगों के लिए बैंकों से खजाना लुटा दिया। उसका क्या तरीका था?

कागज वगैरह कुछ देखना नहीं था; केवल टेलीफोन आता था कि लोन दे दो। लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन दे दो, उसके बाद कोई और लोन दे दो। जो पैसा डूब गया वह गया। पैसा जमाने जमा करवाने के लिए नए लोन दे दो। यही कुचक्र चलता गया और देश के बैंक एनपीए के विशाल जंजाल में फंस गए।

एनपीए के विशाल जंजाल को भारत में लैंडमाइन के रूप में बिछाया गया था। मोदी सरकार ने पारदर्शिता के साथ इसकी जांच शुरू की। जितनी बारीकी से जांच की उतना ही गहरा जाल बाहर निकलता गया।

काँग्रेसी सरकार ने कैपिटल गुड्स (जैसे कि कार, मशीनरी, सीमेंट इत्यादि) के आयात की कस्टम ड्यूटी कम कर दी जिससे आयात इतना बढ़ गया जो हमारे कच्चे तेल के आयात के समतुल्य हो गया और इसके कारण देश में कैपिटल गुड्स के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

इन सारे आयात की फाइनेंसिंग बैंकों से लोन लेकर की गई; बिना प्रोजेक्ट की जांच किए, बिना वित्तीय स्थिति की पड़ताल किए लोन क्लियर कर दिए गए।

एक तरफ एंड कैपिटल गुड्स के आयात से मिलने वाली कस्टम ड्यूटी और सरकारी टैक्सों में कमी की गई. दूसरी तरफ सरकारी क्लीयरेंस देने के लिए कुछ नए ‘टैक्स’ बनाए गए जिनका पैसा सरकार के खाते में नहीं जाता था।

इस टैक्स के कारण सारे प्रोजेक्ट के क्लीयरेंस में देरी हुई। बैंकों में लोन फंसे रहें और एनपीए बढ़ता रहा।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा के पटल पर स्पष्ट कहा है कि जब तक काँग्रेस सत्ता में थी, तब तक बैंकों को लूटने का खेल चलता रहा।

काँग्रेसियों को संसद में पूछना चाहिए कि ऐसा कौन सा ‘टैक्स’ था जिसका पैसा सरकार के खाते में नहीं जाता था?

उन्हें संसद के पटल पर ‘झूठ’ बोलने के लिए प्रधानमंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना चाहिए।

लेकिन पप्पी-झप्पी के चक्कर में इस महत्वपूर्ण प्रश्न को इग्नोर करने की तैयारी चल रही है।

‘परिवार’ को भारत के सत्ताशीर्ष पर बनाए रखने के, हम भी तो हैं कुछ ज़िम्मेदार

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