जानिए, हेलिकॉप्टर घोटाले से कैसे जुड़ा है काँग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव

मोदी सरकार के विरुद्ध कांग्रेस ने जो अचानक अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है, उस पर असल बात यह है कि इस अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य मोदी सरकार को गिराना नहीं बल्कि सोनिया गांधी को बचाना है।

अंदर की बात यह है कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण अगस्ता वेस्टलैंड (Agusta Westland) घोटाले के एक मुख्य आरोपी ‘क्रिश्चयन मिशेल’ की तीन दिन पहले दुबई से गिरफ्तारी हुई है।

इस गिरफ्तारी की वजह से कांग्रेस हिल सी गई है। क्योंकि अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले में न सिर्फ सोनिया गांधी फंसती नजर आ रही है बल्कि इनका दायां हाथ अहमद पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी बुरी तरह फंसते हुए नज़र आ रहे हैं।

इतना ही नही कांग्रेस भक्त मीडिया के कई संपादकों की गर्दन पर तलवार लटकी नज़र आ रही है। इसलिए कि इस मामले में इन संपादकों को भी 45 करोड़ की रिश्वत दी गई थी।

दुबई में गिरफ्तार क्रिश्चयन मिशेल को जब सीबीआई अगले महीने भारत लाएगी तो कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के तीन नेता सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और अहमद पटेल की पोल खुलना तय है।

इस वजह से कांग्रेस इतनी घबराई हुई है कि रणदीप सुरजेवाला ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की उसमें झूठ ही झूठ था।

रणदीप सुरजेवाला का पहला झूठ का तो इटली की अदालत के निर्णय से ही पर्दाफाश हो जाता है जिसमें अहमद पटेल का नाम आ चुका है।

रणदीप सुरजेवाला का दूसरा झूठ कि छः कंपनियों को यूपीए सरकार में ब्लैकलिस्ट में डाला गया था, जबकि सच्चाई यह है कि इन छः कंपनियों को मोदी सरकार द्वारा 3 जुलाई 2014 को ब्लैकलिस्ट में डाला गया था।

रणदीप सुरजेवाला का तीसरा सफेद झूठ कि उन कंपनियों को मोदी सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ के एक समिट में भाग लेने की छूट दी थी जबकि सच्चाई यह है कि मनमोहन सरकार ने ही 2 सितंबर 2011 को अगस्ता को ज्वाइंट वेंचर के लिए मंजूरी दी थी।

अगस्ता वेस्टलैंड ने Indian Rotorcraft Ltd. का गठन किया था जो Tata Sons और अगस्ता वेस्टलैंड का joint venture (संयुक्त उपक्रम) था और इसके लिए यूपीए सरकार के समय Foreign Investment Promotion Board ने उसे मंजूरी दी थी।

रणदीप सुरजेवाला के चौथे झूठ इससे पर्दाफाश हो जाता है जब 7 फरवरी 2012 को हेलिकॉप्टर निर्माण के नाम पर अगस्ता वेस्टलैंड व टाटा सन्स के ज्वाइंट वेंचर Indian Rotorcraft Ltd को मनमोहन सरकार ने इंडस्ट्रीयल लाइसेंस प्रदान कर दिया था और 2015 में उस समिट में भाग लेने की अनुमति मनमोहन सरकार ने अपनी सरकार के समय ही दे दी थी।

यदि यह अनुमति बाद में दी गई थी तो फिर आठ कंपनियों के टेक्नो-कमर्शियल प्रपोज़ल को यूपीए सरकार ने ही 4 अगस्त 2012 को मंजूरी क्यों दी थी? सुरजेवाला के पास है कोई जवाब?

अतः कांग्रेस ने जो अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है उस का उद्देश्य मोदी सरकार को गिराना नहीं बल्कि मैडम सोनिया को बचाना है।

यदि ऐसा नहीं तो अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार को गिराने के लिए रणनीति चर्चा होती, बहुमत का जुगाड होता, न कि अचानक रणदीप सुरजेवाला की अगस्ता पर प्रेस कांफ्रेंस होती.

(श्री अब्दुस समीर शेख की फेसबुक पोस्ट)

और किसी काँग्रेसी में तो वो रीढ़ की हड्डी है ही नहीं

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