इस बार खुद भरें इनकम टैक्स रिटर्न : Income Tax Return: A to Z Guide

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख नजदीक आती जा रही है। सैलरी वाले खुद कैसे फाइल करें अपना इनकम टैक्स रिटर्न, प्रमुख चार्टड अकाउंटेंट्स से जानकारी लेकर बता रहे हैं राजेश भारती:

इन तारीखों का रखें ध्यान

सामान्य टैक्सपेयर के लिए आखिरी तारीख: 31 जुलाई
वह कंपनी या बिजनेसमैन, जिनका अकाउंट ऑडिट होता है: 30 सितंबर
वह कंपनी या बिजनेसमैन जो इंटरनैशनल ट्रांजैक्शन करता हो: 30 नवंबर

किसे भरना है रिटर्न और किसे नहीं?

– फाइनैंशल इयर 2017-18 के इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से छूट की सीमा 60 साल से कम के पुरुषों और महिलाओं के लिए 2.50 लाख रुपये है।
– 60 से 79 साल तक के उम्र के बुजुर्गों के लिए यह सीमा 3 लाख रुपये है।
– 80 साल या इससे ज्यादा उम्र के सुपर सीनियर सिटिजन के लिए 5 लाख तक की आमदनी टैक्स-फ्री है।

नोट: साल भर में हुई कुल इनकम में से HRA, Medical, Conveyance और LTA की Exemption घटाने के बाद जो रकम बचती है, उसके हिसाब से रिटर्न भरने या न भरने का फैसला होता है। यह 80C आदि Deductions घटाने से पहले की रकम है। अगर चैप्टर VIA के इन्वेस्टमेंट और ब्याज की छूट लेने से पहले आपकी इनकम इस सीमा से ज्यादा है तो आपको रिटर्न भरना होगा।

नहीं भरेंगे तो नुकसान क्या?

1. अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न भरने के दायरे में नहीं आते: कोई चिंता नहीं।
2. अगर इनकम टैक्स भरने के दायरे में आते हैं और इनकम टैक्स की कोई देनदारी नहीं है, तो ऐसे में आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से रिटर्न फाइल करने का नोटिस मिलेगा। साथ ही आपको पेनल्टी देनी होगी।
3. अगर इनकम टैक्स भरने के दायरे में आते हैं और इनकम टैक्स की देनदारी है, तो न केवल आपको नोटिस मिलेगा, बल्कि आपको पेनल्टी के साथ टैक्स की देनदारी पर 1% हर महीने के हिसाब से ब्याज भी देना होगा।
4. अगर इनकम टैक्स भरने के दायरे में आते हैं और रिफंड बनता है, तो आप उस रिफंड से वंचित तो होंगे ही साथ ही आपको पेनल्टी भी देनी पड़ेगी।

भर देंगे तो फायदे क्या?

कारोबार के लिए अहम: यदि आप अपना कारोबार शुरू करने जा रहे हैं तो आपके लिए आईटीआर अहम है। यही नहीं, अगर आप कोई कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना चाहते हैं तो आपको आईटीआर दिखाना पड़ेगा। किसी सरकारी विभाग में ठेका हासिल करने के लिए पिछले पांच साल का इनकम टैक्स रिटर्न दिखाना पड़ता है।
बैंक से लोन और क्रेडिट कार्ड लेना: अगर आप नियमित तौर पर आईटीआर फाइल करते हैं तो आपको बैंक से कार या होम लोन, क्रेडिट कार्ड आदि आसानी से मिल जाते हैं।
ज्यादा बीमा कवर मिलने में: अगर आप एक करोड़ रुपये का इंश्योरेंस कवर (टर्म प्लान) लेना चाहते हैं तो इंश्योरेंस कंपनियां आपसे आईटीआर प्रूफ मांग सकती हैं।
वीजा पाने में सुविधा: यदि आप कारोबार या नौकरी के सिलसिले में विदेश जाना चाहते हैं तो आपके लिए आईटीआर जरूरी है। बहुत से विदेशी दूतावास वीजा एप्लिकेशन के साथ पिछले दो साल का आईटीआर मांगते हैं।
पते का पक्का सबूत: आईटीआर की कॉपी आपके लिए रेसिडेंशल प्रूफ का काम करती है। आप इसका उपयोग सभी सरकारी कामों में कर सकते हैं।

देर से भरेंगे तो नुकसान क्या?

आपको आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। अगर इसमें देरी करते हैं तो इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
– अगर आप आईटीआर 1 अगस्त से 31 दिसंबर के बीच फाइल करते हैं तो आपको 5000 रुपये जुर्माना देना होगा। लेकिन अगर आपकी कुल सालाना आमदनी 5 लाख रुपये से कम है तो जुर्माने की रकम 1000 रुपये होगी।
– अगर आप 1 जनवरी से 31 मार्च 2019 तक रिटर्न फाइल करते हैं तो आपको 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा।
– अगर आप पर इनकम टैक्स की कोई देनदारी बनती है और रिटर्न देर से फाइल करते हैं, तब पेनल्टी के साथ-साथ देनदारी पर 1% हर महीने ब्याज भी लगेगा।

लास्ट डेट का इंतजार क्यों

अक्सर देखा जाता है कि हम लोग आईटीआर फाइल करने में देरी करते रहते हैं। सोचते हैं कि अभी तो आखिरी तारीख आने में देर है, अभी हड़बड़ी क्या है! लेकिन यह लाइन ‘भर देंगे’ से बचना चाहिए। दरअसल आखिरी समय में ई-फाइलिंग वेबसाइट के सर्वर पर ज्यादा लोड होने से आईटीआर फाइल करने में दिक्कत आ सकती है। बेहतर होगा कि आखिरी तारीख का इंतजार न करें और जल्दी से जल्दी इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल कर दें।

ऑनलाइन भरें या ऑफलाइन?

1. इलेक्ट्रॉनिक मोड
A. Online: इस प्रक्रिया में आईटीआर फाइल करने के लिए 15 मिनट का समय मिलता है। पूरा फॉर्म भरने के बाद आपको फ़ौरन जमा करना पड़ता है। इसमें समय की पाबंदी है। हालांकि इसका फायदा यह है कि रिटर्न फाइल करने का कंफर्मेशन आपको ई-वेरिफिकेशन के जरिए तुरंत मिल जाता है।
B. Offline: ऑफलाइन प्रक्रिया में आप आईटीआर फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं और आराम से बैठकर भर सकते हैं। इसमें समय की कोई पाबंदी नहीं होती। फॉर्म भरने के बाद इसे सेव करना होता है और फिर इनकम टैक्स की वेबसाइट पर लॉगइन कर इसे अपलोड कर सबमिट करना होता है।
2. व्यक्तिगत रूप से: यदि आप फॉर्म भरते समय कंप्यूटर का प्रयोग नहीं करना चाहते तो आईटीआर फॉर्म डाउनलोड करके या बाजार से खरीदकर उसे भरें और फिर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में व्यक्तिगत रूप से जाकर जमा कराएं और वहां से स्टांप लगवाकर रसीद ले लें। कहां आपको फॉर्म जमा करना है, उसका पता आपको आपके पैन कार्ड से मिल सकता है। इस प्रक्रिया को ऐसे समझें:
– वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं।
– यहां लेफ्ट साइड में आपको Quick Links मिलेगा। इसमें आपको नीचे की तरफ Know Your PAN|TAN|AO का ऑप्शन मिलेगा।
– यहां AO पर क्लिक करें। अपना पैन नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें।
– आपको ओटीपी मिलेगा। इसे भरकर आप अपने इनकम टैक्स ऑफिस और वार्ड का पता लगा सकते हैं।
हाथ से भरकर रिटर्न जमा कराने पर छूट उन्हें ही है जो नीचे की 3 में से कोई 1 शर्त पूरी करते हों:
1. जिनकी सालाना आमदनी 5 लाख रुपये या इससे कम हो
2. जिनके रिटर्न में कोई रिफंड का क्लेम न हो
3. जिनकी उम्र 80 साल या इससे ज्यादा हो

जानें कुछ बेसिक टर्म्स

Financial Year
1 अप्रैल से 31 मार्च तक के समय को फाइनैंशल इयर कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक के समय को फाइनैंशल इयर 2017-18 कहा जाएगा। अभी हम जो रिटर्न भर रहे हैं, वह फाइनैंशल इयर 2017-18 के लिए है।

Assessment Year
असेसमेंट इयर फाइनैंशल इयर से आगे वाला साल होता है यानी जिस साल उस फाइनैंशल इयर के टैक्स संबंधी मामलों का असेसमेंट किया जाता है। मसलन फाइनैंशल इयर 2017-18 के लिए असेसमेंट इयर 2018-19 होगा।
Deductions
विभिन्न तरह की इन्वेस्टमेंट पर इनकम टैक्स विभाग की ओर से आपको टैक्स में छूट मिलती है। ये कई तरह के आइटम होते हैं, जहां इन्वेस्टमेंट करके टैक्स में छूट हासिल की जा सकती है। मसलन सेक्शन 80सी से सेक्शन 80यू तक जो भी आइटम हैं, उन्हें डिडक्शन के तहत माना जाता है।
Gross Income
टैक्स-फ्री आमदनी और अलाउंसेस को छोड़कर आपकी साल की कुल आमदनी जो भी है, उसे ग्रॉस इनकम कहा जाता है। ग्रॉस इनकम हमेशा 80 सी से 80 यू तक मिलने वाले डिडक्शन से पहले वाली इनकम होती है।
Taxable Income
ग्रॉस इनकम में से 80 सी से 80 यू तक मिलने वाले डिडक्शन क्लेम कर लेने के बाद जो इनकम आती है, उसे टैक्सेबल इनकम कहते हैं, यानी डिडक्शन से पहले वाली इनकम ग्रॉस इनकम और डिडक्शन के बाद वाली इनकम को टैक्सेबल इनकम कहते हैं।
TDS
आपकी जो भी आमदनी होती है, सरकार उस पर टैक्स काटती है। इसे टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स कहा जाता है। जो संस्था आपको पेमेंट कर रही है, वही टैक्स की इस रकम को काटकर बाकी रकम आपको पे करती है। मसलन आपकी कंपनी आपको जो सैलरी देती है, वह उस पर बनने वाले टैक्स को काटकर बाकी रकम आपके खाते में ट्रांसफर करती है। टीडीएस काटने का काम एंम्प्लॉयर या पेमेंट करने वाली संस्था का है। इसे काटना या जमा करना लेने वाले की जिम्मेदारी नहीं है। आमतौर पर जब कोई संस्था किसी काम के बदले आपको भुगतान करती है, तो वह 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटती है।
Senior Citizen
जिन लोगों की उम्र 31 मार्च 2018 को 60 साल या उससे ज्यादा, लेकिन 80 साल से कम थी, उन्हें सीनियर सिटिजन माना जाएगा। सुपर सीनियर सिटिजन इसी तरह जिन लोगों की उम्र 31 मार्च 2018 को 80 साल या उससे ज्यादा थी, वे सुपर सीनियर सिटिजंस होंगे। आप जिस फाइनैंशल इयर का रिटर्न भर रहे हैं, उसके आखिरी दिन 31 मार्च को उम्र की गिनती की जाती है।
Income Tax Refund
अगर किसी टैक्सपेयर ने सरकार को ज्यादा टैक्स दे दिया है, तो वह उस रकम को सरकार से वापस ले सकता है। इस वापस आई रकम को ही रिफंड कहा जाता है। टैक्स रिटर्न भरकर आप इस एक्स्ट्रा रकम को इनकम टैक्स विभाग से क्लेम करते हैं। इसके बाद रिफंड की यह रकम आपको इनकम टैक्स विभाग की ओर से आपके अकाउंट में भेज दी जाती है।
Form16
अगर आप कहीं नौकरी करते हैं तो आपका एम्प्लॉयर आपको एक फॉर्म 16 देता है। यह फॉर्म अब तक आपके एम्प्लॉयर ने आपको दे दिया होगा। यह इस बात को साबित करता है कि एम्प्लॉयर ने आपकी सैलरी से अगर टैक्स बनता है, तो टीडीएस काटा है। इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक हर एम्प्लॉयर के लिए जरूरी है कि वह फॉर्म 16 अपने कर्मचारियों को दे। अगर आपका एम्प्लॉयर आपको यह फॉर्म नहीं दे रहा है तो आप इसकी रिक्वेस्ट उसे रजिस्टर्ड डाक से भेजें और इसका सबूत अपने पास रखें। इनकम टैक्स विभाग के पूछताछ करने पर यह सबूत दिखाया जा सकता है।
Form16A
अगर सैलरी के साथ-साथ दूसरे जरियों से भी आपको आमदनी हुई हो और उस पर टीडीएस कट चुका हो तो उस संस्था से भी टीडीएस सर्टिफिकेट ले लें। इस सर्टिफिकेट को ही फॉर्म 16ए कहा जाता है। यहां हम रेंटल इनकम, शेयर, एफडी वगैरह से होने वाली इनकम की बात कर रहे हैं। एफडी के मामले में आपका बैंक आपको यह सर्टिफिकेट देगा।
Form26AS
फॉर्म 26एएस एक कंसॉलिडेटेड टैक्स स्टेटमेंट है। इसमें खासतौर से तीन तरह के ब्योरे होते हैं। पहला: टीडीएस का ब्योरा, दूसरा: टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स का ब्योरा और तीसरा: टैक्सपेयर द्वारा बैंक में जमा कराया गया एडवांस टैक्स/सेल्फ असेसमेंट टैक्स का ब्योरा। फॉर्म 26एएस से आप यह पता लगा सकते हैं कि कंपनी या बैंक ने आपका जो टीडीएस काटा है, उसे सरकार के पास जमा कराया भी है या नहीं।

कौन-सा भरें फॉर्म?

ITR-1: इसे सहज के नाम से भी जाना जाता है। यह सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और अन्य स्रोत के जरिए कुल 50 लाख रुपये सालाना आमदनी तक वालों के लिए होता है। पहले जानें कि अन्य स्रोत का मतलब क्या होता है। दरअसल, किसी भी व्यक्ति की आमदनी के पांच मुख्य स्रोत होते हैं:

पहला: सैलरी
दूसरा: हाउसिंग प्रॉपर्टी में किराए से आमदनी
तीसरा: बिजनेस या प्रफेशन तरीके से इनकम
चौथा: कैपिटल गेंस (शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड, हाउस प्रॉपर्टी और जूलरी बेचने आदि से हुआ प्रॉफिट)
पांचवां: इन चारों से अलग आमदनी का जो भी स्रोत होगा। यह स्रोत अन्य में आएगा।

ITR-2: यह फॉर्म उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी इनकम बिजनेस या प्रोफेशन से नहीं होती। इनकी आय हाउस प्रॉपर्टी या पूंजी के जरिए अर्जित होती है। अगर किसी के पास कुछ विदेशी संपत्ति है या उसे विदेश से कमाई है, उसे भी आईटीआर फॉर्म 2 भरना होगा।
ITR-3: यह फॉर्म उन लोगों के लिए भरना जरूरी होता है, जो खुद बिजनेस कर रहा हो या किसी प्रफेशन से आमदनी हासिल कर रहे हों।
नोट: इनके अलावा और भी फॉर्म हैं, जिनकी जरूरत बिजनेस या दूसरी तरह की आमदनी से जुड़े लोगों के लिए होती है। इसके लिए एक्सपर्ट से जानकारी लें।

ITR-1 भरने के नए नियम और बदलाव

1. अब सैलरी वालों को ITR फाइल करते समय सैलरी ब्रेकअप देना होगा। यह जानकारी आपको फॉर्म 16 के पार्ट B में मिल जाएगा। मसलन: Basic Salary, HRA, Conveyance Allowance, Medical etc।
2. आपको ITR फॉर्म में नोटबंदी के दौरान जमा की गई रकम की जानकारी इस बार नहीं देनी होगी। यह कॉलम अब खत्म कर दिया गया है।
3. इस बार ITR-1 फॉर्म को सिर्फ भारत में रहने वाले नागरिक ही भर पाएंगे।
4. आपको सिंगल हाउस प्रॉपर्टी से हुई आमदनी का ब्रेकअप ITR-1 में देना होगा।
5. किराए पर काटे गए TDS के संबंध में डिटेल्स (फॉर्म 26QC) की भी जानकारी देनी होगी। साथ ही मकान मालिक का पैन नंबर भी देना होगा।

कैसे डाउनलोड करें ITR फॉर्म

सभी ITR फॉर्म डाउनलोड कर भरे जा सकते हैं, लेकिन अगर आप ITR-1 भरने जा रहे हैं, तो इसे बिना डाउनलोड किए भी भरा जा सकता है। ITR फॉर्म डाउनलोड ऐसे करें:
– इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं।
– यहां आपको लेफ्ट साइड में Quick Links के नीचे Submit Returns/Forms का ऑप्शन मिलेगा। इसे क्लिक करें।
– इसके बाद आपको ऊपर की तरफ Home के बराबर में Downloads का ऑप्शन मिलेगा। इसे क्लिक करें।
– अब आपको Income Tax Return Preparation Utilities का ऑप्शन मिलेगा। इसे क्लिक करें।
– यहां आपको ITR फॉर्म मिल जाएंगे। जरूरत के हिसाब से फॉर्म को डाउनलोड कर लें। आमतौर पर आपको ITR-1 ही डाउनलोड करना होगा। हो सके तो एक्सल यूटिलिटी में फॉर्म डाउनलोड करें। इसे भरने में आसानी होती है।

जानें, क्या होगा आपका टैक्स रेट

इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक ही तय होता है कि आपको कितना टैक्स देना होगा। सरकार अमूमन हर साल इनकम टैक्स स्लैब रेट बजट में तय करती है। साल भर में हुई कुल इनकम में से HRA, Medical, Conveyance और LTA की Exemption घटाने के बाद जो रकम बचती है, उस रकम पर इनकम टैक्स दर के हिसाब से इनकम टैक्स लगता है। 2017-18 के लिए इनकम टैक्स स्लैब रेट हैंः

इनकम टैक्स स्लैब (59 साल तक की उम्र वालों के लिए)…………
कुल आमदनी अगर ढाई लाख रुपये या इससे कम है तो आपको कोई टैक्स नहीं देना है और न ही रिटर्न भरने की जरूरत है।

आमदनी अगर ढाई लाख रुपये से ज्यादा मगर 5 लाख रुपये या इससे कम है तो ढाई लाख रुपये से ज्यादा जितनी आमदनी है, उस पर 5% की दर से इनकम टैक्स देना होगा।

3.50 लाख रुपये तक की आमदनी वालों को 2500 रुपये की छूट सेक्शन 87A के तहत मिलती है। मतलब, आपके कुल टैक्स में से 2500 रुपये घट जाते हैं। इस कारण 3 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स-फ्री हो जाती है।

आमदनी अगर 5 लाख रुपये से ज्यादा मगर 10 लाख रुपये या इससे कम है तो ढाई लाख रुपये पर 5% की दर से 12,500 रुपये इनकम टैक्स देना होगा और 5 लाख रुपये से ज्यादा जितनी आमदनी है, उस पर 20% की दर से इनकम टैक्स देना होगा।

आमदनी अगर 10 लाख रुपये से ज्यादा है तो 10 लाख रुपये पर 1,12,500 रुपये इनकम टैक्स देना होगा और 10 लाख रुपये से ज्यादा जितनी आमदनी है, उस पर 30% की दर से इनकम टैक्स देना होगा।

इनकम टैक्स स्लैब (60 से 79 साल तक के उम्र के बुजुर्गों के लिए)…………
आमदनी इनकम टैक्स दर
0 से 3 लाख रुपयेः 0%
3 लाख+ से 5 लाखः 5%
5 लाख+ से 10 लाखः 20%
10 लाख से ऊपरः 30%

इनकम टैक्स स्लैब (80 साल या इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए)…………
आमदनी इनकम टैक्स दर
0 से 5 लाख रुपयेः 0%
5 लाख+ से 10 लाखः 20%
10 लाख से ऊपरः 30%

नोट: 1. इनकम टैक्स पर 3% एजुकेशन और हेल्थ सेस अतिरिक्त लगेगा
2. 50 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई पर 10% सरचार्ज
3. एक करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई पर 15% सरचार्ज
4. किसी भी उम्र की महिलाओं के लिए कोई अलग छूट या टैक्स रेट नहीं है

Q&A

सवाल: मेरे पास पैन कार्ड है। मेरी कोई इनकम नहीं है, क्या फिर भी मुझे रिटर्न फाइल करना होगा?
जवाब: नहीं।
सवाल: मेरे बच्चे की उम्र 18 साल से कम है, क्या उसे भी रिटर्न फाइल करना होगा?
जवाब: अगर बच्चा अपनी ऐक्टिविटी से कुछ भी कमाता है और वह इनकम टैक्स के दायरे में आता है तो उसे भी रिटर्न फाइल करना होगा। अगर बच्चे के नाम एफडी, एलआईसी या दूसरा कोई निवेश है तो इनका जिक्र इन सुविधाओं के पैसे का भुगतान करने वाले (माता-पिता या अभिभावक या अन्य) को अपनी आईटीआर में करना होगा।
सवाल: मेरा बच्चा 18 साल से कम है और उसे कोई महंगा गिफ्ट मिला है तो उसे रिटर्न फाइल करना होगा?
जवाब: नहीं, क्योंकि जो गिफ्ट देगा, वह एक बैंकिंग सिस्टम से आया होगा। ऐसे में गिफ्ट देने वाले को इसका जिक्र करना होगा।
सवाल: मेरे पास ई-बैंकिंग सुविधा नहीं है। बैंक स्टेटमेंट के लिए क्या पास बुक से काम चल जाएगा?
जवाब: दरअसल, बैंक स्टेटमेंट की जरूरत बैंक में जमा पैसे पर मिले ब्याज की जानकारी के लिए होती है। यही जानकारी पासबुक में भी होती है। उसे आप अपडेट जरूर करा लें।
सवाल: मैंने टैक्स सेविंग के लिए अभी तक किसी में निवेश नहीं किया है। क्या मैं टैक्स छूट के लिए अब निवेश करा सकता हूं?
जवाब: अब निवेश का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि इस रिटर्न में 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 के बीच किए गए निवेश पर ही टैक्स छूट का फायदा मिलेगा।
सवाल: मैंने जनवरी 2018 से दूसरी जगह नौकरी शुरू की है। ऐसे में मुझे क्या करना होगा?
जवाब: अगर आपने एक फाइनैंशल इयर में नौकरी बदली है, तो आपको दोनों ही जगह की आमदनी को रिटर्न में दिखाना होगा।

PAN नहीं है तो क्या करें?

अगर आप इनकम टैक्स भरना चाहते हैं या रिटर्न फाइल करना चाहते हैं, तो आपके लिए पैन कार्ड जरूरी है। अगर आपने अभी तक पैन कार्ड नहीं बनवाया है, तो चिंता होने की बात नहीं है। आप तुरंत ही ई-पैन बनवा सकते हैं। इस सुविधा का लाभ सिर्फ इंडिविजुअल्स को ही मिल पाएगा। ई-पैन कार्ड इस तरह बना सकते हैं:

– सबसे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं।
– यहां लेफ्ट साइड में आपको Quick Links लिखा दिखेगा। इसमें दिए सबसे पहले ऑप्शन Instant e-PAN पर क्लिक करें और दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।
– ई-पैन कार्ड के लिए आपके पास आधार नंबर होना जरूरी है और इससे जुड़ा मोबाइल नंबर आपके पास ऐक्टिव स्थिति में होना चाहिए।
– यह पेपरलैस सुविधा है। आवेदकों को किसी भी प्रकार का डॉक्युमेंट भेजने की जरूरत नहीं है।
– ई-पैन के लिए आवेदक को एक वाइट पेपर पर अपना साइन कर उसे स्कैन करके अपलोड करना होगा। यह साइन JPEG मोड में और 10KB से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
– एप्लिकेशन भरने और इसके सफलतापूर्वक समिट होने के बाद तुरंत पैन जेनरेट हो जाएगा। यह आपके मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी पर भेज दिया जाएगा। कुछ दिनों बाद पैन आवेदक के पते पर भेज दिया जाएगा। पैन कार्ड चाहे बाद में मिले, इससे मोबाइल पर आए नंबर की मदद से अपना रिटर्न भर सकते हैं।

कैसे करें PAN को आधार से लिंक?

ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने के लिए आपका पैन और आधार एक-दूसरे से लिंक होना जरूरी है, पर अनिवार्य नहीं। सरकार ने पैन को आधार से लिंक कराने की तारीख फिर से बढ़ाकर 31 मार्च 2019 कर दी है। पैन को आधार से लिंक कराने की प्रक्रिया इस प्रकार है-

– सबसे पहले incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं।
– यहां लेफ्ट साइड में Quick Links दिखा मिलेगा। इस लिंक के नीचे दूसरे नंबर पर लिखे Link Aadhaar पर क्लिक करें।
– फिर आपको सबसे ऊपर Click here मिलेगा। अगर आपने पहले ही अपना पैन और आधार लिंक किया है, तो इसका स्टेटस देखने के लिए Click here पर क्लिक करें।
– अगर आपने अपना आधार पैन से लिंक नहीं किया है, तो Click here के नीचे दिए पैन, आधार नंबर और अपना नाम और इमेज में लिखे अक्षरों को टाइप करें।
– इसके बाद नीचे दिए गए आधार लिंक पर क्लिक करें।
– इसके बाद आपका पैन और आधार लिंक हो जाएगा। अगर कोई परेशानी आती है तो यहां पता चल जाएगा।
– अगर आधार में आपके नाम या जन्मतिथि से संबंधित कोई परेशानी है, तो UIDAI की वेबसाइट पर जाकर आधार में सुधार करवा लें।

कौन-कौन से डॉक्युमेंट्स चाहिए?

रिटर्न चाहे आप खुद भरें या सीए, TPA की मदद से, आपको ये दस्तावेज तैयार रखने होंगे:
1. PAN
2. आधार
3. Form16
4. Form16A
5. आपके जितने भी बैंक अकाउंट हैं, सभी की 31 मार्च 2018 तक अपडेट हुई स्टेटमेंट या पासबुक तैयार रखें। हर बैंक अकाउंट में देखें कि सालभर में कितना बैंक इंट्रेस्ट दिया गया है। यह साल में चार बार दिया जाता है। सभी का टोटल करें।
6. अगर आपकी कोई FD है, तो बैंक या पोस्ट ऑफिस जाकर उसका Accrued Interest मालूम कर लें। ये दोनों तरह के ब्याज आपको रिटर्न फॉर्म में Income from Other Sources में दिखाने हैं।
7. रिटर्न में आपको Deduction under Chapter VI-A में भी 80C आदि की जानकारी देनी होती है, जिसके आधार पर आपको इनकम टैक्स में कटौती मिलती है। मसलन: इंश्योरेंस, पीपीएफ, मेडिक्लेम, ट्यूशन फीस आदि। इन्हें भरने के लिए आप Form16 के Part B की मदद लें, क्योंकि इन निवेश और खर्चों की जानकारी अपने ऑफिस में पहले ही दे चुके होते हैं। अगर कोई निवेश या खर्च ऑफिस में दर्ज कराने से छूट गया है तो उसे अब आप रिटर्न में बताकर अपनी टैक्स देनदारी घटा सकते हैं और रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
8. होम लोन/ब्याज के सर्टिफिकेट (यह लोन देने वाली संस्था से मिल जाएगा) और खर्चों, निवेश के पेपर लेकर जाएं।

फॉर्म भरने से पहले करें टैक्स कैलकुलेट

अपना टैक्स जानने के लिए आप टैक्स कैलकुलेटर की मदद ले सकते हैं। यह इनकम विभाग की वेबसाइट पर भी है। इसके लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट खोलें। लेफ्ट में Quick Links में नीचे में तीसरे स्थान पर Tax Calculator मिलेगा। इसकी हेल्प से अपना टैक्स इस प्रकार कैलकुलेट करें:
– Tax Calculator पर क्लिक करने के बाद Tax Tools वाला पेज खुल जाएगा। यहां आप Individual/HUF वाला ऑप्शन चुनें। इसके नीचे आपको कुछ बॉक्स मिलेंगे। इनमें दूसरी लाइन में दूसरे नंबर पर Income and Tax calculator का बॉक्स मिलेगा। इसे क्लिक करें। इसके बाद आपको कुछ ऑप्शन मिलेंगे।
– सबसे पहले Assessment Year में 2018-19 को सिलेक्ट करें।
– शुरू की जानकारी देने के बाद आप पांचवें नंबर पर Income from Salary भरें। इसका जिक्र आपको फॉर्म 16 में मिलेगा। इसके लिए आप फॉर्म 16 का Part B खोलें।
– यहां Gross Salary में दी गई रकम में से u/s 10 के तहत दिए गए Allowances घटाने के बाद जो रकम आएगी, उसे Income from Salary में भरें।
– अब अगर आपकी हाउस प्रॉपर्टी से आमदनी (किराया) है, तो उसे यहां लिखें। वैसे अगर आपके पास कैपिटल गेंस से आमदनी है, तो आप उसे यहां किसी एक्सपर्ट की मदद से भर सकते हैं।
– इसके बाद आप Income From Other Sources में जाकर राइट साइट में लिखे Show Details पर क्लिक करें। अब यहां कुल Interest की रकम भरें।
– अब कैलकुलेटर में थोड़ा नीचे की ओर दिए गए Deductions पर आ जाएं। इस लाइन में आपको राइट साइड में Show Details लिखा मिलेगा। इसे क्लिक करें।
– यहां आपको पहला ऑप्शन Life Insurance premium paid का मिलेगा। अगर आपने कोई बीमा कराया है, तो उसकी प्रीमियम की अमाउंट यहां भरें।
– इसके बाद आपको अन्य ऑप्शन जैसे PPF, NSC, ULIP, MF/UTI आदि मिलेंगे। अगर आपको पास इनमें से कुछ है, तो उसकी प्रीमियम का जिक्र करें।
– इसके बाद आता है Tuition fees paid for children का ऑप्शन। इसके अंतर्गत आप किन्हीं दो बच्चों की पढ़ाई के खर्च पर आप छूट ले सकते हैं, बच्चों की उम्र कुछ भी हो। इसमें अधिकतम सीमा 1.50 लाख रुपये है। एजुकेशन फुलटाइम होनी चाहिए। प्राइवेट ट्यूशन या कोचिंग आदि में दी गई फीस इसमें नहीं चलेगी। साथ ही किताबों पर होने वाले खर्च, दाखिले के वक्त दिया गया डोनेशन, कैपिटेशन फीस, एडमिशन फीस, ऐनुअल चार्जेज (वार्षिक शुल्क), डिवेलपमेंट चार्ज आदि भी इसमें शामिल नहीं कर सकते।
– इन्हें भरने के बाद इनका टोटल अपने आप हो जाएगा। यहां ध्यान रहे, आप चाहे सेविंग की कितनी भी अमाउंट भर दें, लेकिन नियमानुसार आपको सिर्फ 1.50 लाख तक की ही छूट मिल सकती है।
– इसके बाद आप मेडिकल क्लेम प्रीमियम और अन्य सेविंग के बारे में जानकारी दें।
– सारी चीजें भरने के बाद Net Taxable Income अपने आप आ जाएगी।
– अब आपको Form 16 के Part A की जरूरत होगी। इसमें कंपनी द्वारा काटे गए TDS का जिक्र होता है। अगर TDS की रकम Tax Payable से ज्यादा है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। यही नहीं, इसका अर्थ हुआ कि सरकार के पास आपका ज्यादा पैसा जमा हो गया है और इसे पाने के लिए आप क्लेम कर सकते हैं। आपको यह क्लेम आईटीआर फाइल करते समय करना होगा। वहीं अगर TDS की रकम Tax Payable से कम है, तो बची रकम पर कुछ सेस लगने के बाद आपको इसे टैक्स के रूप में देना होगा। और अगर TDS और Tax Payable की अमाउंट बराबर है, तो आपको न कुछ देना है और न ही कुछ लेना है।
– अब अगर आप पर टैक्स लायक रकम निकलती है, तो आपको आगे की प्रक्रिया से पहले इसे जमा कराना होगा। आप इसे ऑनलाइन या बैंक जाकर चालान फॉर्म के जरिए जमा करा सकते हैं। रिटर्न फाइल करते समय आपको चालान संख्या देनी होगी।
कटौती बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाएं: आमदनी कम और कटौती को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाएं। आप पर कार्रवाई हो सकती है।
सभी बैंक अकाउंटों की जानकारी दें: बैंक का खाता चाहे वह चल रहा हो या फाइनैंशल इयर में बंद हो गया हो, रिटर्न भरते समय सबकी जानकारी दें। अगर जॉइंट अकाउंट है तो अकाउंट होल्डरों की जानकारी दें।
एक्सपर्ट से राय लें: अगर आपको किसी भी चीज को समझने में परेशानी आती है तो एक्सपर्ट की राय लें।

ई-रिटर्न फाइल करने के लिए रजिस्ट्रेशन

ई-रिटर्न फाइल करने से पहले आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन:
– इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं।
– यहां आपको राइट साइड में ऊपर की तरफ New To e-Filing? लिखा मिलेगा। इसके ठीक नीचे लिखे Register Yourself पर क्लिक करें।
– यहां क्लिक करने के बाद आपको Select User Type मिलेगा। अगर आप अपने लिए आईटीआर फाइल करना चाहते हैं तो आप Individual पर और फिर Continue पर क्लिक करें।
– यूजर टाइप सिलेक्ट करने के बाद आपको अपना पैन, नाम, जन्मतिथि, रेसिडेंशल स्टेटस आदि भरनी होंगी।
नोट: अगर आपका सिर्फ फर्स्ट नेम है। मिडल या सरनेम नहीं है। मसलन, संजय सिंह या संजय कुमार सिंह ना होकर नाम सिर्फ संजय है और यही नाम आपके पैन और आधार कार्ड पर भी है तो आपको Surname वाले बॉक्स में संजय लिखना होगा ना कि फर्स्ट नेम वाले बॉक्स में। ऐसे में मिडल और फर्स्ट नेम वाले बॉक्स को खाली छोड़ना होगा।
– इसे भरने के बाद Continue पर क्लिक करें। यहां एक रजिस्ट्रेशन फॉर्म आएगा, जिसमें आपको अपनी कुछ व्यक्तिगत जानकारी देनी होगी। साथ ही आपको इनकम टैक्स की वेबसाइट पर अकाउंट खोलने के लिए एक पासवर्ड भरना होगा।
– तीसरे स्टेप में आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी पर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेशन कोड भेजे जाएंगे। इन्हें भरकर आप चौथे स्टेप में पहुंच जाएंगे।
– चौथे स्टेप में आपको ट्रांजेक्शन और यूजर आईडी का मेसेज डिस्प्ले होगा। यह जानकारी आपको आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल पर भी भेज दी जाएगी। अब आपका अकाउंट इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर बन गया है। इसके बाद आपको ऑनलाइन रिटर्न की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

फॉर्म 26AS को चेक करें

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन करते ही सबसे पहले आप अपना फॉर्म 26AS चेक करें। यह वह फॉर्म होता है, जिसमें कंपनी द्वारा काटे गए TDS और उसके TAN का जिक्र होता है। इसे इस प्रकार देखें:
– सबसे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in पर जाएं और लॉगइन करें।
– यहां ऊपर लेफ्ट साइट में My Account पर जाकर पहले ऑप्शन View Form 26AS (Tax Credit) पर क्लिक करें।
– यहां आपको Confirm पर क्लिक करना होगा और फिर एक दूसरी टैब खुल जाएगी। यह TDSCPC की बेवसाइट होगी।
– यहां आपको I agree… पर क्लिक कर Proceed पर क्लिक करना होगा।
– इसके बाद आपको नीचे की ओर Click View Tax Credit (Form 26AS) to view your Form 26AS दिखाई देखा।
– इसमें View Tax Credit (Form 26AS) पर क्लिक करते ही अापका फॉर्म 26AS आ जाएगा।
– आपको जिस असेसमेंट इयर के बारे में जानकारी चाहिए उसे क्लिक करें और फिर View As में HTML पर सिलेक्ट करें। इसके बाद ठीक नीचे View/Download पर क्लिक करें। इसके बाद आप TDS की जानकारी देख सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक मोड से कैसे भरें ITR-1?

अगर आप ITR-1 फॉर्म भरने जा रहे हैं तो इसे आप दो तरह से कर सकते हैं।
1. बिना डाउनलोड किए ITR फाइल
– इसमें आईटीआर-1 फॉर्म भरने में आपको करीब 15 मिनट का समय मिलेगा।
– सबसे पहले incometaxindiaefiling.gov.in पर जाकर Registered User? में अपनी User ID, पासवर्ड और Captcha Code डालकर लॉगनइन करें।
– इसके बाद आप ऊपर ही दिए e-File के ऑप्शन में जाएं।
– यहां आपको पहला ऑप्शन Income Tax Return का मिलेगा। इसे क्लिक करें।
– यहां असेसमेंट ईयर 2018-19 सिलेक्ट करें।
– इसके बाद आईटीआर फॉर्म की लिस्ट में ITR-1 (या जो भी हो) सिलेक्ट करें।
– सबमिशन मोड में Prepare and Submit Online सिलेक्ट करें।
– यहां आपको वेरिफिकेशन के तीन ऑप्शन मिलेंगे। अगर आप ई-वेरिफिकेशन चाहते हैं, तो आधार ओटीपी या EVC में से किसी एक का विकल्प चुनना होगा। वहीं अगर आप फॉर्म को सबमिट करने के बाद डाक से बेंगलुरु भेजना चाहते हैं, तो तीसरे विकल्प को चुनें। ई-वेरिफिकेशन के जरिए आईटीआर फाइल करने के तुरंत बाद ही आपके पास कंफर्मेशन मेसेज आ जाता है, लेकिन भरा हुआ फॉर्म बेंगलुरु भेजने के बाद आपको कंफर्मेशन का इंतजार करना पड़ता है। बेहतर होगा कि आप ई-वेरिफिशन का प्रयोग करें।
आधार ओटीपी: यहां पर क्लिक करने के बाद ओटीपी आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आएगा। इसे भरने के बाद आपको आईटीआर फाइल होने का कंफर्मेशन मेसेज आपके मोबाइल पर भेज दिया जाएगा।
EVC: इस विकल्प में बैंक द्वारा एक नंबर जेनरेट होता है, जो 72 घंटे तक वैलिड रहता है। इस 72 घंटे में आपको आईटीआर वेरिफाई कराना पड़ता है। यह नंबर आपको एटीएम से मिलता है। हालांकि यह सुविधा केवल कुछ बैंक ही देते हैं।
IRT-V: तीसरे विकल्प में ई-वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। इसमें आईटीआर भरकर और उसकी सॉफ्ट कॉपी का प्रिंटआउट लेते हैं। इस पर साइन कर साधारण डाक या स्पीड पोस्ट से Centralised Processing Centre, Income Tax department, Bengaluru, 560500 के पते पर भेजना होता है। हालांकि बेहतर होगा कि आप आधार OTP का प्रयोग करें।
– अगर आप आधार OTP का ऑप्शन चुनेंगे तो उसे सिलेक्ट करने के बाद Continue पर क्लिक करें।
– अब आपके सामने आईटीआर-1 फॉर्म खुल जाएगा। यहां आपको छह टैब मिलेंगे: Instructions, Part A General Information, Computation of Income and Tax, Tax Details, Taxes Paid And Verification और 80 G। फॉर्म भरते समय जरूरी नहीं कि आपको सभी जानकारियां देनी होंगी। जो जानकारी आपके लिए जरूरी नहीं है, उसे छोड़ दें। कुछ जानकारियां कंप्यूटर खुद भर देगा। आपके जानकारी भरते ही आगे की जानकारी खुद आ जाएगी।
– पहले टैब में दी गईं इंस्ट्रक्शंस ध्यान से पढ़ें। हर टैब को भरने के बाद टैब के ऊपर और नीचे दोनों ओर Save Draft करते जाएं। अगर कंप्यूटर अचानक बंद हो जाता है या समय पूरा हो जाता है, तो ऐसे में आपका भरा हुआ उतना फॉर्म सेव रहेगा और आप फिर से लॉगइन करके आगे का फॉर्म भर सकोगे।
– अब दूसरे टैब में आ जाएं। यहां आपको आपकी जनरल इंफर्मेशन रहेगी। यह इंफर्मेशन आपको भरी हुई मिलेगी। कुछ चीजें आपको भरनी होंगी।
– तीसरे टैब में आपको अपनी इनकम और डिडक्शन के बारे में जानकारी देनी है। यह जानकारी आपको फॉर्म 16 में मिल जाएगा। यहां ये जानकारी आपको उसी तरह भरनी है, जैसे कैलकुलेटर में भरी थी।
– चौथे टैब में आपको फॉर्म-16 में काटे गए टैक्स डिडक्शन के बारे में जानकारी भरनी है। अगर इसमें कोई परेशानी आए तो किसी एक्सपर्ट से सलाह लें। अगर सैलरी के अलावा आपकी कोई आमदनी नहीं है, तो अगले तीन स्थान खाली छोड़ दें। आखिरी स्थान पर अगर आपने टैक्स कैलकुलेट करने के बाद उसे भरा है, तो उसकी डिटेल्स यहां भरें।
– पांचवें टैब का अधिकतर हिस्सा अपने आप भरा होगा। यदि कोई रिफंड होगा, तो वह भी दिखाई देगा। साथ ही यहां आपको बैंक अकाउंट की जानकारी और वेरिफिकेशन का ऑप्शन मिलेगा।
– छठे टैब में भी आपको टैक्स में कुछ अन्य छूट के बारे में जरूरी है तो जानकारी देनी होगी।
– इसके बाद आप इस पेज के नीचे ही दिए Preview and Submit पर क्लिक करें। भरा हुआ पूरा फॉर्म सही से चेक करें और कंफर्म होने पर सबमिट कर दें। यहां प्रिंट का ऑप्शन आएगा। अगर आपने आईटीआर वाया डाक बेंगलुरू भेजने का ऑप्शन चुना है तो आपके लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी हो गई। आप प्रिंट लेकर उसे डाक से भेज दें। लेकिन अगर आपने ई-वेरिफिशन का विकल्प चुना है तो इसके बाद आपके आधार से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। इसे फीड करने के बाद आपको आईटीआर कंप्लीट होने का मेल और मेसेज आ जाएगा। लो हो गया आपका आईटीआर फाइल।
2. डाउनलोड कर ITR फाइल करना
ITR-1 डाउनलोड करने के बाद फॉर्म भरने की प्रक्रिया बिना डाउनलोड किए फॉर्म को भरने की तरह ही है, लेकिन इसमें कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है:
– इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in से आप फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं।
– फॉर्म में दी जाने वाली सभी जरूरी जानकारी पहले ही इकट्ठी कर लें।
– फॉर्म के सबसे नीचे पांच टैब (पहला Income Details, दूसरा TDS, तीसरा TCS, चौथा Taxes Paid and Verification और पांचवां 80G) दिए गए हैं। सभी टैब में जरूरी जानकारी भरनी है। हर टैब के फॉर्म के राइट साइड में कुछ ऑप्शन दिए गए हैं जैसे Validate, Next आदि।
– बारी-बारी से हर टैब भरें। शुरूआत Income Details से करें।
– हर टैब के फॉर्म को भरने के बाद Validate पर क्लिक करें। अगर कुछ जानकारी छूट गई है तो इससे अपने आप पता चल जाएगा। एक टैब का फॉर्म पूरा भरने के बाद Next पर क्लिक कर आगे के टैब पर बढ़ते जाएं।
– पूरा फॉर्म भरने के बाद फॉर्म के राइट साइड में दिए ऑप्शन Gererate XML पर क्लिक करें। यहां कंप्यूटर द्वारा बनाई गई XML फाइल आपके कंप्यूटर में सेव हो जाएगी। इस बारे में कंप्यूटर की स्क्रीन पर मेसेज भी आएगा कि XML कहां सेव हुई है।

गलत फॉर्म भर गया तो…

अगर फॉर्म के सबमिट होने के बाद गलती का पता चले तो ऐसे में आप आईटीआर फॉर्म की जनरल इंफर्मेशन या इनकम डिटेल में मौजूद Wheather Original or Revised return में Revised पर क्लिक करें और आईटीआर फाइल करने की प्रक्रिया फिर से दोहराएं। ऐसा कितनी भी बार कर सकते हैं।

डाउनलोड भरे फॉर्म को सबमिट करना

– सबसे पहले इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर लॉगइन करें। यहां ऊपर ही आपको e-File का विकल्प मिलेगा। यहां क्लिक कर Income Tax Return पर क्लिक करें।
– इसके बाद आपको पैन भरना होगा, असेसमेंट इयर चुनना होगा। यहां आप 2018-19 पर क्लिक कर सिलेक्ट करें। फिर आपको आईटीआर फॉर्म का नाम सिलेक्ट करना होगा। यहां आपको पांच आईटीआर फॉर्म मिलेंगे। आपको ITR-1 फॉर्म भरना है तो ITR-1 पर सिलेक्ट करें।
– अब Submission Mode चुनना होगा। यहां आपको दो ऑप्शन Upload XML और Prepare and Submit Online मिलेगा।
– चूंकि आपने आईटीआर फॉर्म भरने के बाद Generate XML किया था, इसलिए आप सबमिशन मोड में Upload XML सिलेक्ट करें।
– Upload XML सिलेक्ट करते ही इनकम टैक्स रिटर्न वेरिफाई करने के लिए आपके सामने तीन विकल्प आएंगे। पहला विकल्प आधार ओटीपी, दूसरा विकल्प EVC और तीसरा विकल्प ITR-V होगा। इसका मतलब इस प्रकार है:
आधार ओटीपी: यहां पर क्लिक करने के बाद ओटीपी आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आएगा। इसे भरने के बाद आपको आईटीआर फाइल होने का कंफर्मेशन मेसेज आपके मोबाइल पर भेज दिया जाएगा।
EVC: इस विकल्प में बैंक द्वारा एक नंबर जेनरेट होता है, जो 72 घंटे तक वैलिड रहता है। इस 72 घंटे में आपको आईटीआर वेरिफाई कराना पड़ता है। यह नंबर आपको एटीएम से मिलता है। हालांकि यह सुविधा केवल कुछ बैंक ही देते हैं।
IRT-V: तीसरे विकल्प में ई-वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। इसमें आईटीआर भरकर और उसकी सॉफ्ट कॉपी का प्रिंटआउट लेते हैं। इस पर साइन कर साधारण डाक या स्पीड पोस्ट से Centralised Processing Centre, Income Tax department, Bengaluru, 560500 के पते पर भेजना होता है। हालांकि बेहतर होगा कि आप आधार आेटीपी का प्रयोग करें।

कॉमन गलतियां

– लोग सोचते हैं कि टैक्स भर देना ही काफी है। यह गलत है। टैक्स भरा है तो आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है।
– आईटीआर फाइल करते समय गलत फॉर्म चुन लिया जाना। अगर ऐसा हो गया तो तुरंत फिर से रिटर्न फाइल कर दें।
– ऐसी छोटी इनकम जो बैंकिंग सिस्टम में आ चुकी होती है, का जिक्र आईटीआर में नहीं करना। इससे बचें। हर बैंक ट्रांजेक्शन पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर रहती है।
– फॉर्म में फोन नंबर, आधार नंबर, पैन नंबर गलत डालना। सारे नंबर्स कंफर्म करके ही भरें।
– नाम, ईमेल आईडी, पोस्टल अड्रेस आदि भरते समय स्पेलिंग चेक न करना। गलत जानकारी देंगे तो इनकम टैक्स का नोटिस या कोई जानकारी मांगने वाला मेल आप तक नहीं पहुंचेगा और बाद में आपको परेशानी हो सकती है।
– फॉर्म भरते समय फॉर्म 26AS को फॉर्म 16 नहीं मिलाना। अगर फॉर्म 26AS और फॉर्म 16A में TAN और PAN के डिटेल्स मैच नहीं हुए तो आप TDS क्रेडिट क्लेम नहीं कर पाएंगे।
– एक फाइनैंशल इयर में दो जगह जॉब करने के बावजूद पिछली कंपनी से हुई आमदनी का ब्यौरा न देना। अगर आपने फाइनैंशल इयर में जॉब बदली है, तो आपको दोनों (या जितनी हों) कंपनियों से हुई इनकम के बारे में जानकारी देनी होगी।
– डिडक्शन वाले कॉलम में टैक्स बचाने के लिए जानबूझकर गलत जानकारी भरना। ऐसा करेंगे तो बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं।

यहां से ले सकते हैं मदद

फोन:
1. आयकर संपर्क केंद्र से सामान्य जानकारी पाने के लिए : 1800 180 1961 (या) 1961
समय: सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक (सोमवार से शनिवार)
2. ई-फाइलिंग, फॉर्म या अन्य: 1800 103 0025 (या) 08046122000 (या) 08026500026
समय: सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक (सोमवार से शनिवार)
3. रिफंड, आईटीआर प्रोसेसिंग और दूसरी जानकारी पाने के लिए : 1800 103 4455 (या) 08046605200
समय: सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक (सोमवार से शुक्रवार)
4. PAN से जुड़ी जानकारी पाने के लिए : 02027218080 (या) 02025658300
समय: सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक (सभी दिन)

ट्विटर:
आप इनकम टैक्स विभाग के ट्विटर हैंडल @IncomeTaxIndia और आधार के ट्विटर हैंडल @UIDAI से भी टैक्स से संबंधित जानकारी ले सकते हैं।

मोबाइल ऐप: आयकर सेतु
इनकम टैक्स विभाग का Aaykar Setu नाम से एक ऐप है। इनकम टैक्स भरने में यह ऐप काफी मददगार रहेगा। इसे गूगल के प्लेस्टोर और एपल के ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। साथ ही 7306525252 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर भी आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं। मिस कॉल करने पर आपको एक मेसेज आएगा, जिसमें इस ऐप को डाउनलोड करने का लिंक होगा।

एक्सपर्ट्स पैनल
1. सत्येंद्र जैन, सीए
2. सुशील अग्रवाल, सीए
3. पारस मेहता, सीए
4. निशा सिंह, सीए

– राजेश मित्तल के सौजन्य से

मुलाक़ात : सद्गुरु का गुरु कौन?

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2 COMMENTS

  1. क्या स्कूल को भी इनकम टैक्स फ़ाइल करना पड़ता है क्या

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