क्योंकि उनकी मीडिया और विपक्ष आर्मी से सबूत नहीं मांगते, सिर्फ कार्यवाही चाहते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जब ईरान से हुए समझौते से बाहर निकलने की घोषणा की तो दुनिया मे उसकी चौतरफा आलोचना की गई और इसे ट्रम्प का अपरिपक्व कदम बताया गया।

लेकिन न्यूयार्क टाइम्स ने जब अपने सूत्रों के हवाले से इसकी वजह बताई तो दुनिया में एक बार फिर इज़राइली जासूसी एजेंसी मोसाद के नाम का ख़ौफ़ छा गया।

2015 में ईरान और अमेरिका के बीच एक करार होता है जिसकी शर्तो में ईरान द्वारा परमाणु हथियार न बनाना और अमेरिका द्वारा ईरान से तमाम पाबन्दी हटाना शामिल था।

इज़राइल इस समझौते से खुश नहीं था क्योंकि उसे ईरान की नीयत पर संदेह था और वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए बेहद जोखिम भरा मानता है।

लिहाजा मोसाद को टारगेट दिया गया। मोसाद ने अपने तेज़ तर्रार जासूसों को इस मिशन पर लगाया कि आखिर ईरान में पक क्या रहा है?

उन्हें पता चला कि ईरान ने भीतर ही भीतर परमाणु क्षमता को हासिल करने के जरुरी महत्वपूर्ण कागज़ात किसी अज्ञात स्थान पर एक गोदाम में कड़े पहरे में छिपा रखे हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार एक साल की कड़ी निगरानी और तैयारी के बाद 31 जनवरी 18 को इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था।

दो दशक से ईरान ने परमाणु बम को तैयार करने के लिए जिन दस्तावेज़ों को कड़ी सुरक्षा में एक गोदाम में तिजोरियों में रखा था उन्हें मोसाद के जासूस ले उड़े।

साल भर की निगरानी के बाद 6 घंटे 29 मिनिट्स में यह ऑपरेशन ब्रेक हुआ। इसके लिए मोसाद को अलार्म को निष्क्रिय करने के अलावा दो दरवाज़े और 32 लॉकर ब्रेक करने पड़े थे।

मोसाद वहां से 50 हजार पन्ने, 163 मैमोज वाली कॉम्पेक्ट डिस्क वीडियो और प्लान ले उड़ा। इन दस्तावेज़ों से यह उजागर हुआ कि ईरान गुपचुप अपनी परमाणु क्षमता को विकसित करने मिशन में लगा हुआ है और उसका अमेरिका संग समझौता महज़ अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद भर था।

अप्रैल के अंत में इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को यह जानकारी देने के बाद कहा कि ईरान से समझौते तोड़ने की यह ठोस वजह हैं।

इसी बिना पर ट्रंप ने कुछ दिनों बाद ईरान से हुए समझौते से हटने की घोषणा कर दी जिसके कारण यूरोपीय यूनियन से भी उसके रिश्तो में तल्खी आ गई थी।

आपको याद भी होगा की उन दिनों हताशा में ईरान ने कुछ मिसाइलें भी इज़राइल पर दागी थीं जिसका मुंहतोड़ जवाब भी इज़राइल ने दिया था।

अगर आपको लगता हैं इज़राइली सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए ही संवेदनशील हैं तो यह किस्सा भी जान लीजिये।

मोसाद में एली कोहेन नाम का एक मशहूर जासूस हुआ था जिसने इज़राइल सीरिया युद्ध में इज़राइल को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी क्योंकि वह सीरिया में रह कर वहां की सैन्य गतिविधियों की समस्त सूचना इज़राइल को देते थे।

हालांकि बाद में एली कोहेन पकड़े भी गए और उन्हें सीरिया में चौराहे पर सार्वजनिक रूप से फांसी भी दी गई थी। उन्हें छुड़ाने के भरसक प्रयत्न किये थे इज़राइल ने, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी थी।

एली कोहेन से जुड़ी हर वस्तु को इज़राइल ने वापिस पाने की जद्दोजहद में मोसाद ने 50 साल की मेहनत के बाद उनकी एक रिस्ट वॉच को सीरिया में ही बरामद कर वापिस मोसाद के संग्रहालय में लाकर रखा हैं।

क्योंकि एली कोहेन उनक वॉर हीरो माने जाते हैं।

क्योंकि उनकी मीडिया और विपक्ष आर्मी से सबूत नहीं मांगते, सिर्फ कार्यवाही चाहते हैं।

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