इतिहास के पन्नों से – 1 : मुरुगन Vs मर्दुक

मुरुगन ! इनसे सभी परिचित होंगे .. दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले भगवान।
शिव पार्वती के पुत्र कार्तिकेय, स्कंद, कुमार आदि नाम से भी जाने जाते। श्री लंका पहले ‘कुमार द्वीप’ भी कहलाता था जो इनसे से सम्बंधित है। इसलिए इन्हें ‘कुमारन’ भी कहते हैं। ज्यादा जानकारी आप बहुत से स्रोत से ले सकते हैं।
मोटा-मोटी बात हम बताते चलते है…

मुरुगन एक कुशल योद्धा और अन्न देवता थे। इन्होंने ही पहले पहल अपने लोगों को पशुपालन सिखाया, कृषि करना सिखाया, फर्स्ट ‘ट्रॉपिकल कैलेंडर’ का निर्माण किया व उसके अनुसार ही कृषि चक्र का निर्माण भी।

कृषि भूमि के लिए इन्होंने घने जंगल को जलाया और साफ किया और उसे मैदान का रूप दिया, जब जंगल जले तो उस आग से ‘पछैअम्मा(Pacchaiamma)’ देवी का जन्म हुआ जो कृषि की देवी कहलाई। और जो जंगल जल कर मैदान का रूप ली उस भूमि/मैदान को ‘मारुतन'(Marutham)’ कहा गया।

इस तैयार कृषि भूमि में पहले पहल बाजरा और शकरकंद की खेती की गई। और जब कृषि का विस्तार हुआ तो एक साम्राज्य खड़ा होने लगा, और जब साम्राज्य खड़ा होने लगा तो अपने साम्राज्य व प्रजा को बचाने हेतु सुरक्षा हेतु भी चिंता हुई, जिसके लिए मार्शल आर्ट की भी शुरुआत हुई।

मुरुगन हमेशा मयूर, मुर्गा, कोबरा और बकरी के साथ दिखाई देते हैं जो कृषि के साथ-साथ गुरिल्ला युद्ध का भी परिचायक है।

मुरुगन माता ‘वल्ली(Valli)’ से विवाह करते हैं जो कृषि की देवी है। वल्ली या वेल्ली(Velli) का मतलब ‘शुक्र(venus)’ भी होता है तमिल में! मुरुगन और वल्ली के ब्याह को प्रतिवर्ष बड़े धूमधाम से मनाया भी जाता है।

इसके अलावा ‘मीनाक्षी’ भी बहुत पूजनीय है। मीनाक्षी मछली से उत्पन्न हुई मानी जाती है जो समुद्र से संबंध रखती है। लक्ष्मी जी भी समुद्र से। इन दोनों का संबंध समुद्र याने खारे जल से है। मीनाक्षी, लच्छीअम्मा, वल्ली ये आपस में भी एक दूसरे को समर्पित या एक दूसरे के टर्म में भी प्रयोग होते हैं।

मुरुगन के प्रमुख अस्त्र में से एक ‘इरुतलाई मुक्कोल (Iruthalai Mukkol)’ है, इरुतलाई का मतलब होता है ‘डबल हेडेड’ और मुक्कोल का मतलब होता है ‘त्रिशूल’! याने कि डबल हेडेड त्रिशूल।

ये इतना काफी है और बाकी का विस्तार आप स्वयं भी कर सकते हैं।

अब आते है ‘मर्दुक’ पर…

ये बेबोलीन के सबसे प्रमुख देवता की गिनती में आते हैं, ये Enki और Damkina के पुत्र माने जाते हैं।

इसमें और एक कैरेक्टर को जानना जरूरी है और वो है ‘तियामत(Tiamat)’ .. अब नीचे एक कहानी दे रहा जिससे कि जरा समझने में आसानी होगी…

“बेबीलोन के मिथकों में तियामत विशालकाय मादा ड्रेगन है, समंदर के उद्वेग का प्रतीक.. समस्त देवताओं और देवियों में आदिकालीन और उनकी माता… समुद्र याने खारे जल की बेटी या देवी.. उसका पति है आपजु (Apzu), धरती के नीचे ताजा जलराशि (मीठे जल) का देवता।

याने मीठे जल का देवता, उन दोनों के सहवास से देवताओं की पहली जोड़ी पैदा हुई जिनका नाम था लछमू और लछामू… ये थे अंसार (Ansar) और किसार (Kishar) के माता पिता, यानी अनु और इयार के दादा दादी… 2000 बीसीई पूर्व लिखे गए अनुमा एलिश नाम के ग्रन्थ में उल्लेख है कि उनकी संतानों ने तियामत और आपजु को अत्यधिक परेशान किया.. नतीजतन, लछमू और लछामू ने बच्चों को खत्म करने की साजिश रची… इया को पता चलते ही उसने सोते वक्त आपसु को मार डाला।

गुस्सा भड़का और तियामत ने पति की मौत का बदला लेने की ठानी, उसने दैत्याकार जीवों की सेना तैयार की. तियामत का नया कमांडर किंगू(Kingoo) था, वही उसका बेटा भी था… आखिरकार तियामत मर्दुक(Marduk) नाम के ताजा झील वाले बेबीलोन के युवा देवता से हार गई. मर्दुक ने इमहल्लु (डबल हेडेड त्रिशूल) से तियामत का शरीर दो टुकड़ों में काट दिया।

इनहुल्ल (Inhullu) डबल हेडेड त्रिशूल से मर्दुक तियामत ड्रैगन को मारते हुए।

जिस्म के ऊपरी हिस्से से आकाश और निचले हिस्से से धरती बनी. तियामत के शरीर के पानी से बादल बने और आँसुओं से टिगरिस और यूफ्रेट्स के जलस्रोत। बाद में किंगू की भी मौत हो गई और उसके रक्त से मर्दुक ने पहले इंसान को बनाया.”

Marduk को Maruduk या Marutuk नाम से भी जाना जाता है।

मर्दुक सरपानित (Sarpanit) नाम की कन्या से शादी करता है। सरपानित का अर्थ होता है ‘ The Shining one’ इनको Venus ग्रह से संबंध किया जाता है। इनको “creatress of seed” याने बीजों के उत्पत्ति की देवी भी कहा जाता है। मने इनसे कृषि की शुरुआत हुई।.. इनके विवाह को बेबोलोन में प्रत्येक वर्ष नए वर्ष के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है।

मुश्शूससु (Mushshussu)

मर्दुक का वाहन ‘mushussu (मुशुस्सू)’ ड्रैगन है। जो कि एक हाइब्रिड जानवर है। जो कोबरा, मुर्गा, बकरी और मोर का कम्बीनेशन है।
(सभी चित्र आप पोस्ट के संलग्न चित्र में देख सकते हैं)
मर्दुक का प्रमुख अस्त्र ‘इमहल्लु(Imhullu)’ है जो कि डबल हेडेड त्रिशूल है।

अब तो बहुत कुछ दिमाग में चल रहा होगा।

अब इन दोनों कहानी में जो मुख्य-मुख्य ध्यान देने वाली बात जो है उसको हम पकड़ते हैं..
पहले मुरुगन ही ..
रोमन में .. Murugan .. इन्होंने जो जंगल जला के मैदान बनाये वो Marutham कहलाया।
इधर Marduk का दूसरा नाम Marutuk भी है।
मने, Maruthan = Marutuk = Marduk

मुरुगन ने वल्ली से ब्याह किया। वल्ली जैसा बताया कि वीनस से संबंध है इनका। और मर्दुक की पत्नी सरपानित का भी संबंध वीनस से। सरपानित का मतलब ‘द शाइनिंग वन’ होता है। इसमें जरा तियामत को भी जोड़ लेते हैं। तियामत का मतलब ‘The glistening one’ होता है। मने कि एकदम चमकता हुआ।

Tiamat का जरा संधि विच्छेद कर लेते हैं पहले जरा तमिल फॉर्म में देख लेते हैं..
Theemaatha .. याने thee और Matha
साउथ में ‘त’ को ‘थ’ ही लिखते मने ‘T’ को ‘Th’!
तो अगर हम पढ़ेंगे तो इस तरह ‘तीमाता’।

ती = आग , और
माता = देवी .. मने कि आग की देवी या फिर आग से उत्पन्न देवी।

तो वो देवी कौन हुई? जो मुरुगन आग लगाते है जंगल में और उससे जो देवी जन्म लेती है वो ‘पच्चीअम्मा’ याने कृषि की देवी। जो निश्चित ही glistening one होगी ही। और पच्चीअम्मा को बीजों की देवी कहते हैं।

अब खुद ही देखिये ..
तीमाता = तियामत = पच्चीअम्मा = मीनाक्षी
वल्ली = वीनस = सरपानित !!

मुरुगन का प्रमुख वाहन था मयूर! और साथ में अन्य थे बकरी, मुर्गा और कोबरा।
मर्दुक का प्रमुख वाहन था मुशुस्सू(Mushshussu)!

अब मुकशुस्सू को देखियेगा तो सर और जीभ ‘कोबरा’ का .. सींग और शरीर ‘बकरे’ का .. गर्दन ‘मुर्गे’ का.. पिछला पैर ‘मयूर’ का! जिसे जानबूझकर का ईगल का बताते हैं।

Mushshussu शब्द की उत्पत्ति भी देख सकते हैं.. कोबरा ध्वनि निकालता है wuuusssshhh..wuuusshhhh की.. और प्राकृतिक ध्वनि ही शब्द की उत्पत्ति होती है.. ‘wuu’ को ‘muu’ से रिप्लेस किया गया.. जो कि Mushshussu हो गया।

मुरुगन के प्रमुख अस्त्र में से एक इरुतलाई मुक्कोल था मने डबल हेडेड त्रिशूल।
और मर्दुक का Imhullu ! ये भी डबल हेडेड त्रिशूल।
Iruthalai Mukkol = Imkol = Imhullu !

मर्दुक अपने तियामत के साथ

जिस तरह मर्दुक तियामत ड्रैगन को मारते हैं वैसे ही इंद्र भी ‘वृत्र'(Vritra) नाम के विशालकाय विषैले सर्प को मारते हैं जो स्वर्ग के जलाशय को दूषित कर रहा होता है। जिसके चलते कभी-कभी मर्दुक की तुलना इंद्र से कर देते हैं लेकिन बाकी के अन्य चीजें इनसे मेल नहीं खाती।

चलिये जरा मत्थापच्ची करते हैं… अगर मुरुगन मर्दुक हैं तो मर्दुक इंद्र नहीं हो सकते। अगर मुरुगन मर्दुक हैं तो मुरुगन द्रविड़ियन होंगे? अगर मुरुगन ही मर्दुक है तो या तो मुरुगन श्रीलंका से बेबीलोन गए होंगे या फिर मर्दुक बेबीलोन से श्रीलंका आया होगा!? मुरुगन पहले पहल जंगल जलाता है व उसे कृषि भूमि में परिवर्तित करता है.. फिर अपने लोग व राज्य की रक्षा हेतु अन्य चीजों का गठन करते हैं डकैतों, चोरों, लुटेरों आदि से बचाने हेतु!

तो ये डकैत, लुटेरे, चोर कौन हुए फिर? वल्ली से ब्याह के समय वो वहाँ के लोकल ट्राइब्स से युद्ध भी करते हैं। मने वहाँ लोग पहले से भी थे। मने उन लोगों के लिए मुरुगन बाहरी हुए। लेकिन तमिल तो उन्हें सबसे पुराने भगवान में से एक मानते। और यही तमिल आर्य-द्रविड़ सिद्धांत को ज्यादा हवा देते।

मर्दुक, तियामत का सील

एक तरफ हो गया मेसोपोटामिया और दूसरे तरफ हो गया सिंधु घाटी! और बीच में हो गया पर्सिया याने ईरान। और यहीं के रहवासी कहलाये आर्य। याने आर्यों ने मेसोपोटामिया को भी ध्वस्त कर दिया और सिंधु घाटी को भी? और आर्यों ने जब इतने बड़े-बड़े सभ्यताओं को ध्वस्त कर दिया तो वे दक्षिण को काहे नहीं ध्वस्त कर दिए ? या अब तक नहीं कर पाये हैं??

जीसस मुरुगन के अवतार में

खैर नीचे की दो पैराग्राफ को ज्यादा न लेते हुए ऊपर की बातों को ज्यादा सोचिये।
मेसोपोटामिया से सुदूर दक्षिण को स्वयं ही देखिये फिर आर्य-द्रविड़ का सिद्धांत भी। और बीच में हलेलुइया का भी।

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