अग्निवेश : विवादों को उछालकर पब्लिसिटी पाना ही जिनका लक्ष्य

  • मनमोहन शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

अग्निवेश ने कई रंग बदले हैं। मगर अधिकांश लोग इनकी सच्चाई नहीं जानते इसलिए मुझे विवश होकर इसपर कुछ प्रकाश डालना पड़ रहा है।

अग्निवेश मूलतः आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। और इनका एम. श्याम राव है।

प्रारंभ में ये नक्सलवादी आंदोलन से जुड़े रहे हैं और कोलकाता के एक कॉलेज में लेक्चरार हुआ करते थे।

जब पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय ने नक्सलवादियों के खिलाफ अभियान शुरू किया तो ये जानबचाकर दिल्ली आ गए और रातोंरात आर्य संन्यासी बन गए।

1978 में जब जनता पार्टी बनी तो इनकी क्षेत्रीय पार्टी आर्यसभा भी उसका भाग बन गई। जनता पार्टी की हरियाणा सरकार में ये शिक्षा मंत्री भी रहे।

इन पर छपास रोग सवार हुआ। इन्होंने विदेशों से ग्रांट प्राप्त करने के लिए बंधुआ मुक्ति संस्थान का गठन किया जिसमें इनके सहयोगी कैलाश सत्यार्थी भी थे।

इनपर जंतर-मंतर रोड पर स्थित बंगला नम्बर 7 में अवैध कब्जा करने का भी आरोप है। बंधुआ मुक्ति मोर्चा की आड़ में इन्होंने विदेशों से खूब माल बटोरा और अनेक देशों की यात्रा भी की।

किसी न किसी विवाद को उछालकर पब्लिसिटी प्राप्त करना उनका लक्ष्य रहा है। हाल में ही इन्होंने आसफ अली रोड पर आर्य समाज की अरबों की संपत्ति पर भी अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। मामला क्योंकि अदालत में है इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

नक्सलवादी और अन्य देशद्रोही तत्वों का ये खुलकर समर्थन करते रहे हैं। सनातन धर्म इनके निशाने पर रहा है। उन्होंने गोमांस भक्षण और नक्सलियों के कथित मानवाधिकारों के पक्ष में खूब प्रचार किया है और धरने दिए हैं।

झारखंड में भी वे मुख्यतः नक्सलियों के समर्थन करने और उनकी जड़ें जमाने के लिए गए थे। वहां उन्होंने उत्तेजक भाषण दिया जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

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