तेरे नाम की कोई सड़क… धड़क!

जो मेरी मंज़िलों को जाती है, तेरे नाम की कोई सड़क है न!

अमिताभ भट्टाचार्या ने क्या खूब लिखा है ये गाना. इस गाने की खूबसूरती सिर्फ इसके बोल से नहीं है, इसका पूरा श्रेय अजय – अतुल को जाता है जो इस फिल्म के गानों में जान डालते हैं। धड़क, मराठी फिल्म “सैराट” की रीमेक है, जिसे नागराज मंजुले ने डायरेक्ट किया था और अजय – अतुल ने ही म्यूजिक दिया था। इस फिल्म की खूबसूरती में चार चाँद फिल्म का म्यूजिक लगाता है।

इस फिल्म में ईशान और जाह्नवी के अलावा दो और मुख्य किरदार हैं और वो है ‘वायलेन’ और ‘सिम्फनी’ जिसकी धुन पर ये कहानी धड़कती है। कमाल का म्यूज़िक दिया है अजय – अतुल ने जितनी तारीफ़ की जाए कम है।

फिल्म की कहानी वही है जो आप आज के समय में अपने आस – पास देखते हैं। कोई मसाला फिल्म नहीं है। ये ‘मधुकर’ और ‘पार्थवी’ की कहानी है, जिसमें मधुकर (ईशान) एक निम्नस्तरीय परिवार से आता है, कमाल का और बेजोड़ अभिनय किया है ईशान ने।

इससे पहले वो ‘मजीद मजीदी’ की फिल्म “Beyond the clouds” में अपना बेहतरीन अभिनय दिखा चुके हैं और पार्थवी (जाह्नवी) एक ऊँचे खानदान से आती हैं, जाह्नवी की ये पहली फिल्म है।

जाह्नवी की उत्सुकता उनकी पहली फिल्म को लेकर फिल्म को थोड़ा डिस्बैलेंस कर सकती है। अगर लोग जाह्नवी में “श्री देवी” को न ढूँढे और वो जो हैं उनको वैसे ही स्वीकारें तो फिल्म में वो बेहद खूबसूरत लग रही हैं। उनके पिता का रोल ‘आशुतोष राणा’ जी ने किया है। कमाल का अभिनय, कुछ ही एक्टर्स हैं जो एक्टिंग शब्दों से कम; अपने हाव – भाव, आँखों से ज़्यादा करते हैं। उनका फ्रेम में होना ही फिल्म में जान डाल देता है। फिल्म में वो एक विधायक का रोल अदा कर रहे हैं।

वो एक ऐसे पिता का रोल अदा कर रहे हैं जैसे पिता का ‘अंश’ हर किसी पिता के अंदर होता है, वो अपनी बेटी से उतना ही प्रेम करतें हैं, जितना वो अपनी इज़्ज़त से। जितना उन्हें देखा उससे लगता है कि इस फिल्म के बाद जब लोग थिएटर से बाहर निकलेंगे तो उनकी बातों में “आशुतोष राणा” भी यकीनन होंगे।

फिल्म में मधुकर (ईशान) के 2 दोस्त ‘अंकित बिश्त’ और ‘श्रीधर वत्सर’ की दोस्ती भी आपको देखने को मिलेगी। ‘श्रीधर’ मेरे भी प्रिय मित्र हैं, कमाल के खुशमिज़ाज़ एवं जिंदादिल इंसान हैं वो। तीनों की दोस्ती आपको फिल्म 3 ईडियट के राजू , रेंचो और फरहान की याद दिला देगी।

फिल्म की कहानी आपको बांधे रखती है और कई सवाल भी आपके मन में खड़े करती है। परिवार के बहिष्कार के बाद एक बागी प्रेमी-जोड़ा क्या, कहाँ, कैसे और किस तरह जीता है। इसकी कहानी है धड़क।

फिल्म का असली कहानीकार कैमेरा है। पीयूष आचार्य, गौतम चौधरी, देवेंद्र दास तीनों ने फिल्म को बख़ूबी दिखाया है अपने कैमरे से। कहाँ, कैसे कितना क्लोज़अप रखना, उस क्रूर समाज को इतने नजदीक से दिखाना की थिएटर आपको सीधा वहां ले जाता है।

फिल्म में एक और मुख्य किरदार है आदित्य कुमार का, जिनका बेजोड़ अभिनय आप पहले देख चुके होंगे और उनके किरदार का नाम सबकी ज़ुबान पर रहता है। फिल्म “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” का ‘परपेंडिकुलर’ जो मुँह में ब्लेड को चुइंगम की तरह घुमाता था। जहाँ तक मुझे लग रहा है, इस फिल्म में उनका किरदार जाह्नवी (पार्थवी) के भाई का होगा जो कि फिल्म को और अधिक रोमांचक बनाता है।

करण जौहर के बैनर “धर्मा प्रोडक्शन” की इस फिल्म का डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले ‘शशांक खैतान’ ने किया है, इससे पहले वो ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ और ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ डायरेक्ट कर चुके हैं।

फिल्म इस शुक्रवार 20 जुलाई 2018 को सिनेमाघरों में आ रही है। पूरी ‘धड़क’ टीम को मेरी तरफ से शुभकामनायें। फिल्म का क्लाइमेक्स आपको एक साथ ऐसी खुशियों और उत्साह में ले जाकर, मातम के ऐसे गर्त में छोड़ देगा कि फिल्म ख़त्म होकर, थिएटर से निकलने के बाद भी आप ‘धड़क’ से नहीं निकाल सकेंगे।

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