युगद्रष्टा मोदी : अब आने ही वाला है ट्रेनों के खाली चलने का दिन

कल जब Oyo Hotels और Red Bus वाली पोस्ट लिखी तो कुछ मित्रों ने कमेंट किया कि देश इतना गरीब है कि Oyo Rooms और Red Bus की बात करना ही बेमानी है।

इसी तरह बहुत से लोग बुलेट ट्रेन और DFC (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के औचित्य पर भी सवाल उठाते हैं।

रविश कुमार जैसे पत्रकार तो मुम्बई-नागपुर एक्सप्रेस-वे के ही औचित्य पर सवाल उठाते हैं…

रविश कुमार लिखते हैं कि वर्तमान मुम्बई-नागपुर हाई-वे की तुलना में नया प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे सिर्फ 25 किलोमीटर छोटा है तो सिर्फ 25 किलोमीटर दूरी कम करने के लिए नए एक्सप्रेस-वे का क्या औचित्य है?

कल जो लिखा था उसमें मोदी सरकार के उस vision पर चर्चा हुई जिसमें अगले कुछ सालों में रेलवे में वेटिंग लिस्ट खत्म करने का संकल्प है…

उस पर एक मित्र ने कहा कि इलाहाबाद से जौनपुर आने में पैसेंजर गाड़ी 4 घंटा लेट हो जाती है। वो कहते हैं कि जिस देश मे पैसेंजर ट्रेन 4 घंटा लेट चलती हो उस मुल्क में बुलेट ट्रेन नहीं चलनी चाहिए।

इस मुल्क में बहुत गरीब लोग हैं इसलिए एक्सप्रेस वे पर वॉल्वो और सकैनिया नहीं चलनी चाहिए!

बहुत से लोग बेचारे गरीब हैं, उनके पास स्मार्टफोन नहीं… उनके पास Jio का रिचार्ज कराने को पैसे नहीं हैं, इसलिए इस देश में BHIM एप और कैशलेस या लेस-कैश की बात मत करो।

ऐसे घटिया तर्क देने वाले ये भूल जाते हैं कि भारतीय मिडिल क्लास पूरी दुनिया का सबसे बड़ा वर्ग है जो बड़ी तेजी से Branded Accessories, Luxury Travel, Quality Education, Quality Health Care की ओर आकर्षित हो रहा है।

भारतीय मिडिल क्लास की कुल जनसंख्या 100 करोड़ से भी ज़्यादा है।

यानी अमरीका, पूरा यूरोप, रूस, ब्राज़ील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यू ज़ीलैंड जैसे देशों की समूची जनसंख्या से भी ज़्यादा लोग आज लक्ज़री AC ट्रेवल और सस्ती AirLines में उड़ने को तैयार बैठे हैं।

इसकी बानगी आपको अगर देखनी है तो सहरसा-अमृतसर गरीबरथ एक्सप्रेस में देखिए।

आज से 15 बरस पहले जब ये गाड़ी चली तो पिट गयी। यात्री ही नहीं मिले। फिर रेल अधिकारियों ने जुगत भिड़ाई… गाड़ी का रूट बदला गया। जो गाड़ी पहले लुधियाना, अम्बाला से सीधे सहारनपुर, मुरादाबाद होते चलती थी, उसे अम्बाला से दिल्ली लखनऊ होते चलाया गया।

अब गाड़ी अमृतसर दिल्ली और दिल्ली लखनऊ के बीच भर के चलने लगी…

पर विडंबना देखिये… जो गाड़ी लालू ने गरीबों के लिए चलाई, वो जिसका नाम ही गरीबरथ था, गरीब बेचारा उसके नज़दीक से भी न निकलता था… गरीबरथ भारत की Elite class की गाड़ी थी… उसमें सम्पन्न शहरी लोग तेल-फुलेल, परफ्यूम-इतर लगा के चलते थे…

पर अब ज़माना बदल गया है। अब इस गाड़ी में कभी लुधियाना से सवार हो के देखिये। पूरी गाड़ी मेहनतकश, पसीना बहाने वाले श्रमिकों से भरी होती है।

और आप तो जानते ही हैं कि हम हिंदुस्तानी, श्रम और श्रमिक से कितनी नफरत करते हैं… पसीने की बू, Fogg से नहाए भारतीय मिडल क्लास से सहन नहीं होती…

इसलिए धीरे-धीरे पंजाबी Elite ने सहरसा गरीबरथ का परित्याग कर दिया… गंदी गाड़ी है, इस से बदबू आती है…

जैसे किसी ज़माने में Maruti 800 Status Symbol हुआ करती थी पर आज गरीबी की निशानी है, उसी तरह रेल का AC-3 टियर जो कभी शहरी मिडिल क्लास का Status Symbol हुआ करता था, उसपर नए उभरते मेहनतकश भारत ने कब्जा कर लिया है।

वो दिन दूर नहीं जब AC-3 टियर में चलना गरीबी का सिंबल बन जायेगा (Maruti 800 की तरह)।

इसी तरह हवाईजहाज़ की इकॉनमी क्लास (बकौल शशि थरूर Cattle class) पर भी लोअर मिडिल क्लास तेज़ी से कब्ज़ा कर रहा है…

100 करोड़ भारतीय मिडिल क्लास दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक समूह है जिसका दिल अब मांग रहा है More n Better…

वो दिन दूर नहीं जब भारतीय रेल की वेटिंग लिस्ट बुलेट ट्रेन और हवाई जहाज में शिफ्ट हो जाएगी।

अब रेलों के खाली चलने का दिन आने ही वाला है।

ये दिन देखने के लिए मोदी जी को बस एक मौका और दीजिये 2019 में।

मेरे नेता के गुण तो मैं जानता हूँ, पर विरोधियों आप क्यों हैं अपने नेता के अंधभक्त?

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY