हिन्दू टेरर : काँग्रेस को बेनक़ाब करती आर वी एस मणि की पुस्तक

पिछले दिनों दिल्ली के प्रवासी भवन में एक आतंकवाद विषयक सेमिनार में जाना हुआ। वहां वितस्ता पब्लिकेशन की स्वामिनी रेनू कौल वर्मा जी से मुलाकात हुई।

रेनू कौल स्वयं एक कश्मीरी हिन्दू हैं। कश्मीर में हिंदुओं की दुर्दशा को करीब से देखा है, जाना है।

इसी चर्चा के दौरान रेणु कौल ने मुझे ‘हिन्दू टेरर’ नामक पुस्तक भेंट की। पुस्तक को गौर से पढ़ने का अनुरोध किया। ‘समीक्षा’ करने की इच्छा भी ज़ाहिर की।

आपका यह खादिम अपने युवाकाल में प्रूफ रीडर, अनुवादक, इन्वेस्टिगेटिव-रिपोर्टर और जाने कहाँ-कहाँ सिर मारता रहा है।

बहरहाल 495 रूपए की किताब फ्री में, वह भी मेरी गहन दिलचस्पी की तो और क्या चाहिए। पढ़ाई में जुट गया, 4-5 बैठकों में किताब खत्म।

दरअसल यह महज एक memoir भर नहीं है। दिल्ली के साउथ-नॉर्थ एवेन्यू, मंत्रालयों में बैठकर मंत्री, आईएएस और अन्य बाबू लोग देश कैसे चलाते हैं, किन सरोकारों, दबावों, स्वार्थियों और अनेक निकम्मे पूरी धींगामुश्ती के साथ कैसे देश की पीठ में छुरा घोंपते हैं… उसकी नज़ीर है यह पुस्तक।

व्यक्तिगत ईर्ष्या, नफरत और तुष्टिकरण के बोझ तले 2006-2010 के मध्य गृहमंत्रालय कैसे गधे की तरह लंगड़ा-लंगड़ा कर चलता रहा… उसकी बानगी है यह 219 पन्ने की यह किताब। इस दौरान सफेद कोट और शेरवानी के शौकीन शिवराज पाटिल, धोती बांधने वाले – मग़र विदेशों में सदैव थ्री-पीस सूट में सजे रहने वाले लोमड़ी सरीखे पी चिदंबरम और चाटुकार-मस्तिष्कविहीन सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमन्त्री रहे।

सिर्फ एक इशरत-जहां एनकाउंटर केस में झूठे षड्यंत्रों के चलते 10-10 आईएएस-आईपीएस जेल में सड़ा दिए गए। इशरत जहां एक फिदायीन थी, जिसने एक हिन्दू लड़के प्राणेश पिल्लई को धर्म-परिवर्तित कर जावेद शेख बना कर अपना जेहादी शौहर बना रखा था।

जब गुजरात में एनकाउंटर हुआ तो 4 लोग मारे गए, जिनमें 2 पाकिस्तानी भी थे। 3 एके-47 राइफल और भारी मात्रा में असलाह मिला। परंतु तत्कालीन गृहमंत्रालय ने इसको फ़र्ज़ी करार दिया।

पाकिस्तानियों को भी पहले कांग्रेस सरकार ने स्थानीय युवक बताया था। मिनट-टू-मिनट जानकारी पुस्तक के माध्यम से तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी, किताब के लेखक आरवीएस मणि ने दी है।

कर्नल पुरोहित, असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा को फंसाने और जेल में डालने में दिग्विजय सिंह, हेमंत करकरे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार का क्या रोल था… जब आप पढ़ेंगे तो भौचक्के रह जाएंगे।

समझौता एक्सप्रेस कांड में रंगे हाथों पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी को लाई डिटेक्टर मशीन पर कबूलनामे के बाद भी हरियाणा की एक आईपीएस अधिकारी ने निर्दोष मानते हुए, पाकिस्तान भाग जाने का मौका दिया था और असीमानंद और अन्य को यातनाएं देकर समझौता एक्सप्रेस कांड और मालेगांव बम विस्फोटों में फ़र्ज़ी कबूलनामा ज़बरदस्ती लिखा लिया गया था।

आरवीएस मणि यह कहते प्रतीत होते हैं कि NIA की स्थापना ही हिंदूवादियों, आरएसएस वालों और इंद्रेश कुमार जैसों को जेल में डालने के उद्देश्य से हुई थी।

26/11 के दौरान महाराष्ट्र सरकार की एक बेहद सीनियर आईएएस अधिकारी ट्राइडेंट होटल में फंस गईं थीं। आतंकियों को इस अधिकारी के होटल में होने की जानकारी थी। वह इस महिला अधिकारी को बंधक बनाकर अनेक जेलों में बंद कश्मीरी आतंकियों को छुड़ाने की योजना लेकर आये थे।

मग़र रात 3 बजे यह अधिकारी संदेहास्पद तरीके से कैसे छूटकर बाहर आ गईं, यह आज भी ज्वलंत प्रश्न है। यही नहीं, जो लोग साथ में खाना खा रहे थे, वे भी छूट गए… जबकि आतंकियों ने ट्राइडेंट होटल में ही 60 लोगों को मारा था।

लेखक इस हमले में अनेक लोकल लोगों के लिप्त होने के अनेक प्रमाण देता है। 26/11 हमले में लेखक बताता है कि तत्कालीन गृहमन्त्री शिवराज पाटिल ने जान बूझकर NSG के मुम्बई भेजे जाने में देर की, वहीं मुम्बई में बैठे सभी सुरक्षाबलों और कमांडोज़ को कार्यवाही की इजाज़त नहीं दी। इससे मृतक संख्या में भारी वृद्धि हुई।

यह किताब साफ-साफ प्रमाण देती है कि उस समय कांग्रेस सरकार, मीडिया और राजनीतिक दलों में पाकिस्तानी स्लीपर सैल्स का बोलबाला था। लेखक खुद गृह मंत्रालय में ‘इंटरनल सिक्योरिटी’ में अंडर सेक्रेटरी था।

लेखक खुद पक्का राष्ट्रवादी था तो कदम कदम पर उसे परेशान और अरेस्ट करने की कोशिश की गई, विभागीय जांचें भी शुरू कर दीं। लेखक का लगभग अपहरण कर ही लिया गया था, परंतु लेखक चतुराई से बच निकला।

बाद में पता चला कि चूंकि लेखक, गृह मंत्रालय का बड़ा अधिकारी था, इसलिए लेखक का अपहरण कर इसके बदले में नृशंस हत्यारे ‘अजमल आमिर कसाब’ को छुड़ाने की योजना थी। मौका मिले तो यह संस्मरण अवश्य पढ़ें।

मैंने सैकड़ों memoirs पढ़े हैं, मग़र इतना ईमानदाराना लेखन नहीं देखा। लेखक को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बेहद परेशान किया… घर मे रेड डलवाई… प्राणों का 24 घंटे खतरा बना रहता था। इसी गम और दबाव में लेखक (RVS Mani) के माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई।

यदि ये 3 बातें न होतीं तो कांग्रेस और उसके दलाल साबित कर ही देते हिन्दू आतंकवाद

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