संघ और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच : भ्रम निवारण

कुछ प्रश्न हैं जो जनमानस में भ्रम फैला रहे हैं… मैं अपने स्तर से स्पष्ट कर रहा हूँ…

भ्रांति : मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, संघ का अनुषांगिक संगठन है!

सत्य : नहीं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच एक स्वतंत्र संगठन है। संघ के माननीय इंद्रेश जी केवल सलाहकार की हैसियत से इसका मार्गदर्शन करते हैं। ऐसे कई संगठन है जो राष्ट्रवादी विचारों के हैं पर संघ का घटक नहीं हैं, बस विचारों में समानता है। इसलिये उनके हर कार्य के लिये संघ उत्तरदायी नही है।

कुछ राष्ट्रवादी मुस्लिम लोग साथ आये और पूज्य कुप सी सुदर्शन जी से मिले। वो चाहते थे कि मुस्लिमों का एक राष्ट्रवादी संगठन खड़ा हो। जो इस देश की एकता अखंडता और संस्कृति में विश्वास रखते थे। जिनके लिये गऊ मां की पीड़ा असहनीय थी। उन्होंने मार्गदर्शन की प्रार्थना की। पूज्य सुदर्शन जी ने इसका महत्व समझा और माननीय इंद्रेश जी को इसका कार्यभार सौंपा।

शुरुआत की कठिनाइयों के बाद आज इस संगठन में तकरीबन 22 लाख लोग भारत माता की जय और जय श्रीराम का उद्घोष करते हैं। गाय को अपनी मां मानते हैं। एक सकारात्मक पहल थी जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। तो इसमें हर्ज क्या है?

भ्रांति : संघ मुस्लिमों और ईसाइयों का दुश्मन है!

सत्य : नहीं! संघ वस्तुतः देशद्रोहियों का दुश्मन है। देश का कोई भी नागरिक जो इस देश की एकता अखंडता और संस्कृति में विश्वास रखता है, संघ उसका मित्र है। हमारे एकात्मता स्तोत्र में कवि रसखान का नाम आता है। संघ को जानने वाले जानते हैं कि इसका रोज पाठ सुबह सुबह हम करते हैं। अगर मुस्लिम हमारे दुश्मन होते तो ऐसा नहीं होता।

भ्रांति : संघ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता है!

सत्य : भारत पहले से हिंदुराष्ट्र ही है। हम भले किसी भी पंथ, पद्धति या धर्म को मानते हों पर राष्ट्रीयता हमारी हिन्दू है। हमारी पूजा पद्धतियाँ अलग हो सकती हैं। पर राष्ट्र एक है और संस्कृति साझा है। श्रीराम श्रीकृष्ण हम सबके पूर्वज हैं और पूज्य है। ये सत्य है जो बदला नहीं जा सकता। इस सिद्धांत को, इस संस्कृति को जो मानता है वही हिंदू है।

भ्रांति : संघ विधर्मियों को मार देगा!

सत्य : संघ के खिलाफ फैलाया जाने वाला सबसे बड़ा झूठ है ये। संघ हिंसा में विश्वास नहीं करता। सबका विश्वास है कि चार सालों से संघ सत्ता में है, मुझे नहीं याद कि कहीं हिंदू वर्सेस अन्य में संघ के स्वयंसेवकों ने अन्य मतावलंबियों का संहार किया हो।

देखिये एक बात साफ है। इस देश में एक बड़ी संख्या अन्य पंथों को मानने वाली है। और वो कहीं नहीं जाने वाली। हम उनकी उपासना पद्धति का सम्मान करते हैं और उन्हें पूरी स्वतंत्रता है कि वो अपने मज़हब के अनुसार अपना जीवन बितायें। किन्तु वो किसी अन्य की परेशानी का सबब न बने। इसका ख्याल हम सभी को रखना है।

देश सबसे ऊपर है, बाकी मैं और मेरा मज़हब उसके बाद ये भावना विकसित करनी है। श्रीराम की कृपा से धीरे धीरे ये हो रहा है। इसे होने दीजिए। इसमें विवादों को मत खोजिये। खासकर कि दो टके के उन घटिया अखबारों के लिये जिन पर आप समोसे रख कर खाना भी पसन्द न करें…

चार दशकों से संघ कार्यकर्ताओं के रक्त से भीगे पूर्वोत्तर भारत की गुरुदक्षिणा

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY