हानिकारक क्या? जलेबी, पूड़ी-कचौड़ी, कोका कोला; या अंकुरित चना, कच्ची मूली, गाजर, बाजरे की रोटी

अगर आपको भूख लगी है और आपको भोजन की जगह शीतल कोका कोला या पेप्सी कोला या कोई अन्य सॉफ्ट ड्रिंक पिला दिया जाए, तो न केवल आपकी भूख मिट जायेगी, बल्कि एक आनंद की अनुभूति होगी।

सॉफ्ट ड्रिंक की जगह छोले-भठूरे, कचौरी-आलू की सब्जी या तले हुए पकौड़े से भी यही हाल होगा।

आपको रोज़ जलेबी, पूड़ी कचौड़ी, कोका कोला, चाट इत्यादि खिलाया पिलाया जाए तो आप संतुष्ट रहेंगे और किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं करेंगे…

भले ही आपका वज़न कुछ ही हफ्तों में दुगना, चौगुना हो जाए, आपको शुगर की बीमारी हो जाए या ब्लड प्रेशर बढ़ जाए या धमनियों में रक्त का प्रवाह बाधित होने लगे।

तब भी आपको उस भोजन से कोई शिकायत नहीं होगी। बल्कि लोग बाग आपके मोटे ताजे शरीर को देखकर बोलेंगे कि भाई यह तो खाते पीते घर का लगता है।

शरीर के अंदर की खबर किसी को नहीं होती कि क्या क्या बीमारी से शरीर ग्रस्त है जब तक आप या आपका डॉक्टर स्वयं लोगों को न बतलाएं.

इसके विपरीत अगर आपको सुबह अंकुरित हरी मूंग की दाल, चना, खीरा, टमाटर, सेब, और कुछ हरे पत्तों की सलाद खिलाई जाए; एक कप चाय चुटकी भर चीनी के साथ पिलायी जाए, दोपहर के समय दाल और बिना आलू की सब्जी और उसके साथ जोवार, बाजरा या चने की रोटी और रात के समय इसी से मिलता जुलता पौष्टिक आहार दिया जाए तो आपका पेट तो भरेगा लेकिन संतुष्टि की अनुभूति नहीं होगी।

साथ ही उस पौष्टिक भोजन का प्रभाव कुछ महीने या साल भर बाद दिखाई देगा, यद्यपि आपका ब्लड प्रेशर कम हो जाएगा, धमनियों में रक्त का प्रवाह ठीक हो जाएगा, शुगर कम होने लगेगी।

आपके दुबले-पतले, छरहरे और सुडौल बदन को देखकर लोग ताना भी मार सकते हैं कि क्या भाई खाने को नहीं मिलता?

स्वस्थ और तंदुरुस्त बदन के कारण आपको डॉक्टर या बीमारी का खर्च कम देना होगा। ज्यादा अच्छे और लंबे समय तक काम कर सकेंगे और मोटे तौर पर एक सुखद एहसास होगा। ऊपर से आपके घर और परिवार वालों को आपकी देखभाल या स्वास्थ्य की चिंता में घुटते नहीं रहना होगा।

काँग्रेसियों ने अभी तक गरीब और भूखे भारतीयों को कोका कोला ही पिलाया। चुनाव के समय कुछ महीने जलेबी और कचौड़ी खिला दी और चीनी से भरी हुई चाय। जनता इतने में ही प्रसन्न हो गई।

जनता को इस कोका कोला और पूड़ी कचौड़ी का शौक भी लग गया और वह समय-समय पर इसी पेय पदार्थ और भोजन की मांग करने लगी। यह अच्छी तरह मालूम होने के बावजूद भी कि इन से मोटापा बढ़ेगा, शुगर और हृदय की बीमारी होगी। और हो सकता है कि असामयिक मृत्यु हो जाए।

काँग्रेसियों को कोल्ड ड्रिंक और पूड़ी कचौड़ी खिलाना सस्ता पड़ता था। उन्हें पता था कि एक बोतल कोल्ड ड्रिंक में कम से कम 10 से 12 चम्मच चीनी मिली होती है। पूड़ी, कचौड़ी, अचार, नमकीन, भुजिया में आवश्यकता से अधिक नमक होता है।

लेकिन उन्हें यह भी पता था कि आपको इन चीजों का चस्का लग जाएगा और इन के हानिकारक प्रभाव की जानकारी होने के बावजूद भी आप ऐसे भोजन और पेय पदार्थ की मांग करेंगे।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता संभालने के बाद ऐसे हानिकारक भोजन और पेय पदार्थों पर रोक लगा दी। उन्होंने जनता को सुबह-सुबह अंकुरित मूंग, चने, फल, कच्ची गाजर, मूली, टमाटर खिलाना शुरू कर दिया। दोपहर और रात के समय दाल, चावल, जोवार, बाजरा, बेसन इत्यादि की रोटियां। साथ में दही और हरी सब्जियां खिलाने शुरू कर दी। साथ में योग और करवा रहे हैं।

जनता को यह भोजन अच्छा तो लगता है क्योंकि कहीं ना कहीं हमारी आनुवांशिकी में लिखा है कि हमारे पूर्वज भी यही भोजन करते थे। उनके समय में न तो आलू था, न ही चीनी और न ही कोई कोल्ड ड्रिंक।

जनता को यह भी पता था कि इस भोजन से उनके शरीर को पौष्टिक आहार मिलेगा, शरीर स्वस्थ बनेगा तथा कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलेगा, यद्यपि इनका असर कुछ वर्षों में दिखाई देगा।

लेकिन कांग्रेसियों के समय में पूड़ी कचौड़ी और कोल्ड ड्रिंक की आदत पड़ गयी थी। आखिरकार चीनी खाना किसे अच्छा नहीं लगता।

इसके विपरीत उच्च गुणवत्ता का स्वस्थ और पौष्टिक भोजन अच्छा तो लगता है, लेकिन कहीं ना कहीं शिकायत भी बनी रहती थी कि इसे खाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि आदत जानबूझकर अस्वस्थ और अपौष्टिक खाने की पड़ गई थी। साथ में यह भी शिकायत है कि सत्ता में बैठे कुछ लोग अभी भी पूड़ी कचौड़ी खा और कोल्ड ड्रिंक पी रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीएसटी, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आधार, जन धन बैंक अकाउंट, डिजिटल पेमेंट, भीम एप, मुद्रा लोन, स्वच्छ भारत इत्यादि के द्वारा भारत माता के शरीर में पौष्टिक भोजन का संचार कर रहे हैं।

यह सभी को पता है कि कुछ ही वर्षों में राष्ट्र स्वस्थ और मजबूत होकर उभरेगा। भ्रष्टाचार और निकम्मापन जैसी पूड़ी कचौड़ी की आदत छोड़ने में कुछ समय तो लग ही सकता है. आप अपना धैर्य और भरोसा बनाए रखिए।

पीएम पद की अधूरी लालसा और पासपोर्ट में घुसा प्रेत

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