इससे हिन्दू कुछ सीखेंगे?

मनप्रीत कौर अपने पिता की इकलौती बेटी है। सरदार कृपाल सिंह, त्राल, कश्मीर में एक व्यवसायी हैं।

त्राल वह इलाका है, जहां बुरहान बानी और सब्ज़ार बट्ट जैसे आतंकी पैदा होते हैं, आर्मी और आतंकियों में एनकाउंटर होते हैं। लाशें गिरती हैं। देशद्रोहियों का अड्डा है त्राल, पुलवामा और अवंतीपोरा।

त्राल कस्बे में सिर्फ 6 सिख परिवार रहते हैं जो 1947 से यहाँ बसे हैं। घाटी से मार मार कर कश्मीरी पंडित हिंदुओं को निकाल दिया गया, परंतु आतंकी हत्यारों के कस्बे त्राल के बहादुर सिक्खों ने त्राल नहीं छोड़ा। एक सुंदर गुरुद्वारा भी बना लिया, गुरु गोविंद सिंह के दीवानों ने त्राल में।

मनप्रीत त्राल में ही बड़ी हुई और इंटर के पश्चात पिता ने जम्मू के इंजीनियरिंग कालेज में भेजने की तैयारी की।

मनप्रीत ने निर्णय किया कि त्राल के पास इस्लामिक यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया जाय, जिससे पिता पर आर्थिक बोझ कम पड़े।

पिता ने मना किया कि सिर्फ मुस्लिम, आतंकी और भारत से नफरत करने वालों के बीच एक सिख छात्रा का अध्ययन संभव नहीं है, मग़र मनप्रीत नहीं मानी… इस्लामिक इंजीनिरिंग यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया।

पहले दिन से ही जेहादी छात्रों ने छेड़खानी-छीटाकशी शुरू कर दी। यावर नामक लफंगे जेहादी ने पहले प्रेम प्रस्ताव रखा, मनप्रीत के कोई भाव न दिए जाने पर अन्य छात्र-छात्राओं ने भी मनप्रीत का जीना दूभर कर दिया।

मुस्लिम छात्राओं ने धमकाया कि सिख धर्म छोड़… इस्लाम स्वीकार करने पर उसके साथ नरमी और स्नेह से पेश आया जाएगा। मग़र न बहादुर सिक्खनी डरी… न उसका परिवार घबराया… न पलायन करने का विचार किया।

इन रमज़ानों मे यावर ने मनप्रीत से कहा कि काफिर के सामने आने से रोज़ा खराब हो जाता है… अतः मनप्रीत को कालेज आना छोड़ना होगा।

मनप्रीत ने कहा कि अगर काफिर के सामने पड़ने से रोज़ेदार का रोज़ा टूटता है तो यावर को मनप्रीत की ओर खुद ही नहीं देखना चाहिए।

120 मुस्लिम छात्रों के सामने यावर ने मनप्रीत का गला पकड़ कर दबाना शुरू किया। शेष 118 छात्र-छात्राएं इस ज़ुल्म को देख, अल्लाह ओ अकबर का नारा लगाते रहे, मनप्रीत किसी प्रकार जान बचाकर घर आई।

अगले दिन सरदार कृपाल सिंह के साथ मनप्रीत यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से मिली, यावर द्वारा गला घोंटने की शिकायत की।

मुस्लिम वाइस चांसलर ने मनप्रीत को ही उल्टा दोषी ठहरा दिया, कहा कि यावर मज़ाक कर रहा होगा।

अगले दिन त्राल बस स्टैंड पर दो नकाबपोशों ने कॉलेज की बस पकड़ते समय मनप्रीत पर चाकू से हमला कर दिया। पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया, जबकि मनप्रीत का कटे हाथ का ज़ख्म साफ दिख रहा था।

असली खालसा बहादुरी की कहानी अब प्रारम्भ होती है…

सिर्फ 25 सिक्खों ने धरना-प्रदर्शन किया… त्राल, पुलवामा और अवंतीपोरा जहां मिलिट्री और CRPF भी 50 सैनिकों से कम होने पर नहीं घुसते हैं… वहां सिक्खों ने घोषणा कि यदि हमारी बेटी को कुछ हुआ तो “फाड़ कर रख देंगे” (टीवी चैनल पर)।

मनप्रीत स्वयं टीवी चैनेलों पर प्रस्तुत हुई, अपनी पूरी कहानी पूरे देश को बताई। सिख कौम उठ खड़ी हुई। कश्मीर पुलिस को FIR लिखनी पड़ी, 307 धारा लगानी पड़ी, 3 जेहादी तत्वों को गिरफ्तार करना पड़ा।

(सुरक्षा की दृष्टि से छात्रा और उसके पिता का नाम परिवर्तित है)… इससे हिन्दू कुछ सीखेंगे?

हम महिमामंडन न करें तो इन माफियाओं की कोई औकात नहीं

 

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