देश में O2O क्रांति ला रहे हैं मोदी, शीघ्र ही विकसित देशों की श्रेणी में होगा भारत

नोएडा में सैमसंग के विश्व में सबसे बड़ी मोबाइल उत्‍पादन यूनिट का उद्घाटन का समाचार हम सबने पढ़ा ही होगा। इसके अलावा भारत में iPhone भी बनने लगे हैं। अगले कुछ वर्षो में बुलेट ट्रेन भी चलने लगेगी।

इस उपलब्धि का महत्त्व इस बात में नहीं है कि 5000 करोड़ रुपये के निवेश से बनी इस फैक्टरी के कारण भारत मोबाइल फोन के उत्‍पादन क्षेत्र में विश्‍व स्‍तर पर दूसरे पायदान पर आ गया है।

या फिर, भारत में लगभग चार वर्षों की अवधि में मोबाइल फोन की फैक्‍टरियों की संख्‍या महज 2 से बढ़कर 120 हो गई है जिससे रोज़गार के लाखों अवसर सृजित हुए हैं।

बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के विज़न और पहल का महत्त्व ‘network effect’ या ‘नेटवर्क प्रभाव’ में है।

नेटवर्क प्रभाव को यूँ समझिये कि जैसे-जैसे किसी वस्तु का उत्पादन या प्रयोग बढ़ता है, वैसे-वैसे उस वस्तु के उपयोगकर्ताओं के लाभ भी बढ़ते जाते है। परिणामस्वरूप, उस वस्तु या उत्पाद का दाम गिर जाता है और उसका लाभ इस उत्पाद से जुड़े समूचे नेटवर्क और उसके परे भी होता है।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार डिजिटल युग में ‘नेटवर्क प्रभाव’ किसी राष्ट्र की प्रगति को दिन दुगुनी, रात चौगुनी कर सकता है।

उदहारण के लिए, गूगल या फेसबुक को नेटवर्क प्रभाव का लाभ मिल रहा है। गूगल जैसे सर्च इंजन और भी है जैसे कि Bing या DuckDuckGo। लेकिन गूगल का प्रयोग लगभग 90 प्रतिशत लोग करते है, जिससे Google को प्रयोगकर्ताओं के डेटाबेस से अपना सर्च इंजन बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

इसके अलावा गूगल के बनाये एंड्राइड पर आधारित सेल फ़ोन (iPhone के अलावा लगभग सभी फ़ोन एंड्राइड तकनीकी का प्रयोग करते है); गूगल का you tube इत्यादि प्रयोगकर्ताओ से मिलकर एक ऐसा नेटवर्क बनाते है जो न केवल गूगल को, बल्कि उन सभी उपभोक्ताओं और कंपनियों को लाभ देता है जो इस गूगल को डेवलप करते हैं, और इसका प्रयोग करते हैं।

भारत में सैमसंग और एप्पल के फोन बनने का लाभ केवल उस कंपनी के मैनेजर को ही नहीं मिलेगा, बल्कि उसमें काम करने वाले कर्मचारियों को भी विश्वस्तरीय उत्पादन का अनुभव होगा।

उन्हें समझ में आएगा कि कैसे अनुशासन में उच्च गुणवत्ता का उत्पाद समयानुसार करते हैं। अपनी उस कुशलता, अनुभव और अनुशासन का लाभ वह अपने परिवार और समुदाय में भी फैलाएंगे।

इसके अलावा इतनी उच्च तकनीकी वाली फैक्ट्री को सप्लाई करने वाले वाले अन्य उत्पादों को भी उसी गुणवत्ता का ध्यान रखना होगा।

उदाहरण के रूप में, इस फैक्ट्री की सुरक्षा, पेटेंट की सुरक्षा और गोपनीयता, ट्रांसपोर्टेशन, एक्सपोर्ट, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग, इनवेंटरी (वस्तुसूची), वेयरहाउस, स्वच्छता, इन सभी के बारे में जानकारी मिलेगी।

Andrew Ng

नेटवर्क प्रभाव को एक अर्थशास्त्री (Andrew Ng) ने O2O भी कहा है यानी कि ऑनलाइन टू ऑफलाइन। कोई भी प्रोडक्ट जो ऑनलाइन शुरू होता है, उसके लाभ ऑफलाइन स्थित अन्य उद्यमियों और उपभोक्ताओं को भी मिलते हैं। सैमसंग और एप्पल सेल फोन के उत्पादन से जुड़े हुए ऑनलाइन नेटवर्क का प्रभाव ऑफलाइन क्षेत्र में भी दिखाई देगा।

जब मैंने विदेश में नौकरी शुरू की थी तो उस समय दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में केवल 13 गेट होते थे। अब इनकी संख्या कई गुना अधिक हो गई है। भारत में आज किसी भी फ्लाइट में 25% लोग पहली बार हवाई यात्रा कर रहे होते हैं।

किसने सोचा था कि एकाएक हवाई यात्रा आम आदमी की पहुंच में आ जाएगी और उसके कारण लाखों रोजगार उपलब्ध होंगे जैसे कि चेक-इन करना, सामान लोड करना, सुरक्षा, रेस्तरां, बस ड्राइवर, टैक्सी, सफाई कर्मी, इंजीनियर, पायलट्स, एयर होस्टेस, इत्यादि।

यही प्रभाव बुलेट ट्रेन से देखने को मिलेगा। बुलेट ट्रेन के कारण इसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रेन से मैच करता हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना होगा।

बुलेट ट्रेन के स्टेशन को सामान्य ट्रेन के स्टेशन से कनेक्ट करना होगा, उस ट्रेन की साफ-सफाई, रखरखाव इत्यादि के कारण रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

इस ट्रेन में काम करने वाले और यात्रा करने वाले व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्रों में बुलेट ट्रेन के अनुरूप ही अन्य सेवाओं की अपेक्षा करेंगे और वैसे ही सेवाएं प्रदान करने का प्रयास करेंगे।

सेल फोन, बुलेट ट्रेन, स्पेस टेक्नोलॉजी, कृषि अनुसंधान, राष्ट्रीय हाईवे, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, स्वच्छ भारत, आधार, डिजिटल पेमेंट, राष्ट्रीय सुरक्षा, इत्यादि मिलकर एक ऐसा नेटवर्क बना रहे हैं जिसका प्रभाव भारत को कुछ ही वर्षों में बदल देगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में O2O क्रांति ला रहे हैं। वह भारत को शीघ्र ही विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा कर देंगे। उन पर विश्वास बनाए रखिए।

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