हम महिमामंडन न करें तो इन माफियाओं की कोई औकात नहीं

शैलेंद्र कुमार सिंह

बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी अपराधी के मारे जाने की खबर देखी। निःसंदेह जेल में हत्या होना, कानून-व्यवस्था के ऊपर प्रश्न चिह्न है।

जब मैं 2003-04 में STF में DSP था और पूर्वांचल के अपराधियों पर निगाह रखे हुए था, तो उस समय मुन्ना बजरंगी की काफी दहशत थी।

वाराणसी के व्यापारियों और डॉक्टर ने मुझे बताया था कि, वे इन अपराधियों के डर से किसी भी नए कार्य मे पैसा नहीं लगा रहे हैं, अन्यथा उनसे रंगदारी मांगी जाने लगती है।

उस समय STF के IG सर को सूचना मिली कि, मुन्ना बजरंगी की बुलेटप्रूफ स्कार्पियो सतना (मध्य प्रदेश) में बन कर एक प्रतिष्ठित ऑटो-शोरूम में खड़ी है और वो इसे ले जाने वाला है।

इस सूचना पर IG सर ने 1 Addl SP के साथ पूरी फ़ोर्स भेजी कि, उस गाड़ी को पुलिस कब्जे में ले कर UP ले आये। लेकिन पूरी पुलिस फोर्स वापस आ गई और बताया कि वहां ऐसी कोई गाड़ी नही है।

इसके बाद IG सर का फ़ोन मेरे पास आया कि, शैलेन्द्र पूरी STF की बेइज्जती हो रही कि, मुन्ना बजरंगी की बुलेटप्रूफ गाड़ी पुलिस नही ले जा पा रही।

चूंकि मैं उस समय मुख्तार अंसारी द्वारा आर्मी की चुराई हुई LMG खरीदने के केस के पीछे पड़ा हुआ था। तो मैंने IG सर से कहा कि, अगर मुख्तार के केस को नही देखूंगा, तो ये बड़ी रिकवरी हाथ से निकल जायेगी और UP में बहुत खून खराबा हो जाएगा।

इसपर IG सर ने कहा कि, अब STF की इज़्ज़त तुम्हारे हाथ मे है, जैसे भी करो, इस बुलेटप्रूफ स्कार्पियो को रिकवर करो।

खैर मैंने अपने इंस्पेक्टर को बोला कि आप एक टीम लेकर सतना जाओ और ऑटो-शोरूम के मालिक से मेरी बात कराओ।

इंस्पेक्टर ने जाकर मेरी बात उनसे कराई और मैंने बस इतना ही मालिक को बोला कि, तुम जौनपुर के रहने वाले हो और मेरे बारे में पता कर लो। यदि मैं सतना आ गया, तो तुम्हारा वो हाल कर दूंगा कि, सब माफियागिरी उतर जाएगी।

खैर मेरे इंसपेक्टर ने गाड़ी वहां से ली और लाकर मिर्जापुर के लालगंज थाने में खड़ा कर दी।

इस घटना का ज़िक्र करने का उद्देश्य मात्र इतना है कि, यदि शासन-प्रशासन चाह ले तो, पत्ता भी नहीं हिल सकता है। इन माफियाओं की कोई औकात नहीं होती है, बस अपराधियों का महिमामंडन हम लोग न करें।

– साभार श्री शैलेंद्र कुमार सिंह 

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