जब 8वीं फेल और ग्रेस से 12वीं पास लोग शिक्षा पर बोलें, तो समझिए माजरा क्या है!

Institute of Eminence वाले मामले में 6 संस्थानों पर बात चल रही है। कैसे ये किया, और ये क्यों किया, और क्यों इसको किया?

प्रश्न उठना चाहिए और ठीक है उठाना प्रश्न। फिर हमने पूरा मामला जाना और तब समझ में आया।

ये सारा मामला प्रेस में उठाया किन लोगों ने?

उन्होंने जिनको धान – गेहूँ – ज्वार – बाजरा का पता नहीं और बैंक की ब्रांच खोलने से लेकर हर चीज़ के एक्सपर्ट हैं।

तेजस्वी यादव, जो पता नहीं 8वीं भी पास हैं या नहीं, राहुल गाँधी जो ग्रेस मार्क्स से 42.3% लेकर 12वीं पास कर पाए और DU में झूठा सर्टिफिकेट देकर प्रवेश लेने के आरोपी हैं।

इनके बाद NDTV ने कार्यक्रम कर दिया और जनसत्ता ने लेख मार दिया। फिर रामचंद्र गुहा जैसे के मुंह खोलने बाद लगा कि कुछ तो चल रहा है इन लोगों का।

धान – गेहूँ, मक्का – बाजरा न समझने वाले और बैंक की ब्रांच खुलने को भी न समझने वाले सब एक लाइन में लगे हैं। इसलिए इस मामले की गहराई में उतरना ज़रूरी था। सो कुल मिलकर मामला ये है…

इंस्टिट्यूट सेलेक्ट करने के तीन तरीके थे- 1. सरकारी संस्थान, 2. प्राइवेट संस्थान, 3. प्राइवेट लोगों से नए इंस्टिट्यूट लगाने का प्रस्ताव।

पहले (सरकारी संस्थान) में IITD, IITB और IISc आया और इसमें कोई मतभेद नहीं, इनको सरकारी फण्ड मिलेगा हर साल 1000 करोड़ रुपये, अगले पांच साल तक और ये Institute of Eminence कैटेगरी के बनाए जाएँगे।

दूसरे (प्राइवेट संस्थान) में BITS और Manipal आए। इसमें भी कोई मतभेद नहीं, ये Institute of Eminence कैटेगरी के बनाए जाएँगे, लेकिन फण्ड्स सरकार नहीं देगी, इनको खुद के फंड्स प्रोजेक्ट और रिसर्च कोलैबोरेशन से जुटाना होगा।

इन दो के अलावा कई और भी प्राइवेट संस्थान हैं लेकिन वो उस लायक नहीं है ये मुझे पक्का मालूम है। इनकी सिर्फ बिल्डिंग सुन्दर है बड़ी बड़ी, लेकिन सिर्फ कॉल सेंटर में या अन्य जगह 10 – 20 हज़ार की नौकरी दिलाने की कोठियां हैं। लैब से लेकर फैकल्टी के मामले में शून्य हैं।

तीसरा तरीका था जिसमें सरकार ने एजुकेशन में नए इन्वेस्टमेंट के लिए आवेदन मंगाया था। इसमें वो इंस्टिट्यूट बनाएगा अपने पैसे लगाएगा, लैब बनाएगा, फैसिलिटी सेट करेगा और उसको 3 साल का समय दिया जाएगा, सरकार कोई फण्ड नहीं देगी।

तीन साल के अंदर अगर वो वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी बना लेता है तो फिर 3 वर्ष के बाद EEC उसका रिव्यु करेगा और तब उसके बाद फैसला लिया जाएगा।

इसके लिए सिर्फ LOI जारी हुआ है। अगर पास हुआ तो उसको Institute of Eminence की कैटेगरी में डाला जाएगा।

इस पर प्रपोज़ल देने वालों को बुलाया गया, उन्होंने प्रेजेंटेशन दिया जिसमे Jio ने सबसे बढ़िया प्रेजेंटेशन दिया हर क्राइटेरिया पर, फिर उसको मौका दिया गया है कि बनाओ।

ये सब MHRD की साइट पर साफ़ है कि Jio Institute को Institute of Eminence कैटेगरी का इंटेंट है… न कि वो है। अगर 3 वर्ष में EEC ने फेल कर दिया तो गया… हट जाएगा।

धान के पौधे से गेहूँ उगाने वाले पत्रकार, 8वीं फेल, 12वीं को खींच-खांच के ग्रेस से पास, सोशल मीडिया के पीडी और कम्युनिस्ट विचारक जब किसी रिपोर्ट को करने लगें तो कान खड़े कर लो… आधिकारिक पत्रावली पढ़ो, सरकारी कागज़ देखो और समझो, फिर आगे बढ़ो।

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