कूटनीति में मुफ़्ती के सामने पानी भरने लायक भी नहीं भारत के नेता

कल टीवी शो ‘आपकी अदालत’ में महबूबा मुफ़्ती के तरकश के एक एक तीर को देखा-परखा… सच मुझे कश्मीरियों से रश्क और जलन हुई कि कश्मीरी कौम ऐसे नेता और नैसर्गिक लीडर कैसे पैदा करती रही है?

विश्वास मानिए भारत का एक भी नेता… कूटनीति में मुफ़्ती के सामने पानी भरने तक लायक नहीं है…

हमारी नज़र में कश्मीरी नेता आतंक के पैरोकार और पाकिस्तान के पिट्ठू हो सकते हैं… मग़र 1932 से चली आ रही तहरीर ए निज़ाम ए मुस्तफा को कैसे ज़िंदा रखना है और लगातार होने वाली मौतों के बावजूद कैसे आगे बढ़ाना है… यह एक गहन अध्ययन का विषय होना चाहिए… पूरे भारत देश और इस देश के तथाकथित नेताओं के लिए…

खास बात यह है कि कश्मीरी नेता और वहां के लोग जितना कश्मीरी अस्मिता और अपने ला-इलाह इल्लल्लाह के वचनबद्ध हैं… उतना ही उन्हें यह भी खूब मालूम है कि शेष भारतीय नेताओं में समर्पण, देशभक्ति और कूटनीति का स्तर बस ज़ीरो (शून्य) से थोड़ा ही ऊपर है…

यह कूटनीति का चरम है, जिसमें बाजपेयी डाक्ट्रिन अर्थात इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत को फ़ार्रुख, उमर और महबूबा मुफ्ती भारत के विरुद्ध ही Ak-47 की तरह प्रयोग करते हैं…

हमारे नेताओं के फूटे हुए मुँह से यह नहीं निकलता कि इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत का कॉन्सेप्ट ही देश-भारत विरोधी है…

कश्मीरियों की चालाकी भरी कूटनीति यहीं खत्म नहीं होती… केंद्र में जब कांग्रेस होती है तो बाजपेयी को नेपथ्य में फेंक, वह नेहरू और इंदिरा गांधी का नाम जपने लगते हैं…

शेष देश को लूट कर भारत का पैसा कश्मीर घाटी में कैसे लाना है… यह फार्मूला कश्मीर के छुटभैय्ये नेता तक को पता है… सिर्फ केंद्र स्थित भाजपा के वर्तमान सिरमौर ही इससे अनभिज्ञ हैं…

कश्मीर देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक धनी, विकसित और रोज़गार सृजनता में सम्भवतः नम्बर एक है… मग़र रोने, क्रोधित होने और बन्दूक उठाकर भारतीय सैनिकों को मारने से कश्मीर में यदि समृद्धि आती है और भारतीय नेता, कश्मीरियों के चरण-चुम्बन करते रहते हैं तो इससे बढ़िया युद्ध-नीति-कूटनीति कौन सी हो सकती है…?

दिल्ली में बैठकर महबूबा की साफगोई और हिम्मत की दाद बेशक कोई और नहीं देगा… मग़र मैं तो दूंगा…

मुफ़्ती ने साफ-साफ हर आतंकी को डिफेंड किया, जमात ए इस्लामी, हुर्रियत, पाकिस्तान, पत्थरबाज… सैय्यद सलाहुद्दीन और अपने राजनीतिक धुर विरोधी शेख अब्दुल्ला परिवार तक को डिफेंड किया… पाक से हो रही मादक पदार्थों, अस्त्र-शस्त्र, घुसपैठ को डिफेंड किया.

जब मुफ़्ती ने 1953 में शेख अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के लिए भारत को दोषी ठहराया तो रजत शर्मा बगले झांकने लगे… क्योंकि पत्रकारों से लेकर केंद्र में बैठे सत्ताधीशों को भी कश्मीर के क्रूर, हिंदुओं के रक्त से सने इतिहास और शेख अब्दुल्ला की दगाबाज़ी के बारे में कुछ मालूम ही नहीं है… डॉ स्वामी और जगमोहन को इस विषय में मास्टरी है… मग़र उन्हें हाशिये पर डाला हुआ है इस सत्ता ने…

सच कहता हूं, भारत के नेताओं और पत्रकारों को कश्मीरियों से कूटनीति, देशप्रेम (घाटी के लोग कश्मीर को अलग देश मानते हैं) और समर्पण का पाठ पढ़ना चाहिए…

एक बात जो मुझे महबूबा के बारे में कहनी है कि पूरे भारत में घाटी के बाशिंदे को कोई गाली भी दे देता है तो उस राज्य की पुलिस देर सवेर उस शख्स को गिरफ्तार करने को विवश है… भारत के कोने-कोने में मौजूद घाटी के धर्मोन्मादी कश्मीरी मिलते हैं, मग़र महबूबा ने उन्हें हर जगह सुरक्षा छतरी उपलब्ध कराई…

कश्मीरी छात्र दिल्ली-बैंगलोर में देशद्रोही-पाकिस्तान समर्थक नारे लगाते हैं… किसी राज्य की पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं करती है… यह महबूबा की वजह से संभव हुआ है…

वहीं घाटी में 1989 से 2006 तक हिंदुओं की हत्याएं और बलात्कार होते रहे… हिंदुओं को घाटी छोड़नी पड़ी… हमारी केंद्र सरकारें कान में तेल और आंखों पर पट्टी बांधे दिल्ली में अय्याशियां करती रहीं… यह है भारत का नसीब… यह हैं भारत के नेता…

‘वन्देमातरम’

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