ट्वीटर को भी बनाना होगा राष्ट्रवाद का युद्ध क्षेत्र

कल से मैंने कई जगह मुजफ्फरपुर बांद्रा एक्सप्रेस के S-5 डिब्बे में 2 व्यक्तियों द्वारा 26 नाबालिग बच्चियों को बेचने के लिये ले जाए जाने के प्रयास को एक व्यक्ति की सजगता से बचाये जाने के साहसिक कार्य के समाचार को पढ़ा है।

एक आदर्श नागरिक की छवि को साक्षात करते हुये ट्रेन यात्री आदर्श श्रीवास्तव को जब अपने ही डिब्बे में 2 व्यक्तियों के संरक्षण में सफर कर रही 26 नाबालिग बच्चियों की आंखों में आंसू, भय, असहजता और शून्यता दिखी तो उनके अंदर के जिम्मेदार नागरिक ने यह सब असामान्य जान कर, इन बच्चियों को बचाने को ठान ली।

लेकिन एक सामान्य व्यक्ति चलती ट्रेन में क्या कर सकता था? उन्होंने सामान्य ज्ञान का प्रयोग किया और उसी वक्त ट्विटर को डाउनलोड किया और रेलवे मंत्री पीयूष गोयल, रेलवे मंत्रालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री ऑफिस, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी और बीजेपी के उत्तरप्रदेश के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय को ट्वीट किया कि उनको यह अंदेशा है कि उनके डिब्बे से सफर कर रही 25 (बाद में गिनती में 26) नाबालिग बच्चियां रो रही हैं और भयभीत हैं, संभवत: वे मानव तस्करी के लिये ले जाई जा रही हैं।

उसके बाद वे लगातार बताते रहे कि ट्रेन किस किस स्टेशन से गुजरती जा रही है. इसका परिणाम यह हुआ कि रेलवे मंत्रालय ने डीआरएम गोरखपुर को सूचित किया और उन्होंने जीआरपी गोरखपुर और चाइल्डलाइन बनारस के साथ कार्यवाही की और उन दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया और बेचने के लिये ले जाई जा रही 26 बच्चियों को नारकीय जीवन में धकेले जाने से बचा लिया गया।

बच्चियों से जब पूछताछ हुई तो उन्होंने बताया कि उन्हें यही पता था कि उन्हें किसी ईदगाह पर ले जाया जा रहा था। अब ये बच्चियां सुरक्षित हैं और पकड़े गए दो लोगों से इस पूरे नेटवर्क को पता करने के लिये पुलिसिया कार्यवाही हो रही है।

[एक ट्वीट ने बचाई 26 नाबालिग लड़कियों की जान]

मुझे इस पूरे प्रकरण पर, जिसे तमाम लोगों ने (उनको साधुवाद) पहले भी विस्तार से लिखा है, फिर से दोहराना पड़ा है क्योंकि इस पूरी कहानी में जहां आदर्श श्रीवास्तव ने कुंदबुद्धि, स्वार्थी व स्वकेंद्रित भारतीयों को, भारत के एक नागरिकों के लिये दायित्वों का मापदंड तय किया है, वही फेसबुक पर लिख कर तन्त्र को हिला देने वालों को एक आपातकालीन शिक्षा भी दी है।

मेरे लिये जहां शासन तंत्र को सूचना देने पर, एक व्यक्ति के रूप में आदर्श श्रीवास्तव एक नायक दिखते हैं, वहीं पर उनके द्वारा सामान्य ज्ञान का प्रयोग कर के, ट्विटर को डाउनलोड कर शासन तंत्र तक अपनी बात कहने का निर्णय लेना, ट्विटर के माध्यम को अपनाने की आवश्यकता पर बल देने वाले वे शिक्षक दिखते हैं।

फेसबुक पर अक्सर यह बहस होती दिख जाती है कि ट्विटर और फेसबुक में कौन सा माध्यम कैसा है और कौन सबसे सशक्त है। अब क्योंकि हम फेसबुक पर लिखते है इसलिये उसी को प्रभावी मानते हुये, उसी के माध्यम से अपनी विचारधारा या अपने उदगार व्यक्त करके समाज और राष्ट्र के लिए सदुपयोगी होना समझते है।

लेकिन अब जबकि चुनावी समर बहुत पास है और शासकों से लेकर प्रभावी समूहों तक सीधे संवाद पहुंचाना या उनसे करना है, तब हम लोगों के लिये फेसबुक के साथ साथ ट्विटर के मंच पर अपनी पकड़ बनाना आज की आवश्यकता बन गयी है।

यह एक सत्य है कि हम फेसबुक पर जितनी भी गूढ़ बात करते, उसमें यदि तत्व होता है तो उसका विस्तार जनता में यहां से उठ कर व्हाटसएप के माध्यम से देश के सदूर इलाकों में शनैः शनैः पहुंच ही जाता है।

लेकिन उसके साथ यह भी सत्य है कि यह जितना नीचे समाज के विभिन्न अंचलों में गहराई तक पहुँचता है उतना वह ऊपर, तंत्रों के शीर्ष पर नहीं पहुंच पाता है। ऐसा नहीं है कि वहां, चाहे वह शासन का या पार्टी का केंद्र हो, बात नहीं पहुँचती है लेकिन उसकी गति धीमी होती है और उसका संज्ञान लिये जाने को भी हम प्रत्यक्ष रूप से अनुभव नहीं कर पाते है।

वही पर ट्विटर पर 280 शब्दो में कही बात सीधे ऊपर जाती है और सामूहिक रूप से कही बात के संज्ञान लिये जाने को हम प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।

हां, यहां पर यह भी सही है कि ट्विटर की बात समाज के विभिन्न अंचलों तक नहीं पहुंचती है लेकिन इन अंचलों को प्रभावित करने वाले समूहों तक बात अवश्य पहुंच जाती है।

हम भले यही समझे कि ट्विटर पर अंग्रेज़ी में गिटपिट करने वाले लोग सामान्य जन से कटे हुये हैं लेकिन सत्य यही है कि ‘मूड ऑफ द नेशन’ का कथानक वही से सेट होता है और शासन, पार्टी व जनता से अपेक्षित प्रतिक्रिया तुरन्त मिलती है।

मेरा यहां अपने मित्रों को आह्वान है कि वे 2019 के चुनाव के दृष्टिगत, ट्विटर को भी अपना मंच बनाएं। जिन्होंने ट्विटर को नहीं अपनाया है वे वहां अपना हैंडल (एकाउंट) बनाएं और लोगों को फॉलो करें।

जिन लोगो ने ट्विटर हैंडल बना रक्खे है वे आपस में एक दूसरे को फॉलो करें और जो आपके मन की बात है उन ट्वीट्स को रिट्वीट करे। यहां फेसबुक पर जो आप कहते हैं या कमेंट करते है उसी को 280 शब्दों में बिना व्याकरण का ख्याल रक्खे, सम्बंधित व्यक्तियों को टैग करके ट्वीट करें।

यहां एक बात समझ लीजिये कि आप के नायक या आपके नेता, वह चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या राहुल गांधी, फेसबुक से देश की नब्ज नहीं टटोलते हैं, वे ट्वीटर पर लोगो को फॉलो करते हैं और कमोबेश वहीं से देश के पल पल बदलते मूड को पढ़ने की कोशिश करते हैं और प्रतिक्रिया भी देते हैं।

आप लोग रोज समय निकाल कर कम से कम आधा घँटा ट्वीटर पर दें और राष्ट्रवाद, हिंदुत्व व नरेंद्र मोदी की सरकार के मुद्दों पर सकारात्मक ट्वीट्स करें व इस सबंध में सामने आये ट्वीट्स को रिट्वीट करें। इसी के साथ जो इसके विरोध में ट्वीट करे उसको टैग करके करारा जवाब भी दें।

मैं ट्वीटर पर पहले से ही हूँ और अब तक मैंने इसके महत्व की अनदेखी की है लेकिन अपनी इस गलती अब मैं सुधारूँगा। आप सबको भी नरेंद्र मोदी को फिर से 2019 में प्रधानमंत्री बनाने की लड़ाई अब ट्वीटर पर भी लड़नी है।

मेरा ट्वीटर पर हैंडल @pushkker है और आप सबका वहां स्वागत है।

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