एक ट्वीट ने बचाई 26 नाबालिग लड़कियों की जान

हम सभी सोशल मीडिया नामक के दैत्य से जूझ रहे हैं. इसके मत्थे हम अपनी नाकामियां छिपा रहे हैं. मगर यह तक तकनीक है और इस तकनीक का प्रयोग आपको कैसे करना है यह आप पर निर्भर करता है.

कल एक बहुत ही छोटी सी खबर थी कि रेल यात्री के एक ट्वीट ने 26 लड़कियों को बचाया. जी हाँ, एक या दो नहीं पूरी छब्बीस लड़कियों को एक आदमी की जागरूकता ने बचा लिया, जो उसी डिब्बे में सफ़र कर रहा था.

किस्सा यह है कि कोई आदर्श श्रीवास्तव अवध एक्सप्रेस से एस5 में सफर कर रहे थे, उनका शायद ट्विटर पर एकाउंट भी नहीं था. उनके सामने 10 से 14 बरस की 22 से अधिक लडकियां थीं, सभी सहमी हुई और कुछ रो रही थीं.

ट्विटर पर शायद उनका एकाउंट नहीं है यह इसलिए कह रही हूँ क्योंकि शायद यही उनका पहला ट्वीट था. उन्होंने फटाफट रेलवे पुलिस और मुख्यमंत्री आदि को टैग करते हुए ट्वीट किया कि कुछ लड़कियां मेरे सामने हैं, और बहुत असहज लग रही हैं.

उस ट्वीट को रीट्वीट किया गया और प्रशासन हरकत में आया. बनारस के बाद से दो पुलिसकर्मी उस डिब्बे में चढ़े और अंत में उन लड़कियों को बचा लिया गया. पुलिस ने उन दोनों आदमियों को भी पकड़ लिया है जो इन लड़कियों को बेचने जा रहे थे. इन सभी लड़कियों की उम्र केवल 10 से 14 वर्ष के बीच है.

ज़रा सोचिये बस चंद पंक्तियों ने उन छबीस लड़कियों की ज़िन्दगी बदल दी. यदि यह जागरूकता नहीं होती और यह तकनीक न होती, तो आज की सुबह ही वे लड़कियां न जाने कहाँ बेच दी गयी होंती.

तकनीक बुरी नहीं है, उसका प्रयोग आप किस तरह से करते हैं, यह आप पर निर्भर है. अगर आप कुछ सकारात्मक करेंगे, कुछ सीखेंगे तो सोशल मीडिया आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है, हाँ मगर यहाँ पर भी आप इसकी बुराई, उसकी बुराई, फेक तस्वीरें आदि शेयर करेंगे तो यह इस ब्रह्माण्ड का सबसे बुरा श्राप है.

सजग रहें, इस मंच का सदुपयोग करें. और उस व्यक्ति को दुआएं दें जिसने यह भला काम किया. इस मंच को कोसना बंद करें.

  • सोनाली मिश्र

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