खतरा और पंचायत : इनके बिना संभव ही नहीं भारत

पिछले लेख हम नहीं सुधरेंगे, पर देश सुधर जाए का अंत किया था एक प्रश्न से कि ‘और बताऊँ अंतर?’… इस पर एक मित्र ने कहा, बताइए… सात अन्य लोगों के संदेश आए कि आगे बताइए… तो बताते हैं…

भारत में दो बड़ी ज़रूरी चीज़ हैं और इनके बिना भारत संभव नहीं है और यह हर समय कहीं न कहीं होती ही रहती है।

पहला है, खतरा।

भारत में खतरा बहुत है, कई बार मुझे लगता है कि सारे विश्व का खतरा इधर ही आ गया है। वैसे तो विश्व में सबसे ज़्यादा खतरा इस्लाम को है, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि इस्लाम के विद्वान कह रहे हैं, लेकिन भारत में इस्लाम को सबसे ज़्यादा खतरा है।

एक मौलवी ने बताया कि भारत में ही शौच के बाद पिछवाड़ा धोते समय पानी अंदर जाता है, जिससे रोजा टूटता है, तो लो भाई, आ गया इस्लाम पर खतरा। खतरा हटाने के लिए पिछवाड़ा धोने का रूल ज़रूरी है।

एक मौलवी ने गर्दन रेतने का एंगल, स्पीड और duration बताया जिससे गलत तरीके से गर्दन रेतने पर इस्लाम पर आने वाले खतरा टाला जा सके.

इसी तरह एक मौलवी ने कहा कि किसी को हैप्पी दिवाली बोलने से इस्लाम को खतरा है इसलिये इस्लाम को खतरे से बचने को जल्दी से to you जोड़ दो!

यह तीनों वीडियो हमने UAE में कुछ वहीं के लोगों को भेजा तो उन्होंने कहा Who are these sick people? हमने जवाब दिया ये लोग खतरे को खतरे में डालने वाली प्रजाति है।

दूसरी तरफ ब्राह्मण भी खतरे में है क्योंकि अक्सर लोग बाभनों की भावना आहत करके उनकी बेइज़्ज़त करते रहते हैं। किस बाभन की किस बात पर और कैसे बेइज़्ज़ती हो जाए उसका कोई मानक तय नहीं है, बस यह होते रहता है।

सबका अलग अलग है, एक सरयूपारीण बाभन कान्यकुब्ज में ब्याह नहीं करता, कान्यकुब्ज सरयूपारीण को, सरयूपारीण मैथिलि को, मैथिलि बंगाली बाभन को, बंगाली असमी बाभन को, अय्यंगार बाकी सबको अपने से तुच्छ मानता है।

पाठक और उपधिया तो नीचे है मिसिर, शुकुल के लिए। नंबूदरी सबसे ऊंचा है, कश्मीरी पंडित के लिए सारे बाभन शूद्र है और उनके लिए अलग थाली प्लेट रखते हैं लेकिन बाभन को किससे खतरा है, बाभन को ही पता नहीं, लेकिन खतरा है।

किसी दिन एक मित्र के लेख पर हमने टिप्पणी की, कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने भोंडसी में आश्रम बनाया, करोड़ों रुपया लगा है लेकिन बलिया में PM होते हुए या वैसा ही रुतबा होते हुए भी एक ढंग का हस्पताल नहीं बनवाया।

बस, फिर क्या था… बलिया से लेकर रणथम्भौर होते हुए मारवाड़ तक का राजपुताना हिल गया, राजपूती आन, बान शान पर हमला हुआ और हमको चुपचाप पोथी पतरा उठा, पीठ के सोहराते हुए भागना पड़ा।

जब हर कोई खतरे में है तो काफी सिक्ख लोग भी खतरे में हैं इसलिए उनको खालिस्तान चाहिए, बोडो खतरे में, नागा खतरे में, खासी से लेकर तुलु तक खतरे में है। चर्च पर शराबी पत्थर फेंक दे तो भारत में ईसाई धर्म खतरे में है।

एक बार खतरे ने मुझसे कहा भाई टेंशन है, मैं खतरे में हूँ, हमने कहा अरे बेवक़ूफ़ ब्राह्मण समाज, क्षत्रिय समाज, कुर्मी समाज, कोइरी समाज, वैश्य समाज, कायस्थ समाज, जाटव समाज, यादव समाज, फलाने समाज, ढिकाने समाज सब खतरे में है! कोई एक समाज खोज, अगर खतरे से बचा हो तो उसके सर पर चढ़ बैठ, तेरा टेंशन दूर करने को भारत तो है न!

दूसरा है पंचायत।

हमारे गाँव के गोलियाहे बाबा बड़े पंचायती थे। उनके पास झिनकू आए और कहे कि सुदामा की गाय हमारा खेत चर ली, पंचायत करो। बाबा बोले मार लाठी सुदामा की टांग तोड़ दे।

सुदामा आए बोले कि झिनकुआ लाठी दिखा के डरा रहा है, तो बाबा बोले ऊ अगर टांग तोड़े तो तुम उसका कपार फोड़ दो।

अगले दिन एक टूटी टांग और दूसरा फूटी खोपड़ी लेकर सदर अस्पताल में अलग बगल वार्ड में ख़ुशी ख़ुशी लेटे थे कि गोलियाहे बाबा उनके तरफ से हैं, पंचायत जीत लिया।

इस देश में शुरू से कांग्रेस पंचायती रही है। उसने सबको समान न्याय दिया, किसी को नाराज़ नहीं किया।

मुसलमान जब शिकायत ले के गए तो बोले थोड़े हिन्दू गिरा दो, हिन्दुओं ने शिकायत की तो बोले चूड़ियाँ पहनी है क्या, उन्होंने 100 गिराए तुम 600 पेल के आओ! दोनों खुश, कांग्रेस ने सबको बराबर दिया और समान रूप से सबका ‘लिया’ है।

नागा से लेकर नक्सलबाड़ी होते हुए बस्तर और तमिल तक सबको उठाया, गिराया, गोली बन्दूक दिया और फिर पुलिस – सेना भेजकर उनको उलटवा दिया। दोनों खुश! कांग्रेस किसी को नाराज़ नहीं करती थी, न करेगी।

कांग्रेस बस पंचायत करेगी इसीलिए उनके राज में पंचायती राज भी आया। करना धरना कुछ नहीं लेकिन राज पंचायत का। पंचायत का उसूल रहा है कि छोडो किसी को मत, कर्म का फैसला कर दो, बस वोट हमें देते रहना।

तमिलनाडु ने कहा कावेरी का पानी दो और कावेरी बोर्ड बनाओ, कांग्रेस मान गई, कर्णाटक ने विरोध किया तो कांग्रेस ने विरोध किया, दोनों खुश!

पेट्रोल डीज़ल का दाम देश में घटाने को धरना देने गई लेकिन कर्नाटक में बढ़ाने की मांग हुआ तो मान गई – सब खुश!

पंचायत करने का काम करके, कांग्रेस की पंचायती में फंसने वाली जनता, आजकल कांग्रेस से रूठी हुई है लेकिन भाजपा अभी ठीक से पंचायती करना सीखी नहीं है, जिस दिन पंचायत करना सीख लेगी वह अगले 65 साल राज करेगी।

तो भारत में जितना खतरा है और पंचायत है उतने का नाखून बराबर उधर नहीं है। सब अपने काम धाम में मस्त है और इधर जब तक खतरा आते ही पंचायत न हो, मस्ती रूठ के चली जाती है।

हम कहते है कि भारत की ख़ुशी और मस्ती के लिए खतरा और पंचायत बने रहना चाहिये।

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