सोचिये अगर ऐसा कुछ भारत में होता तो?

चीन का एकमात्र मुस्लिम इलाका उइगर में मुसलमानों के साथ चीन क्या व्यवहार करता है सभी को मालूम है। बीफ के नाम पे सुवर गोश्त भी खिला देता है। दाढ़ी मूंछ छिलवा देता है। लाहौर-भाया-कुवैत! .. खैर इन चाइनीज जोल्हों को छोड़िये।

चाइनीज हलेलुइया पे आते हैं।

हलेलुइया वालों का क्या फंडा है कि मने कि पूरे विश्व भर मे कि गरीब इलाके में जाओ और पैसा बाँटो और भी जो प्रलोभन के तरीके हैं वो अपनाओ और धर्मान्तरण का कार्य करो। गरीबी बेबसी को ही ये हथियार बनाते हैं।

ऐसा ही एक इलाका है चीन में.. चीन का दक्षिण-पूर्व इलाका जियांगझि (Jiangxi )। सबसे गरीब इलाकों में से आता। 10 लाख की आबादी वाले इस इलाके में 11% लोग गरीबी रेखा के नीचे आते व 10% लोग कनवर्जन करवा के हलेलुइया बन चुके हैं व कनवर्जन रेट बढ़ता ही जा रहा है। इस मद्दे नजर कम्युनिस्ट पार्टी के लीडर जो माओ के बाद अब तक सबसे शक्तिशाली बन के उभरे है मने वर्तमान राष्ट्रपति जी जिनपिंग वो बड़े क्रूर टाइप के बन गए हैं।

लोगों के घर से क्रॉस और जीसस के फोटो निकाल के अपनी फोटो लगवा रहे हैं। बोल रहे कि जीसस तुमको गरीबी से बाहर नहीं निकालेगा बल्कि तुम्हारा लीडर जी जिनपिंग निकालेगा। मेरी फ़ोटो लगाओ और पार्टी के प्रति ईमानदार बनो। अगर सरकारी लाभ चाहिए गरीबी से उबरने के लिए तो हमारी बातें माननी पड़ेगी,कोई जीसस आ के नहीं देगा।

जो-जो गरीब परिवार लोभ लालच के चक्कर में हलेलुइया बन गए हैं उनके घर में जिनपिंग के कैडर्स जा-जा के poverty-relief policies समझा रहे हैं और जीसस के फोटो फाड़ के जिनपिंग के फ़ोटो साट रहे हैं। और उन कनवर्टेड हलेलुइया वालों को सरकारी योजना को और भी दूसरे लोगों तक पहुंचाने में प्रमोट भी कर रहे हैं। इनका तर्क है “transformed them from believing in religion to believing in the party”.

अभी तक इसका परिणाम ये है कि करीब 600 ग्रामीण अपने घरों से हलेलुइया से संबंधित सभी किताब,फ़ोटो, पोस्टर्स फाड़ के फेंक दिए हैं और उसके स्थान पे 453 जिनपिंग के फोटो लगा दिए हैं। और ये अभियान चल ही रहा है।

2020 तक इनका टारगेट है कि सभी गरीबों तक इसका लाभ पहुँचे और हलेलुइया आर्थिक प्रलोभन के चलते देश विरोधी कार्य न कर सके।

स्कूलों में जा के बाकायदा बच्चों को वीडियो के माध्यम से अपने पैरेंट्स के ऊपर नजर रखने के लिए बोला जा रहा है। कि आपके माता पिता कहीं ऐसे धार्मिकता की आड़ में नेशनल सेक्युरिटी के साथ खिलवाड़ तो नहीं कर रहे ?

चीन के ऊपर हलेलुइया और जोल्हा देशों की कड़ी नजर रहती है। और चीन इस बात को बराबर समझता है कि कनवर्टेड लोग नेशनल सेक्युरिटी को कभी भी दगा दे सकते हैं ऊपर के धार्मिक आकाओं के कहने पर। और ऊपर के आका सब कौन ? तो अरब और वेटिकन। इसलिए इनके सभी धार्मिक स्थल हैं भी सरकारी कंट्रोल में। कुछ भी इधर का उधर नहीं।

कोई फॉरेनर अगर आता भी है तो उसे नाना प्रकार के जांच से गुजरना पड़ता है तब जा के वो किसी धार्मिक स्थल में जा सकता है। गलती से भी अनऑथोराइज़्ड स्थल में गया तो फिर भारी कीमत चुकानी पड़ती है। पापा फ्रांसिस को भी इन सब से गुजरना पड़ता। कोई वीवीआईपी नहीं और न कोई भेटनर।

फॉरेन से आने वाले हलेलुइया वालों का मैक्सिमम बुरा अनुभव ही रहा है चीन में। फॉरेनर को बाकायदा चाइनीज लॉ में ‘एलियंस’ कहा जाता है।

सोचिये अगर ऐसा कुछ भारत में होता तो ??

सीधे बात यूएन तक ही जा के रुकती।.. इंडियन मीडिया से ले के इंटरनेशनल मीडिया तक हाहाकार मचाती और मचाती ही क्या मच ही रहा है। अल्पसंख्यक,मान्योरिटी ,अकलियत
एकदम से खतरे के निशान के ऊपर चली जाती है। इन्टॉलरेंस का लेबल सातवें आसमान तक चली जाती है।
सबसे ज्यादा विदेशी अजेंस्ट्स यही कनवर्टेड लोग हैं जो नेशनल सेक्युरिटी को ठेंगे पे रखते हैं। देश से ज्यादा धर्म को महत्व देते हैं। लालची क्रिप्टो हिन्दू भी जो विदेशी टुकड़ो पे पल रहे होते हैं वे भी नेशनल सेक्युरिटी को ठोंगे में रखते हैं।.. इनपे जरा सी नकेल कसो तो इन्टॉलरेंस अचानक से बढ़ जाता है और अमेरिका जा के ही रुकता है।
चीन के मामले में तो किसी की चूँ तक नहीं निकलती है।

फिलहाल चाइनीज हलेलुइया और जोल्हों के जिनपिंग ही जीसस और ख़ुदा है।

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