माँ कामाख्या : सृष्टि फिर तैयार है सद्यस्नाता-सी

ऋतु परिवर्तन, पुष्टि है जीवन की निरंतरता की… धरती पर सदैव एक ही मौसम नहीं रहता… हर मौसम की अपनी सुगंध है, अपनी उपादेयता है… ग्रीष्म काल से उकताई धरती वर्षा होने के पहले ही बादलों की आहट सुन लेती है और तैयारी कर लेती है पानी की बूंदों से अपनी सूख चुकी मिट्टी के … Continue reading माँ कामाख्या : सृष्टि फिर तैयार है सद्यस्नाता-सी