पासपोर्ट विवाद : क्या इस देश में जाँच अधिकारी किसी मुसलमान से सवाल भी नहीं कर सकते?

मीडिया ने एक और घटना को ‘तिल का ताड़’ बनाया और रही सही कमी सुषमा स्वराज के ‘सेकुलरिज्म’ ने पूरी कर दी.

पहले तथ्यों को जानें-

पासपोर्ट आवेदन फॉर्म पर अंकित नाम –Tanvi Seth

मतदाता पहचान-पत्र पर अंकित नाम – Tanvi Anas

आधार कार्ड पर अंकित नाम – Tanvi Anas Siddique

Capgemini badge पर अंकित नाम – Tanvi Seth

निकाहनामा पर अंकित नाम – Shadia Anas Siddique

पता भी दो स्थानों का – एक में नोएडा तो दूसरे में लखनऊ.

यदि पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्र ने कुछ प्रश्न पूछे तो बवाल क्यों? यदि ऐसा न हो तो उसे 4 पासपोर्ट आसानी से निर्गत हो जायेंगे. नीरव मोदी को भी 6 पासपोर्ट इन्हीं कारणों से निर्गत हुये हैं.

तन्वी सेठ ने अन्तर्धार्मिक विवाह किया है और धर्म-परिवर्तन कर किया है इसपर किसी को आपत्ति नहीं है और न होनी चाहिये लेकिन पासपोर्ट के लिये प्रस्तुत प्रमाणपत्रों में एकरूपता तो होनी ही चाहिये.

विकास मिश्र ने संशोधित होनेवाले प्रमाण-पत्रों में संशोधन कराने का परामर्श दिया और यही उनका सबसे बड़ा अपराध हो गया. विवाह नितान्त व्यक्तिगत विषय है.

विकास मिश्र ने विवाह पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया होगा बल्कि तन्वी और मीडिया ने पूरे मामले को अतिरंजित कर प्रस्तुत किया है.

मैं एक उदाहरण दे रहा हूँ. मेरी माँ का नाम कौशल्या पाण्डेय (Kaushalya Pandey) है लेकिन आधार कार्ड पर Kaushalaya Pandey अंकित कर दिया गया है जिसके कारण उनके बचत खाता में आधार नहीं जुड़ पा रहा है.

जब इतने छोटे से मामले में एक अक्षर (Letter) के अन्तर से यह सम्भव नहीं हो पा रहा है तो पासपोर्ट एक अतिविशिष्ट दस्तावेज है जिससे राष्ट्र की सुरक्षा भी जुड़ी होती है. उसमें नाम में इतनी विषमता को इंगित क्यों न किया जाय? कल कोई मामला उठे तो किसकी चूक मानी जायेगी?

मैं, सुषमा स्वराज और नरेन्द्र मोदी से ये प्रश्न पूछना चाहूँगा-

1. क्या इस देश में जाँच अधिकारी किसी मुसलमान से सवाल भी नहीं कर सकते?

2. क्या इस मामले में विकास मिश्र (ब्राह्मण) के स्थान पर कोई मुसलमान, सिख, पिछड़ा या दलित अधिकारी होता तो उसे भी स्थानान्तरण का दण्ड दिया जाता और उसके विरुद्ध जाँच होती?

3. क्या इतनी जल्दी किसी हिन्दू का पासपोर्ट निर्गत हो सकेगा यदि उसकी पत्नी मुसलमान हो और उसने धर्म-परिवर्तन कर सनातन धर्म अपना लिया हो?

4. क्या यही सुविधा अन्य अल्पसंख्यकों यथा सिख, बौद्ध, जैन या पारसी को मिलेगी?

मैं, विकास मिश्र की कर्तव्यनिष्ठा और उनके नियमानुकूल आचरण का समर्थन करता हूँ और उनके विरुद्ध की गयी दण्डात्मक कार्रवाई और सुषमा स्वराज की घोर निन्दा करता हूँ.

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