विश्व योग दिवस पर विशेष : ये योग भी एक तपस्या है

मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है, वह केवल अपने ही नहीं, औरों के अनुभवों से भी सीख लेता है. मैं योग को लेकर अपना एक अनुभव आपसे साझा करता हूँ.

मैं HLA B-27 का मरीज हूँ. यह एक जेनेटिक समस्या मानी जाती है. इस समस्या से ग्रस्त लोगों की हड्डियों व जोड़ों में जकड़न आ जाती है और प्रायः इसके कारण उन्हें असहनीय पीड़ा होती है.

मेरे कई परिचित जो इस समस्या से ग्रस्त हैं, वे या तो लाख-लाख रुपए की सुइयाँ ले रहे हैं, या प्रत्यारोपण जैसी अस्वाभाविक एवं जटिल प्रक्रिया से गुजर रहे हैं.

मेरी पत्नी एवेस्कुलर नेक्रोसिस यानी कूल्हे के दर्द की समस्या से पीड़ित रही है और 2007 से ऐलोपैथी डॉक्टर उसे हिप रिप्लेसमेंट की सलाह दे रहे हैं, इस चेतावनी के साथ कि ऐसा नहीं करेंगे तो अनर्थ हो जाएगा.

जीवन है तो कुछ-न-कुछ हारी-बीमारी लगी ही रहेगी. और अपनी इच्छा-शक्ति से ही आपको इन सब परिस्थितियों से पार पाना होगा. दैव न करें, पर भूल से भी यदि आप इन डॉक्टरों के चक्कर में पड़ गए तो ये आपका घुटना, कोहनी, कूल्हा, कंधा सब बदलवाने की सलाह दे डालेंगे.

कुछ डॉक्टर्स का तो एप्रोच मुझे ऐसा लगा जैसे वे तमंचे की नोंक पर भी ट्रांसप्लांट करके ही दम लेंगे. मुंबई में तो एक बड़े डॉक्टर ने मेरे पीछे 2-3 एजेंट जैसा छोड़ दिया और उनके वे गुर्गे इस पर आमादा कि नहीं साहब आप तो अपनी श्रीमती जी का हिप ट्रांसप्लांट करवा ही लीजिए, नहीं तो प्रलय हो जाएगा.

उन प्रलय के भविष्यवक्ताओं के चंगुल से मैं कैसे छूटा, यह केवल मैं और मेरी श्रीमती जी ही जानती हैं. कोई कमज़ोर इच्छाशक्ति वाला मरीज़ तो उन प्रलय के भविष्यवक्ताओं की डरावनी-भयावह भविष्यवाणियां सुनकर ही दम तोड़ दे!

मैं तो एक बार उनके झाँसे में आने वाला भी था, पर मेरी श्रीमती जी ही इच्छाशक्ति की धनी निकलीं और उन्हें डाँट-फटकारकर किसी तरह वापस भेजा. तब से अब तक लगभग 11 वर्ष बीत गए, और कोई ‘प्रलय’ नहीं आया है. ईश्वर की कृपा से सब ठीक-ठाक है. जीवन चल रहा है और बड़ी ठाठ से चल रहा है.

पर मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि जिन समस्याओं को ऐलोपैथी असाध्य मानती है, उसका उपचार भी योग और प्राणायाम में ही है और उसे हम प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हैं. हम दोनों यदि सामान्य जीवन जी पा रहे हैं तो इसका पूरा श्रेय हम योग व प्राणायाम को देते हैं.

हम दोनों कोई मेडिसिन नहीं लेते और दोनों ही ख़ूब सक्रिय और स्वस्थ जीवन जीते हैं. हम सुबह पाँच-छह बजे से रात्रि 11-12 तक जी-तोड़ मेहनत करते हैं, मेरी पत्नी घर-परिवार के सारे काम स्वयं करती हैं, हम ख़ूब यात्राएँ करते हैं, क्योंकि यात्राएँ हैं तो जीवन है, और इन सबके बीच जीवन है कि आगे ही आगे बढ़ता जा रहा है.

यह आसान नहीं था, क्योंकि आज से कई वर्ष पूर्व हम दोनों को डॉक्टर्स ने तमाम हिदायतें और जीवन को जटिल बना डालने वाले सुझाव दिए थे, अगर उनकी सलाह पर चलते तो आज हमारी ज़िंदगी बोझिल व नीरस हो जाती. पर हमने उनकी सलाह पर न चलते हुए योग और प्राणायाम का सहारा लिया.

हममें से कोई यह नहीं जानता कि भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है? परंतु मैं आपको दावे के साथ कह सकता हूँ कि योग आपके आज को संवारता है, योग आपको गतिशील और ऊर्जावान बनाए रखता है! और गति ही तो जीवन है, जड़ता ही मृत्यु है.

यदि आप अपने आज को संवारना चाहते हैं, ज़िंदगी की तमाम जद्दो-जहद और उठा-पटक के बीच भी गति व स्पंदन बनाए रखना चाहते हैं तो योग और प्राणायाम अपनाएँ, यह सदियों के सामूहिक अनुभवों से संचित ज्ञान है, काल और पीढ़ियों के मंथन से उपजा “अमृत-कलश” है, इसे यों ही व्यर्थ न जाने दें!

योग और प्राणायाम न केवल आपको शरीरिक दृष्टि से स्वस्थ रखता है, बल्कि वह आपको मानसिक ताकत भी देता है. इससे एकाग्रता बढ़ती है, विपरीत एवं विरोधी परिस्थितियों को साधने की कला विकसित होती है, जीवन में संतुलन आता है, क्रोध शमित होता है, मौन घटित होता है; करुणा अवतरित होती है, तनाव,कुंठा, अवसाद से मुक्ति मिलती है, नशा जैसी अस्वास्थ्यकर वृत्ति का समूल नाश होता है, संवेदना का विस्तार संभव हो पाता है, मन ध्यान, धारणा, संकल्प की ओर आग्रसर हो पाता है.

इसके अतिरिक्त योग और प्राणायाम के अन्य अनेक ऐसे लाभ हैं, जिनकी महत्ता की गणना सामान्य मानवी के लिए संभव भी नहीं. अगर आप इन सबको नहीं मानते तो भी आप इसे ज्ञान की एक शाखा के रूप में अपना सकते हैं, पुरखों से प्राप्त थाती के रूप में भावी पीढ़ी को यह विरासत सौंप सकते हैं.

अंत में, आपकी स्मृतियों में बसी ये प्रसिद्ध पंक्तियाँ-
यह महान दृश्य है
चल रहा मनुष्य है
अश्रू-स्वेद-रक्त से
लथपथ लथपथ लथपथ!

इसलिए, विपरीत परिस्थितियों के बीच भी, इस चलते रहने में ही जीवन की सार्थकता और महानता है. योग और प्राणायाम इस चलते रहने में, चलाए रखने में सहायक है; तो हर परिस्थिति में चलते रहने के लिए, दैनिक धर्म के निर्वाह के लिए चलते रहिए, बढ़ते रहिए, बहाना छोड़िए और आज ही योग व प्राणायाम अपनाइए!

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