क्या हैं महबूबा के इस मौन के मायने?

जम्मू कश्मीर की गठबन्धन सरकार से अलग हटने के भाजपा के निर्णय से सर्वाधिक आघात महबूबा मुफ्ती को लगा है.

बगैर किसी चेतावनी और बिना सियासी तनातनी के भाजपा द्वारा लिए गए फैसले ने महबूबा मुफ्ती को एक झटके में सत्ता से बाहर कर दिया है.

महबूबा की सरकार गिर गयी है. मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे छिन गयी है.

अब तक उजागर हुए, सामने आए घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा के इस निर्णय की जानकारी अन्तिम क्षणों तक महबूबा मुफ्ती को भी नहीं थी.

अपने फैसले को अन्तिम क्षणों तक गुप्त रखने में भाजपा सफल भी रही. लेकिन इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद महबूबा मुफ्ती जब प्रेस के सामने आईं तो उन्होंने अपनी सरकार के गिर जाने पर बहुत सधी हुई परिपक्व प्रतिक्रिया दी.

भाजपा या केंद्र सरकार या फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उन्होंने एक शब्द नहीं बोला. सरकार से अलग हटने के भाजपा के फैसले को उन्होंने भाजपा का राजनीतिक विशेषाधिकार बताया.

महबूबा से ऐसी शान्त, सधी हुई और परिपक्व प्रतिक्रिया की मुझे कतई उम्मीद नहीं थी. विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ बोलने के बजाय महबूबा मुफ्ती ने जिस तरह मौन साधा उसने मुझे चौंकाया.

जिन परिस्थितियों में महबूबा मुफ्ती द्वारा यह मौन साधा गया उसके चलते यह साधारण बात नहीं है. राजनीति में बिना मतलब के कुछ नहीं किया जाता.

अतः प्रधानमंत्री द्वारा अपनी सरकार गिरा दिए जाने के बावजूद उनके खिलाफ महबूबा मुफ्ती की इस मौन मुद्रा के मायने भी बहुत गहरे हैं.

इसके ठीक विपरीत भाजपा के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के खिलाफ कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कश्मीर से सैकड़ो किलोमीटर दूर मुम्बई में शिवसेना जिस तरह जोर-शोर से अपनी छाती कूट-कूट कर मुहर्रम मना रहे हैं, उसे देखकर वो मुहावरा याद आ रहा है कि… बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना.

अगला गवर्नर कौन?

जम्मू कश्मीर के गवर्नर एनएन वोहरा का कार्यकाल इसी 25 जून को पूरा हो रहा है. कांग्रेसी कृपा के चलते एनएन वोहरा जून 2008 से राज्य के गवर्नर की कुर्सी पर विराजमान हैं.

कार्यकाल से पहले किसी गवर्नर को नहीं हटाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति के चलते वोहरा आगामी 25 जून को अपना दूसरा कार्यकाल पूर्ण कर लेंगे.

राज्य की वर्तमान राजनीतिक प्रशासनिक परिस्थितियों में मोदी सरकार द्वारा एनएन वोहरा को इस पद पर लगातार तीसरा कार्यकाल दिये जाने की संभावनाएं लगभग शून्य हैं.

अतः अब सबसे बड़ा प्रश्न है कि जम्मू कश्मीर का अगला गवर्नर कौन होगा?

वर्तमान परिदृश्य में मुझे यह संभावना प्रबल दिख रही है कि किरण बेदी को जम्मू कश्मीर के गवर्नर की कुर्सी सौंप सकते हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी.

पुडुचेरी की गवर्नर के रूप में अपनी छाप छोड़ चुकी किरण बेदी कश्मीर की कसौटी पर भी खरी उतरेंगी ऐसी उम्मीद की जा सकती है.

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