केजरीवाल जैसे ‘कैकयी विलाप’ करने वाले नेता को कोई ‘मंथरा बुद्धि’ पत्रकार ही देगा समर्थन

आज एक समाचार पत्र में प्रकाशित राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे का लेख ‘केजरीवाल का पुनरोदय’ चाटुरिता की पराकाष्ठा है.

सच तो यह है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने पूरे कार्यकाल में सिवाय मोदी और भाजपा को कोसने के ऐसा कुछ नहीं किया है जिसकी वजह से जनता उन्हें दुबारा चुने.

ये ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो अपने काम नहीं बल्कि अपनी ‘करतूतों’ और ‘माफीनामों’ के लिए याद किये जायेंगे.

काम तो किया नही, तो फिर चर्चा में कैसे आया जाए?

धरना – प्रदर्शन – भूख हड़ताल करो, दिल्ली में बैठा मीडिया दिनभर उसकी कवरेज चलाये, चाटुकार ‘राजनीतिक विशलेषक’ आपके लिए लेख लिखे, और फिर से अपने निकम्मेपन का ठीकरा केंद्र सरकार पर थोप दिया जाए.

अभय दुबे अपने लेख में कांग्रेस से मूर्खतापूर्ण आग्रह करते हुए लिखते है कि अब कांग्रेस को तय करना होगा कि वो “दिल्ली सरकार के अधिकारों की लड़ाई में केजरीवाल का साथ दे”….

अभय दुबे जी शायद आपको याद नहीं कि केजरीवाल दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस की सरकार के विरुद्ध आंदोलन खड़ा करके ही सत्ता में आये थे, जबकि कांग्रेस की तमाम सरकारों ने केंद्रशासित राज्य होने के बावजूद दिल्ली में बहुत विकास कार्य किये.

इन कामों को ‘महाघोटाला’ घोषित करके आपके केजरीवाल आज दिल्ली के मुख्यमंत्री बने बैठे हैं, और जो अब अपनी कामचोरी और निकम्मेपन का ठीकरा दिल्ली के केंद्र शासित राज्य के दर्जा होने पर थोप रहे है.

गज़ब की समझ है आपकी? मोदी विरोध में इतने अंधे हो गए है कि केजरीवाल सरकार के ऐसे निकम्मेपन, ऐसी लापवाही कि दिल्ली में गैंगवार हो रहे है, ऐसी अराजकता कि पूरी सरकार कामकाज छोड़ धरना – प्रदर्शन में मग्न है, आप इसे लोकतंत्र का पुनरोदय मानते हैं?

कांग्रेस तो केजरीवाल की 49 दिन की सरकार में ‘आप’ के साथ हो गयी थी, फिर आपको इसमे भला क्या सन्देह है कि कांग्रेस और ‘आप’ एक नहीं हैं? यह तो जगज़ाहिर है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस की ही ‘बी’ टीम है.

यह केजरीवाल का पुनरोदय नहीं है, यह समय का चक्र है जो एक बार फिर दिल्ली की जनता को याद दिला रहा है कि देख लो और सोच लो…

ये धरना, ये प्रदर्शन सिर्फ शुरुआत है, दिल्ली में गैंगवार तो शुरू हो ही चुके हैं. अभी तो चुनाव से पहले चर्च और मस्जिदों पर हमले (?) किये जायेंगे (पिछले चुनावों की तरह).

ईसाई और मुस्लिमों को डराया जाएगा कि ये हमले आरएसएस वाले करवा रहे हैं, और दिल्ली की समझदार (?) जनता फिर एक बार भूल जाएगी कि गोवा में तो सालों से भाजपा की सरकार है, फिर वहां क्यो नही चर्च पर हमले होते?

ये लोकतंत्र की रक्षा का विलाप अभी तुष्टिकरण की हद तक जाएगा, मस्जिदों और चर्चो से फरमान निकलेंगे की ‘केजरीवाल को वोट दें’… और आप जैसे बुद्धिजीवी (?) इस तुष्टिकरण को खामोश समर्थन देंगे…

सच तो यह है अभय दुबे जी कि केजरीवाल जैसे ‘कैकयी विलाप’ करने वाले नेता को कोई ‘मंथरा बुद्धि’ का पत्रकार-लेखक ही समर्थन दे सकता है.

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