ताड़पत्र-3 : पिछले जन्मों का हिसाब

Rahul Singh Rathore

अन्ततोगत्वा मेरा ताड़ पत्र भी ईश्वर की कृपा से मिल ही गया. खुशी इस बात की है कि ऋषि अगस्त्य द्वारा कुछ लोगों के लिए की गई भविष्यवाणियों में मैं भी सम्मिलित हूँ. ऋषि ने मेरा नाम, पिता जी का नाम, माता जी का नाम, बहनों का विवरण आदि के साथ मेरे लिए कुछ दिव्य वाक्य का उद्बोधन किया है. उनकी स्मृति में मैं भी कभी आया था, मेरे जीवनपर्यंत आह्लादित रहने के लिए बस इतना ही पर्याप्त है.

लेकिन ऋषि अगस्त्य ने मेरे लिए जो संदेश दिया है उसे सुनकर बहुत विचलित हो गया हूँ. मन बहुत दुखी हो गया है. मैं जल्दी दुखी नहीं होता हूँ. तमिलनाडु के ये लिफ रीडर बहुत ही असंवेदनशीलता के साथ, बिना सामने वाले की मन:स्थिति को विचार किये, अपना डॉयलॉग डेलीवर करते हैं.

मुझ जैसे तटस्थ रहनेवाले को भी इनलोगों ने परेशान कर दिया. कुल चालीस मिनट के लिफ रीडिंग में आरम्भ के बीस मिनट केवल दुखद भविष्यवाणी, बिना किसी लागलपेट के, बोलते चले गयें. एक बार तो लगा कि कहीं मेरा हार्ट अटैक न करवा दें.

कुण्डली मैं भी देखता हूँ. हमेशा इस बात का ध्यान रखता हूँ कि दुखद बात भी इतनी संवेदनशीलता के साथ बोलूँ कि विचार संप्रेषित भी हो जाए और सामने वाले को दुख भी न पहुँचे. पर ये तो कसम खा कर बैठे थे कि एक ही कर्णभेदी स्वर में बोलते जायेंगे, चाहे कोई जिये या मरे.

मैंने पहले भी कई बार जिक्र किया है कि मैं विवाह नहीं करना चाहता और मेरी कुण्डली भी विवाह और संतान के सुख में न्यूनता दिखाती है. लेकिन ये लोग जिस डरावने लहजे में इसी बात को बोलें कि वहाँ कोई ऐसा व्यक्ति बैठा होता जिसके लिए विवाह और बच्चे जीवन-मरण का प्रश्न हो, वो तो वहीं घबरा कर बेहोश हो जाता. खैर, उनका बोलने का यही अंदाज है, इसमें कुछ किया नहीं जा सकता.

मैं सबसे ज्यादा दुखी मेरे पिछले जन्म के प्रसंग को लेकर हूँ. वे बोल रहे थे कि पिछले जन्म में मेरा जन्म केरल राज्य में नम्बूदरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. मेरे बाल्यकाल से ही मंत्र साधना में विशेष रूची के कारण घरवालों ने किसी योग्य गुरू के पास मंत्र-साधना सीखने के लिए भेज दिया. इसके परिणामस्वरूप मैं एक सिद्ध मांत्रिक गुरू बन गया. अपनी इस विद्या से बहुतों के कष्ट दूर करने लगा, लोगों की बहुत सेवा की.

कालांतर में समृद्ध लोगों से मित्रता के कारण, उनके शत्रुओं को मैंने अपने मंत्र प्रयोग से परेशान किया. इसके बदले में मुझे मेरे दक्षिणा की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में धन मिलने लगा, जिससे मैं ऐसे कृत्य के लिए प्रेरित होने लगा. उन समृद्ध लोगों के संग-दोष से मैं नशा भी करने लगा.

मेरे माता-पिता ने कभी मुझे रोका भी नहीं. लेकिन मेरी पत्नी मेरे ऐसे गलत तरीके से धन कमाने और नशा करने से बहुत दुखी रहती थी. उसके लाख समझाने पर भी जब मैं नहीं सुधर रहा था तो एक दिन उसने बच्चों को रास्ते पर ही छोड़कर खुद आत्महत्या कर ली. पत्नी के मरने के बाद बच्चों की परवरिश उसके नाना-नानी ने किया.

धीरे-धीरे मेरी मंत्र-साधना की शक्ति चली गयी. अब लोगों का काम मुझसे नहीं हो पा रहा था तो समाज में लोकनिंदा होने लगी. सारा धन जो बुरे कर्म से कमाया था वो नष्ट हो गया. फिर मैं किसी देवालय में सारे बुरे काम छोड़कर संत की तरह जीवन जीने लगा.

मेरी नष्ट हुई दैवी शक्तियाँ फिर से वापस आ गयीं. मैं फिर से पूर्ववत जन-कल्याण में इस मंत्र शक्ति का प्रयोग करने लगा. जीवन के अंत समय तक ऐसे ही सेवा करते हुए सात्विक जीवन जिया. इस कारण वर्तमान जन्म में भी बाल्यकाल से ही वाक्सिद्धि के लक्षण दृष्टिगोचर होंगे.

लेकिन पिछले जन्म में पत्नी और बच्चों की घोर उपेक्षा के कारण जो अनर्थ हो गया था, उसी अपराध के कारण इस जन्म में पत्नी और संतान का सुख नहीं मिलेगा. किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए यह एक दुखद बात तो है ही. बिना विवाह और संतान के किसी सामान्य गृहस्थ की कल्पना भी नहीं की जा सकती.

लेकिन मेरी मानसिक बनावट ही ऐसी है कि मुझे अकेलापन दुख नहीं बल्कि आनंद देता है. कई-कई दिनों तक अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकलता. इस एकांत में एक दिव्य रस है.

इसलिए विवाह न करके अपने संसार को अधिक फैलने से रोकना, मेरे लिए सुखद अनुभूति है. लेकिन ये सब मैं स्वान्तःसुखाय करना चाहता था. जब मुझ जैसे भावुक व्यक्ति को ये पता चला कि पिछले जन्म में मेरे कुछ कृत्य किसी और के लिए आत्महत्या का कारण बने और उसके परिणामस्वरूप मुझे इस जन्म में कष्ट मिला है, तो इसकी कल्पना भी मेरे लिए असहनीय है.

इतने दिनों से मैं अपने ताड़ पत्र न मिलने के कारण परेशान था और जब अब ये मिल गया है तो लग रहा है कि ये नहीं मिलता तो ही ठीक था, कम से कम अपराध बोध से तो बच जाता. ईश्वर ने हम सब के साथ कितना अच्छा किया है कि हमारे पूर्व जन्मों के स्मृति का लोप कर दिया है, वरना सहज जीवन जीना कितना दूभर हो जाता.

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