इस मल, मूत्र, कूड़े को साफ़ करवा रहे हैं एक गरीब, साधारण परिवार से आये मोदी

किसी ने मेरे लेख – हमें क्यों नहीं दिखाई देता भारतीयों की गरीबी और कुपोषण? – पर किसी ने पूछा कि ये भी बता दें कि अफ़्रीकी लोग इतने लम्बे-चौड़े क्यों होते हैं, क्या दुनिया के सबसे विकसित देश अफ्रिका में ही हैं क्या?

बहुत ही उत्तम प्रश्न है, जिसके जवाब के लिए पूरा एक लेख लिखना पड़ेगा.

सर्वप्रथम, अफ्रीका एक देश नहीं है; महाद्वीप है जिसमें 54 राष्ट्र सम्मिलित हैं.

इथियोपिया, लाइबेरिया और मिस्र को छोड़ के, सभी अफ़्रीकी देशों को स्वतंत्रता भारत के कई वर्षो बाद मिली है, जैसे नामीबिया को 1990 में, जिम्बाब्वे को 1980 में, चाड (1960), केन्या (1963), सिएरा लियॉन (1991), घाना (1957), लेसोथो (1966), मलावी (1966), इत्यादि.

सभी अफ़्रीकी देशो को कब स्वत्रंता मिली, इसकी आप गूगल पर जानकारी ले सकते है.

कई अफ़्रीकी देशो में स्वतंत्रता के बाद के स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्र का नेतृत्व संभाला और अपने विज़न और जुनून से राष्ट्र को कुछ ही वर्षो में परिवर्तित कर दिया.

इनमें से कई राष्ट्र 1947 के भारत से गरीब और अशिक्षित थे; पक्की सड़के सौ किलोमीटर से कम थी; रेलवे नाम मात्र की थी; विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, हस्पताल, राजनैतिक दल नहीं थे.

इसके विपरीत भारत में अंग्रेजों की बनायी कांग्रेस पार्टी थी, ब्रिटेन में पढ़े नेहरू और उनके राजवंश का नेतृत्व था, अंग्रेजी संसदीय शासन प्रणाली, अंग्रेजों की बनायी हुई नौकरशाही थी, विश्वविद्यालय था, उस समय की जनसँख्या के अनुसार सड़क और रेल का जाल बिछा था.

अफ्रीका के इन शासकों ने अपने देश का हुलिया बदल दिया. साउथ अफ्रीका, घाना, ज़िम्बाब्वे (मुगाबे की तानाशाही के बावजूद), इथियोपिया, नामीबिया की साफ़-सुथरी सड़के और हस्पताल देखकर आँखे चुंधिया जाती हैं.

नामीबिया की चुनाव व्यवस्था ऐसी है कि वहां 50 प्रतिशत सांसद महिलाएं होंगी, जबकि अभी भी वहां 50 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि लगभग 3500 गोरे लोगों के कब्जे में है.

इन सभी देशों में शौचालय और साफ़-सफाई के उच्च स्तर के कारण जनता को बीमारी का बोझ (ना कि बीमारी) नहीं वहन करना पड़ता. साथ ही भारत जैसी भुखमरी की भी हालत नहीं है.

अतः इन देशों के निवासियों में अधिकतर भारतीयों से लम्बे और हृष्ट-पुष्ट दिखाई देंगे और मानव विकास के मामले में भारतीयों से कही अधिक आगे है. फिर भी इन देशो में कुछ प्रतिशत निवासी गन्दगी और कुपोषण में रह रहे है और उनकी औसत हाइट भारतीयों जितनी ही है.

इसके विपरीत अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में विश्व के सबसे गरीब देश, जैसे कि मॉरिटानिया, निजेर, सूडान, साउथ सूडान, बुर्किना फासो, चाड स्थित हैं. इन सभी देशो में सफाई और शौचालय की सुविधा भारत से कम है, अधिक बच्चे कुपोषण और ठिगनेपन का शिकार है.

फिर भी भारत के बच्चों में इन देशों की तुलना में अधिक कुपोषण, बौनापन, और बीमारी मिलेगी. क्योकि साहेल अफ्रीका की तुलना में भारत की विभीषिका एक मामले में अलग हो जाती है.

भारत में बच्चे मल, मूत्र, कूड़े से घिरे रहते हैं, वहां रेंगते हैं, खेलते हैं, भोजन करते हैं, पानी पीते हैं और स्नान करते हैं. यह गन्दगी उनके मुंह में आती है. वे इस गन्दगी और जीवाणुओं को अपने हाथों से अन्य लोगो में फैला देते हैं और सभी लोग पेशिच, दस्त, बुखार के बोझ के कारण कुपोषण और बौनेपन से ग्रस्त हो जाते हैं.

अगर आप इंटरनेट पर चेक करें, तो पाएंगे कि भारतीयों की औसत हाइट अफ्रीका के साहेल क्षेत्र से अधिक है.

सार यह है कि एक गरीब, साधारण परिवार में आये प्रधानमंत्री मोदी इस मल, मूत्र, कूड़े को साफ़ करवा रहे हैं.

भारत के बच्चे मल, मूत्र, कूड़े में खेलें, खायें, और खानदानी शहज़ादे पंच तारा होटल में इफ्तार खिलाये. IIT में पढ़ा नेता AC कमरे में पड़े सोफे पर लेट कर धरना दे और जनता को लॉलीपॉप पकड़ाए. ऑस्ट्रेलिया में पढ़ा नेता सरकारी आवास ध्वस्त कर दे और केवल अपनी जात वालों का भला करे. यही भारत के अभिजात्य वर्ग की कहानी है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY