हौसलों की उड़ान

लड़की अनमनाई हुई सी उठी चूल्हे को आँच लगाते हुये. शायद गोवर्धन चाचा (दूध वाले) आवाज दे रहे थे. गोवर्धन चाचा से अभी दूध की बाल्टी ले ही रही थी तभी बाबू जी आ गये और उसी वक्त चाय बना कर माता जी आ गयीं…

गपशप चाय के पीने के बाद मौसी की बेटी मुनियाँ आ गयी. मुनियाँ से बात करते हुए फोन बजा…

फोन पर बात कर चुकने के बाद चोर निगाह से मुनियाँ को देखा. तभी भाई रणविजय आया और कुछ खाने को माँगने लगा. बाबू जी ने कहा हाँ खिलाओ इस साँड को…

मुनियाँ के साथ कालेज जाने को तैयार हुयी. रणविजय बाइक से छोड़ने गया.

शाम काफी गहरा गई थी. घर में बाबू जी कुछ परेशान से चहलकदमी कर रहे थे. माता जी सुबक रही थी. मन में सवाल कौंधने लगा कि क्या बात है?

घबड़ाते लड़खड़ाते जबान से धीमे से माता जी से पूछा तो बोली गोवर्धन की लड़की… सुन कर मेरा जी धक् से रह गया.

एक सप्ताह के बाद बाबू जी सुबह सुबह रणविजय के साथ कहीं तैयार हो कर जा रहे थे. माता जी और गोवर्धन चाचा ने मेरी तरफ सजल आँखों से देखा. गोवर्धन चाचा की लड़की के बारे में जानकर जितनी हैरानी नहीं हुयी उतनी ज्यादा परेशानी अब होने लगी थी.

बाबूजी ने शाम को आते ही कहा कि बहुत ही अच्छा घर -वर है. हमारी लड़की रानी बन कर राज करेगी. लड़के वाले परसों देखने आयेंगे. कहा है लड़की सुन्दर, सुशील व पढ़ी लिखी होगी तब दहेज वगैरह की कोई झंझट नहीं होगी. मैंने माँ से लगभग चीखते हुये कहा कि अभी मैं इंटर की ही परीक्षा देने वाली हूँ और मेरी शादी… मेरा गला रूँध गया था.

माता जी ने कहा कि आजकल जमाना ठीक नहीं है… गोवर्धन की लड़की एक गैर जात वाले के साथ भाग गयी. तेरी मौसा भी मुनियाँ के लिए इंजिनियर लड़का ढूँढे हैं. वैसे भी पढ-लिख कर क्या करेगी… नौकरी ही ना. तेरे बाप के उमर के बॉस तुझे गंदी निगाह से देखेंगे और तो और टी.वी. पर सुनते-देखते हैं कि शहर अब सुरक्षित नहीं है. गेंदा राम की बेटी दिल्ली गयी थी, एम. बी. ए. करने मनचलों ने रेप की कोशिश की और सफल नहीं हुये तो एसिड से मुंह जला दिया. तू अभी बच्ची है, बाहर दुनिया बहुत बुरी है. कुछ ऊँच नीच हो गया तो कौन करेगा तुझसे शादी. मेरा दिल बैठ सा गया. समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ…

लड़के वाले आये. मैं सबको चाय नाश्ता दे कर. प्रणाम कर लड़के से मिली. मैं ने लड़के से पूछा कि आपकी कोई गर्ल फ्रेंड है? लड़के ने कहा कि नहीं है. लेकिन…. मैंने कहा. मेरा एक बॉय फ्रेंड है. इसलिए आप मेरे बाबू जी को कहिये कि लड़की मुझे पसंद नहीं है…

लड़के वाले दो सप्ताह का समय ले कर चले गये. घर में मायूसी थी कि तभी फोन आया… मुनियाँ की शादी के बाद मैं दिल्ली चली आयी. मेरा सिलेक्शन IIMC में हुआ और फिर मेरा चयन एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार के लिए हुआ. मुझे पहला इंटरव्यू इंदौर जिले के कलेक्टर का लेना था, जिन्होंने किसानों व औरतों की शिक्षा के लिए काफी प्रयास किया था. मैं सारी तैयारी कर कलेक्टर साहब के चैंबर में गयी. जैसे ही उन्होंने चेहरा उठाया कि मैं थोड़ी नर्वस हो गयी. उन्होने मुझसे ही सवाल कर दिया कि आपका बॉयफ्रेंड कैसा है? मैं चुपचाप देखती ही रह गयी और इंटरव्यू से पहले अपनी अपनी राम कहानी शुरू हो गयी. ये वही थे जिसे मेरे बाबू जी ने पसंद किया था.

मेरे मना करने के बावजूद मेरे बाबू जी को लड़के ने चार साल बाद मुझसे ही शादी करने की बात की थी ताकी मेरी और उनकी शादी का लफड़ा पढाई पूरी होने तक थम जाय. मैं जर्नलिस्ट बन गयी और वे आई.ए.एस. काफी तैयारी के बाद हमें हमारी मंजिल भी मिली और हमसफर भी. लेकिन, पुरानी सोच के साथ नहीं, नये जोश के साथ.

कलेक्टर साहब ने कहा कि मुझे मेरे जिले में ऐसी लड़की की ही खोज थी जो प्रेरणा बने. ऐसी लड़की जो ग्रामीण क्षेत्र से हो और अभी के असुरक्षित माहौल के डर के तिलिस्म को तोड़ कर नारी चेतना को पुष्ट करे. आपके मन में एक सवाल और भी कौंधता होगा. वो फोन किसका आता था??? वो फोन था एक लड़की का. जिससे मैं चोरी-छिपे पढ़ाई की सामग्री लेती थी. क्योंकि मेरे घर और आसपास में लड़की की पढ़ाई को अच्छा नहीं माना जाता था. लेकिन बाबू जी चुपके से मेरी मदद ही करते थे.

मैं कलेक्टर साहब के साथ अपने घर गयी. दरवाजा खटखटाया तो बाबू जी की आवाज आयी कौन? मैं ने कहा आपकी लड़की.

कलेक्टर साहब ने बताया कि बाबू जी आपकी लड़की का तो बड़ा नाम हो रहा है. इसीलिए आपकी लड़की का हाथ आपसे माँगने आया हूँ. बाबू जी की आँखों से खुशी व गर्व के आंसू निकल रहे थे.

– विभाष चन्द्र

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