आर्थिक बम : सदियों तक सुनाई देगी जिसकी गूंज

अभी कुछ दिन पहले यरूशलेम को इजरायल की राजधानी बनाने के अमेरिकी ऐलान के खिलाफ पूरे भारत देश में मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद की अपील पर कुद्वस सुरक्षा दिवस मनाया गया.

उसी दिवस पर एक भाषण के दौरान मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी ने कहा कि सभी मुसलमानों को पश्चिमी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए. अगर मुसलमान पश्चिमी उत्पादों का बहिष्कार करेंगे तो अमेरिका और इजरायल के लिए यह आर्थिक बम की तरह होगा.

मौलाना ने कुरान की आयत का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों को सीसा पिलाई हुई दीवार बनना चाहिए लेकिन हमारे खिलाफ हमारा दुश्मन सीसा पिलाई हुई दीवार बना है. अब समय आ गया है कि मुसलमान इजरायल और अमेरिकी उत्पादों के खिलाफ सीसा पिलाई हुई दीवार बन जाएँ.

मौलाना ने कहा कि हम ज़हर पी रहे हैं और उसका सारा पैसा इस्लाम की दुश्मन ताकतों को मिल रहा है.

रमजान आने से ठीक पहले मुसलमानों के मोबाइल पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें रमजान के पाक महीने में मुंबई के मंगलदास मार्किट स्थित गुजराती, मारवाड़ी जैसे हिंदुओं की दुकानों से माल खरीदने को हराम बताया गया है.

इस मैसेज में मुसलमानों को भड़काऊ तरीके से यह समझाने की कोशिश की गई है कि यह कौम इस्लाम पर लगने वाली पाबंदी के लिए जिम्मेदार है, इसलिए उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी दुकानों से सामान न खरीदा जाए और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाए.

यह मैसेज तकरीबन मुंबई के हर मुसलमान के मोबाइल पर देखने को मिल सकता है. और हिन्दू दुकानदार इस बात से परेशान है कि उनके यहाँ इस बार ऐसा क्या हुआ कि अचानक उनकी बिक्री कम हो गयी और वो परेशान हो गए है.

जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन सेक्टर हैं पर्यटन, सर्विस, कृषि, हॉर्टीकल्चर, माइनिंग, हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम. 2013-14 के दौरान जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था 45 हज़ार 399 करोड़ रुपए थी.

कश्मीर में देशभर से करीब सात लाख लोग प्रतिवर्ष पहुंचते हैं और राज्य की जीडीपी का करीब दस फीसदी हिस्सा पर्यटन से ही आता है. कश्मीर के पर्यटन विभाग के अनुसार जुलाई 2015 और सितंबर 2015 तक लगभग 3 लाख पर्यटक कश्मीर आए, जिनसे औसतन सरकार और वहां के स्थानीय जनता को 4000 करोड़ की कमाई हुई. बाबा बर्फानी के दर्शन को करीब 2.10 लाख लोग 2017 में गए और उससे भी लगभग 4500 करोड़ का मुनाफा हुआ.

कश्मीर में केंद्रीय सत्ता की नीतियों ने सुरक्षा बलों को इतना असहाय बना दिया है कि वो अपनी आत्मरक्षा भी नहीं कर सकते, सैन्य कार्यवाही भी नही कर सकते हैं, सैन्य कार्यवाही (मतलब, प्लास्टिक बुलेट, आंसू गैस, और अंतिम विकल्प पैलेट गन).

सुरक्षा बलों को फायर करने के लिए स्थानीय पुलिस के निर्देशों की आवश्यक होती है, और जम्मू-कश्मीर पुलिस का क्या रवैया है इसके लिए किसी को कुछ कहने की कतई जरूरत नहीं.

तो फिर उपरोक्त इन सारी समस्याओं का समाधान क्या है जिससे बिना सरकार की मदद के भी हम इन सबको रोक सकते हैं?

एक बड़ी पुरानी कहावत है कि – अपने दुश्मन को हराना है तो उसके पेट पर लात मारिये…

पहले हम कश्मीर की बात करते है – कश्मीरी आताताइयों के घर का चूल्हा जलता है – हम देशवासियों के पर्यटन से, हमारे द्वारा खरीदे कश्मीरी शालों से, हमारे द्वारा उपभोग किये जाने वाले, सेव, आड़ू, अखरोट, अंजीर, जैसे फलों से, इनके मुँह में जो ज़हरबुझी ज़ुबान है वो चलती है हमारे द्वारा दिए टैक्स से.

तो क्यों न हम इनसे आर्थिक नाते तोड़ लें, पर्यटन के लिए कश्मीर की बजाय हिमाचलप्रदेश, लद्दाख, उत्तराखंड जाएं, कुछ माह ‘मेड इन कश्मीर’ सामानों का मोह त्याग दें, कुछ माह कश्मीरी फलों और सब्जियों का उपयोग न करके देखिएगा…

ये ज़रूर असरदार होगा, तब इन कश्मीरी शांतिदूतों और उनके रहनुमाओं को समझ आएगा शांति से ही सुख और समृद्धि आती है. आपका सिर्फ ये कदम कश्मीर में हमारे फौजी भाइयों को पत्थर खाने से बचा सकता है जबकि आपकी एक खरीददारी उनके लिए पत्थर या गोली का इंतजाम कर रही है. आइये अपनी देशभक्ति दिखाइए शांति के साथ इनका फन कुचलने में.

भारत में मुसलमानों की कुल आबादी का 3 प्रतिशत भाग सरकारी नौकरी में है और 2 प्रतिशत भाग अरब देशों में नौकरी करके अपनी जीविका चला रहा है. इसके अलावा 10 प्रतिशत मुसलमानों पर कृषि का साधन है. इस प्रकार 15 प्रतिशत मुसलमान नौकरी व कृषि पर स्वावलम्बी हैं. उस 15 प्रतिशत आबादी का हम कुछ नहीं कर सकते.

अब बची 85 प्रतिशत आबादी, इतनी बड़ी मुस्लिम जनसंख्या पर कुछ भी नहीं है. यह आबादी पूर्णतया हिन्दुओं के ऊपर निर्भर है. इस 85 प्रतिशत आबादी में भिखारी, नाई, राज मिस्त्री, दर्जी, दूधिए, बैण्ड बाजे वाले, फेरी वाले, पटाखे बनाने वाले, कबाड़ी, रिक्शेवाले आदि हैं.

इनके पास न नौकरी है और न ज़मीन. पिछले पचास वर्षों में हिन्दुओं ने अपने सारे मूल कार्य छोड़ दिए. वे सारे तकनीकी कार्य मुसलमानों ने छीन लिए. यही उनकी जनसंख्या बढ़ाने का आधार हैं. जिस भिखारी के पास पेट भरने के का आधार नहीं है उसके भी 14 बच्चे हैं. वे 14 बच्चे हिन्दुओं की दया के कारण ही पल रहे हैं.

भारत में इस्लाम को यह अमृत कहां से प्राप्त हो रहा है, हिन्दुओं द्वारा दी गयी रोटी से, रोजगार से. जब रोटी नहीं मिलेगी, रोजगार ही नहीं होगा तो अमृत स्वयं ही सूख जाएगा और यह इस्लाम रूपी रावण क्षण भर में धराशायी हो जाएगा.

हमें देश के प्रत्येक गांव को स्वावलम्बी गांव बनाना होगा. बहुत हिन्दू नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं. उन्हें प्रेरित करके टैक्नीशियन बनाना होगा. हेयर कटिंग, दूध के कार्य, सिलाई, राज मिस्त्री आदि के कार्य गांव-गांव में खड़े करने होंगे.

जिस दिन हिन्दुओं के ये कार्य खड़े होने शुरू हो जाएंगे इस्लामीकरण की समस्या ही नहीं, ईसाईकरण की भी समस्या स्वयं ही समाप्त हो जाएगी.

विशेष

“यह देखना काफी दुखद है कि आपने हिंदुओं की भावना की कद्र नहीं की जिन्हें इस्लाम द्वारा 2000 वर्षो तक आतंकित किया गया. शर्म करो.”

ये ट्वीट अतुल कोचर ने अमेरिकी टीवी सीरिज ‘क्वांटिको’ के एक ऐपिसोड के लिए उसकी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की आलोचना के तौर पर की थी. उस एपिसोड में भारतीय राष्ट्रवादियों को आतंकियों के रूप में दिखाया गया था.

इसके बाद धर्मिक भावना आहत करने का आरोप लगा कर ‘जे डब्ल्यू मैरिएट मारक्विस होटल’ के ‘रंग महल रेस्त्रां’ प्रबंधन ने उस अतुल कोचर को नौकरी से निकाल दिया है जो मिशेलिन स्टार रेटिंग हासिल करने वाले दूसरे भारतीय हैं. मिशेलिन स्टार दुनिया भर के रेस्त्रांओं और शेफ की एक रेटिंग प्रणाली है.

होटल के महाप्रबंधक बिल केफर की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि अतुल की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं. बिल केफर ने कहा कि इस्लाम विरोधी ट्वीट के बाद होटल के मुस्लिम ग्राहकों में रोष है वो हमारा आर्थिक बहिष्कार कर रहे हैं, जिसकी वजह से उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा.

सीधी बात है संगठन में शक्ति है, अभी वो सिर्फ 22% है तो ये हाल है आप अभी भी बहुसंख्यक हैं. अब अपनी शक्ति को आप भी पहचानिए. याद रखिये वो आपसे निजी रोजगार के हर अवसर छीनते जा रहे है, आप सिर्फ एक काम कीजिये अभी जो भी आपके आसपास नई दुकाने खुली हैं उनसे पता कीजिये वो हिन्दू है या मुस्लिम… यकीन मानिए वो मुस्लिम की ही निकलेंगी.

वो हर उस जगह पैर फैला रहे है जहाँ कभी हिन्दुओं का वर्चस्व हुआ करता था. अब तो डेयरी, जनरल स्टोर, फ्रूट शॉप (जूस) हर जगह ये दीमक घुस चुके हैं. बेहतर है आंखे खोलिए और खतरा देखिए वो आपके घर तक आ गया है, घर में घुसे उससे पहले उसका शमन कर लीजिए.

कब तक बिल्ली को अपनी ओर आते देखकर कबूतर की तरह आंखे बंद किये रहेंगे? शिकार आप भी होने वाले है बस समय पर आंखे न खुले तो! आइये एक सीसा पिलाई हुई दीवार बन जाएँ और इनका पूर्णतया आर्थिक बहिष्कार करें.

मेरे इस विचार के विरोध में सेक्युलर और मदरसाछाप लोग तर्क देंगे कि इससे आम मुस्लिमों के मन में शेष भारतवासियों हिन्दुओं के प्रति वैमनस्यता बढ़ेगी, नफरत का स्तर बढ़ेगा, अलगाववाद की भावना और गहरी होगी… तो सुनो – अभी कौन सी कम है?

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