हमें क्यों नहीं दिखाई देती भारतीयों की गरीबी और कुपोषण?

एक प्रश्न पूछते हैं… भारत में आज पैदा हुआ एक बच्चा लगभग 70 वर्ष तक जीवित रहेगा, जबकि वही बच्चा अगर विकसित देशो में पैदा होता तो वह आसानी से 80 वर्ष पार कर जाएगा.

दूसरे शब्दों में, भारत में बच्चों को समय से पहले क्यों मरना चाहिए जबकि अगर वे अमीर देशों में पैदा हुए होते, तो वे जीवित रहते.

वर्ष 2015 में अर्थशास्त्र में नोबेल प्राइज़ विजेता प्रोफेसर एंगस डेटन के अनुसार पश्चिम के पुरुषों और महिलाओं जितनी लम्बाई प्राप्त करने के लिए भारतीय पुरुषो को 200 वर्ष और भारतीय महिलाओं को 500 वर्ष लगेंगे.

मैंने हाइट का आंकड़ा केवल इसलिए दिया कि इसे समझना सरल है. बहुत से आंकड़े हैं जो बताते है कि हमारा – भारतीयों का – शारीरिक और मानसिक विकास पीछे रह गया है.

हमें भारतीयों की गरीबी और कुपोषण क्यों नहीं दिखाई देता? क्यों? हमारे शारीरिक विकास में कमी और कुपोषण के क्या कारण है?

सबसे पहले मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि हमारी अनुवांशिकी या जीन्स का हमारे ठिगने शरीर और कुपोषण में कोई योगदान या जिम्मेवारी नहीं है. अनुवांशिकी कुछ लोगों की हाइट प्रभावित कर सकती है, लेकिन एक बड़ी जनसँख्या में अनुवांशिकी का रोल लम्बाई निर्धारित करने में नगण्य होता है.

एक आम फ़्रांसिसी की हाइट 19वीं सदी के मध्य में पांच फ़ीट पांच इंच थी, जबकि अब यह पांच फ़ीट दस इंच हो गयी है.

प्रोफेसर डेटन के अनुसार लम्बाई में कमी का प्रमुख कारण बचपन और किशोरावस्था में या तो सही पोषण का अभाव है, या फिर अस्वच्छ वातावरण में रहने का असर है जिसमे अच्छे भोजन के बावजूद बीमारी के बोझ – ध्यान दीजिये, बीमारी के बोझ (ना कि बीमारी) – के कारण एक व्यक्ति समय-समय पर अस्वस्थ रहता है और परिणामस्वरूप शरीर ठिगना रह गया.

अस्वच्छ वातावरण में ना सिर्फ अशुद्ध पानी शामिल है, बल्कि कूड़ा-कचरा और प्रदूषण भी. इस गन्दगी का बोझ ना केवल आम भारतीयों को बीमार रखता है, बल्कि उस बीमारी का बोझ शरीर को निचोड़ देता है.

बीमार व्यक्ति ना तो नौकरी पर जा पाता है, ना मजूरी या खेती या व्यवसाय कर सकता है. परिणामस्वरूप पारिश्रमिक ना मिलने या आय ना होने के कारण वह स्वयं और परिवार के लिए भोजन नहीं खरीद सकता जिससे वे सब कुपोषण का शिकार हो जाते हैं.

दुर्बल शरीर के कारण वह पूरी शक्ति से कार्य नहीं कर पाता जिससे कम आय के कारण उसे अन्न और खाद्य सामग्री खरीदने में कठिनाई आती है. एक तरह से वह गरीबी के दुष्चक्र में फंस जाता है.

अगर आप को लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को केवल सुन्दर बनाने के लिए स्वच्छता अभियान चलाया है, गंगा-यमुना को निर्मल बनाने का प्रयास कर रहे हैं, तो आप आंशिक रूप से सही हैं. क्या आप को अपने घर के अंदर कूड़ा-कचरा पसंद है?

प्रधानमंत्री मोदी भारत को इसलिए स्वच्छ बनाना चाहते हैं क्योकि एक स्वच्छ वातावरण हमारे स्वास्थ्य, हमारे कल्याण और हमारी आय के लिए आवश्यक है. अगर भारत वर्ष 2022 तक स्वच्छ हो गया तो हम अगली दो पीढ़ियों में पश्चिमी देशों के नागरिको की तरह स्वस्थ और लम्बे हो जाएंगे.

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