मातृत्व यह होता है, नारीवाद यह होता है, और यह होता है राष्ट्रप्रेम

जब-जब महान आर्यावर्त में मानवता पर से मेरा भरोसा उठता है…

क्योंकि यहां कोई अनपढ़ और छिछोरी करीना खान युवक-युवतियों की आदर्श होती है, जो अपने बेटे का नाम एक बर्बर, तानाशाह, विदेशी आक्रमणकारी के नाम पर रखकर गौरवान्वित होती है…

क्योंकि यहां नारीवाद की पैरोकार वह स्वरा भास्कर होती है, जो जेएनयू की अधकचरी पढ़ाई के बाद ‘पद्मावत’ में चारों तरफ तो ‘योनि’ के दर्शन करती है, लेकिन अपनी एक बंडल फिल्म वीरे दी वेडिंग में ‘$त’ का नाम लेते, गालियां बकते इतराती फिरती है…

क्योंकि यहां नारी-स्वातंत्रय का मतलब ‘वैजाइना मोनोलॉग्स या योनि-एकालाप’ होता है और धार्मिक जकड़ से मुक्ति की पैरोकार वह जिहादी-बालिका बनती है, जो मार्क्सवाद की आड़ में दरअसल अपना जेहादी एजेंडा चलाती है…

और जिसे उसी की जमात के लोग हल्का सा कुछ लिखने पर हत्या-बलात्कार की धमकियां देते हैं और हताश होकर उसे फेसबुक या ट्विटर (या दोनों ही) छोड़ना पड़ता है, जिसके बाद वह काफी दिनों बाद ही इन पर नमूदार होती है…

तब-तब, अंधेरे में एक रोशनी कौंधती है…

तब-तब एक सौम्या विश्वनाथन इस देश में दिखती है, जो लगभग सवा अरब केंचुओं के बीच एक मानवी बनकर सीधी रीढ़ के साथ खड़ी होती है…

जो ईरान में जाकर शतरंज खेलने से इसलिए मना कर देती है, क्योंकि वह जेहादी, रिग्रेसिव, पुरातनपंथी मुल्क अब भी 700 ईस्वी से आगे निकल ही नहीं पाया है.

सौम्या विश्वनाथन ने हिजाब से इंकार कर दिखाया है कि कठमुल्लों के मुंह पर जूता कैसे मारा जाता है, देश का सम्मान क्या होता है और नारी-गौरव क्या होता है?

पंक और कीचड़ से लिसड़ते इस देश में सौम्या ही वह मरहम हैं, जो हमारी आस्था को अब भी बनाए हुए है…

तब-तब एक महिला हमारे सामने आती हैं, जिनका बेटा क्षितिज शर्मा तब नौ महीने का होता है, जब उसके पिता युद्ध में बलिदान देते हैं.

आज लगभग वयस्क हुआ वह बेटा फिर से सैनिक वर्दी में ही देश को सेवा देने जा रहा है. (फोटो में दायीं ओर क्षितिज शर्मा अपनी मां के साथ हैं, उनके हर्ष के आंसू पोंछते हुए)

हमारे देश के नीच, नामर्द और नपुंसक नेता वैसे तो कुछ सीखेंगे नहीं, लेकिन काश… वह जानते कि, मातृत्व यह होता है, नारीवाद यह होता है, राष्ट्रप्रेम यह होता है और अब भी इस देश में कुछ ऐसे पागल बचे हैं, जिनकी वजह से यह देश सलामत है, वरना इसे कब का गर्क हो जाना चाहिए…

वंदन, अभिवंदन, अभिनंदन!!!

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