कैसे भी मोदी को रोकना है! चर्च, मस्ज़िदों से फतवे के बाद अब हत्या की साज़िश

सन 1998 में शारजाह में भारत और ज़िम्बाब्वे के बीच क्रिकेट मैच खेला जा रहा था. सचिन-सौरव की ओपनिंग जोड़ी मैदान पर थी.

ज़िम्बाब्वे के नौजवान, जोशीले गेंदबाज़ हेनरी ओलांगा सचिन को हर हाल में आउट करने में जी जान से जुटे थे. कई बेहतरीन गेंदों से उन्होंने सचिन को परेशान भी किया और आखिरकार सचिन तेंदुलकर एक गेंद पर कैच आउट हो ही गए.

सचिन का विकेट लेना हर गेंदबाज़ का सपना होता था. सचिन का विकेट लेते ही ओलांगा की खुशी सातवें आसमान पर जा पहुँची और बेहद खुशी के मारे वो पागल हुए जा रहे थे. सचिन पैवेलियन लौट चुके थे.

अगला फाइनल मैच फिर से ज़िम्बाब्वे और भारत के बीच था और स्कोर भी बहुत ज़्यादा नहीं महज़ 192 रन ही भारत को बनाने थे. सचिन-सौरव फिर मैदान पर थे और इस बार सचिन के निशाने पर थे हेनरी ओलांगा.

सचिन ने चुन चुनकर ओलांगा की गेंदों पर शॉट्स मारे, यहाँ तक कि जिन गेंदों पर रन बनाना मुश्किल था सचिन ने उनको भी बाउंड्री के पार पहुँचा दिया. पहले मैच में जोशीले ओलांगा का इस मैच में जोश हवा हो चुका था, सचिन ने बहुत ही बेदर्दी से ओलांगा की पिटाई की थी.

मैच समाप्ति के बाद जब सचिन से पूछा गया कि क्या आपने पिछले मैच पर ओलांगा की प्रतिक्रिया पर इतना ग़ुस्सा ज़ाहिर किया? सचिन का जवाब था – “No, I just played my natural game, that’s it.”

1998 में ही ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत आई, शेन वॉर्न का जलवा पूरी दुनिया देख चुकी थी और वो पहली बार सचिन को गेंदबाज़ी करने वाले थे. शेन वॉर्न ने कहा भी था ‘हमने सचिन को आउट करने की ख़ास योजना बनाई है.’

पूरी सीरीज़ के दौरान सचिन ने शेन वॉर्न की भी जमकर धुनाई की, ऑस्ट्रेलिया पहुँचने के बाद शेन वॉर्न ने कहा था- ‘सचिन मेरे सपनों में आकर भी मेरी धुनाई कर रहे हैं.’

2003 के विश्व कप के लीग मैच के पहले एक इंग्लिश गेंदबाज़ एंड्रू कैडिक ने भी कहा कि सचिन मेरे निशाने पर हैं और सचिन ने उसकी ऐसी धुनाई की कि उसके होश फ़ाख्ता हो गए, सचिन ने स्टेडियम के बाहर तक गेंद को पहुँचा दिया. पाकिस्तानी गेंदबाज शोएब अख़्तर की भी सचिन ने कई बार जमकर धुनाई की थी.

सचिन जैसे शांत, संयत खिलाड़ी ने विरोधियों द्वारा चुनौती दिए जाने पर उसका जवाब अपने बल्ले से दिया लेकिन ओलांगा मामले में उनका ग़ुस्सा था क्योंकि सचिन को आउट करने के बाद ओलांगा ने जो प्रतिक्रिया दी थी वो शायद सचिन के दिलोदिमाग में कहीं गहरे चुभ गई थी.

गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की राह आसान नहीं थी, एक तो अनुभव की कमी, दूसरा उनके मुख्यमंत्री बनते ही गुजरात को भूकम्प की भीषण त्रासदी से गुज़रना पड़ा.

मोदी ने दिन रात एक कर दिया गुजरात बनाने में और फिर हो गया गोधरा कांड, जिसने न केवल गुजरात बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया.

गोधरा में ट्रेन में निहत्थे कारसेवकों की निर्मम हत्या से गुजरात प्रतिशोध की आग में जल उठा और यहीं से ‘मिशन 2002’ की शुरुआत हो गई. देश की तमाम सेकुलर पार्टियां, खासकर कांग्रेस मोदी को अपना कट्टर दुश्मन बना बैठी.

उसने मीडिया में अपने फिट किये प्यादों के ज़रिये हर मोर्चे पर मोदी को घेरने, बदनाम करने का कोई मौक़ा नहीं चूका. सीबीआई के दफ्तर में एक मुख्यमंत्री को बिठाकर घंटों पूछताछ की. जबकि बड़े बड़े कांड किये कई मुख्यमंत्रियों को कभी परेशान नहीं किया गया क्योंकि वो कांग्रेसी विचारधारा से मेल खाते थे.

इसके बाद इशरतजहां एनकाउंटर केस में तो आज के भाजपा अध्यक्ष और उस समय गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह को महीनों जेल में डाल दिया गया. ये किसके इशारे पर हुआ सबको पता है. यही वजह थी कि अमित शाह ने राज्यसभा में अहमद पटेल को जाने से रोकने के लिए पूरी ताक़त लगा दी थी. इसके पहले राज्यसभा चुनाव भी होता है ये देश की जनता को पता ही नहीं था. पूरी कांग्रेस भीगी बिल्ली की तरह इधर से उधर भागती फिर रही थी.

अपने साथ हुए अपमान की टीस हर इंसान के सीने में चुभती है और मौक़ा मिलते ही हर कोई अपने अपमान का बदला लेना नहीं चूकता. सचिन के जैसे ही मोदी और शाह भी अपने अपमान को नहीं भूले और मोदी जैसा प्रखर वक्ता, अमित शाह जैसा चुनावी रणनीतिकार, दोनों ने मिलकर पूरी कांग्रेस को हिला डाला. एक के बाद एक कई राज्यों में अपनी सरकार बना डाली. मोदी-शाह चुन चुनकर अपने अपमान का बदला ले रहे हैं और कामयाब भी हो रहे हैं.

मोदी-शाह के इस करिश्मे से हैरान परेशान कांग्रेस और विपक्ष अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट हो रहा है. पिछले चार सालों में मोदी-शाह ने इनकी जड़ों में मठ्ठा डाला है.

मोदी ने देशविरोधी, हिन्दुविरोधी गतिविधियों में लिप्त अनेक NGO को बंद कर दिया है. सेना के हाथ खोलकर कांग्रेस और सेकुलरों के प्रिय कश्मीरी आतंकियों को चुन चुनकर मारा है. माँ-बेटे ज़मानत पर हैं, लालू जेल में हैं, अरबों-खरबों के लोन लेने वालों की संपत्ति जप्त हो रही है.

अब लड़ाई निर्णायक दौर में है. मोदी से परेशान विपक्ष अब उनकी हत्या की साज़िश रच रहा है. चर्च, मस्ज़िदों से फतवे निकल रहे हैं. कैसे भी करके मोदी को रोकना है. साम दाम दंड भेद हर नीति आजमाने पर आमादा है.

मोदी को विपक्ष रोकना चाहता है अपने निजी स्वार्थ के लिए, और देश का आम नागरिक मोदी को कुर्सी पर रोके रखना चाहता है देश के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए, एक स्वर्णिम भारत के लिए… विजय तो हमारी ही होगी.

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