उनके पास समर्थक हैं, दलाल हैं, दरबारी हैं, पर स्वयंसेवक नहीं

आजकल संघ निशाने पर है. अगर आप को लगता है कि यह पिछले चार साल से ही निशाने पर आया है तो फिर या तो आप नादान हैं या अनजान. संघ तो आज़ादी के समय से ही लगातार निशाने पर रहा आया है. यहाँ यह देखना समझना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि यह किसके … Continue reading उनके पास समर्थक हैं, दलाल हैं, दरबारी हैं, पर स्वयंसेवक नहीं