प्रियंका, Quantico, राष्ट्रवाद और हिंदुओं से नफ़रत

आइये फिल्म अभिनेत्री और अभी हाल में अमेरिकी टीवी सीरीज Quantico से फिर चर्चा में आईं प्रियंका चोपड़ा को समझते है…

प्रियंका को बरेली में मैंने अपने बैंक मैनेजर मित्र की पुत्री की बर्थडे पार्टी में देखा था… उस समय वह अमेरिका के किसी कॉलेज से कक्षा -10 की परीक्षा पास करके लौटीं थीं… फर्स्ट ईयर… आर्मी स्कूल की छात्रा थीं… उन्हें अमरीकी हवा लग चुकी थी…16-17 की उम्र में काफी बिंदास थीं… प्रियंका चोपड़ा!

उसी पार्टी में खबर सुनी थी कि इसी लड़की की फोटो प्रोफ़ाइल मिस इंडिया कॉन्टेस्ट के लिए अप्रूव हो चुकी है. मेरी पत्नी उस पार्टी में साथ थीं…

मेरा ख्याल था कि इस ‘बालिका’ को मिस इंडिया कंटेस्ट में आखिरी स्थान मिलेगा… मेरी पत्नी की राय थी कि इन प्रतियोगिताओं में चेहरे की कम… दिमाग और हाज़िरजवाबी की ज़्यादा कद्र होती है…

मुझे आज भी प्रियंका चोपड़ा की वह भाव-भंगिमा याद है, जिसमें वह हर उपस्थित व्यक्ति को इस उम्मीद से देख रहीं थीं कि वह उन्हें देख ज़रूर रहा हो…

[शहरी नक्सलियों का वैश्विक संस्करण है Quantico]

कुछ दिनों में खबर आई कि ‘बरेली की बेटी’ ने मिस इंडिया खिताब जीत लिया है… फेल्योर परफॉर्मेन्स के बाबजूद मुख्य निर्णायक शाहरुख खान ने मिस इंडिया का खिताब प्रियंका चोपड़ा को हस्तगत कर दिया…

मिस वर्ल्ड का रास्ता प्रशस्त हुआ… प्रियंका चोपड़ा का!…शाहरुख खान प्रियंका की नाव के खेवनहार बने… आगे चलकर प्रियंका चोपड़ा ने शाहरुख को नियमानुसार ‘धन्यवाद-आभार’ पेश किया…

डाक्टर कर्नल अशोक चोपड़ा जो प्रियंका के पिता थे… आर्मी से Pre-mature रिटायर्ड थे… ‘कस्तूरी अस्पताल’ नामक अस्पताल चलाते थे… पत्नी भी आर्मी से रिटायर डाक्टर थीं!

अस्पताल इस बात के लिए प्रसिद्ध था कि गांव से उक्त अस्पताल में भेजे जाने वाले मरीजों पर झोला छाप डॉक्टरों को आकर्षक कमीशन प्राप्त होता था…

पास ही कर्नल अशोक चोपड़ा-मधु चोपड़ा-प्रियंका चोपड़ा और उनके छोटे भाई का निवास था… परिवार रानीखेत के पास ‘बाबा हेड़ा खान’ का भक्त था…

मज़े की बात यह है कि प्रियंका चोपड़ा का पोर्टफोलियो फोटो सेशन GIC बरेली में मेरे एक मित्र जो ‘सूरी स्टूडियों’ के मालिकों में से एक थे, ने बरेली में ही किया था…

चोपड़ा निवास में आज भी एक पुराना नौकर रहता है… कस्तूरी अस्पताल बिक चुका है… प्रियंका चोपड़ा की नानी एक ईसाई थीं, जिन्होंने एक हिन्दू से विवाह किया था.. मरते दम तक वह ईसाई रहीं… प्रियंका की असली गाथा शेष है…

विशुद्ध भारतीय नैन-नक्श, अमेरिकी एक्सेंट वाली अंग्रेज़ी की वजह से गलत उत्तर के बावजूद प्रियंका मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने में सफल हो गईं… सारा आकाश अब उनका था… दर्जनों फ़िल्में साइन हुई… फ़िल्में भी सफल होने लगीं…

पुराने पुरुष मित्र, पुराने हुए… शाहिद कपूर जैसे नए लोग ज़िन्दगी में आये तो… यह भी हुआ कि प्रियंका चोपड़ा के परिचित जब घर आते तो शाहिद कपूर दरवाज़ा खोल कर ‘Welcome’ कहते थे…

बोल्ड-बिंदास हैं अपनी प्रियंका… ज़्यादा कपड़ों का भी बोझ नहीं लादती हैं प्रियंका अपने तन पर… 15 बरस पहले एक भाजपाई ने प्रियंका की बोल्ड-बिंदास जीवन शैली पर कोई टिप्पणी कर दी तो उन्हें राष्ट्रवाद और हिंदुओं से ही नफरत हो गई…

शाहरुख कैम्प की सदस्यता के लिए आपका हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को गाली देना आवश्यक होता है… प्रियंका ने यह नीति पहचानने में देर नहीं की… क्वांटिको में हिंदुओं के खिलाफ प्रियंका का डायलॉग इसी कलुषता का जीता-जागता प्रमाण है…

रोहिंग्या कैम्पों में जाना, आर्थिक मदद उपलब्ध कराना… पाकिस्तानियों में प्रियंका का पॉपुलर होना… शाहरुख में प्रियंका के यकीन का एक जीता-जागता सुबूत है… अमेरिकी नागरिकता भी है, प्रियंका चोपड़ा के पास…

कोई भी नई अभिनेत्री… तीनों खान कैम्पों से हटकर मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री में अपना अस्तित्व कायम नहीं रख सकती… कोई बड़ी बात नहीं कि प्रियंका चोपड़ा मज़हब-ए-इस्लाम को स्वीकार कर चुकी हों… आखिर वह बरेली में आला हजरत में वह चादर चढ़ाती रही हैं और उन्हें मालूम है कि मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री में सदैव मुस्लिम दबदबा रहने वाला है…

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