विज्ञान और वैज्ञानिक-7 : क्या आप एक ही समय पर दो दरवाज़ों से कहीं दाखिल हो सकते हैं?

आप चाहे न हो सकते हों, लेकिन परमाणु और उससे छोटे कण ऐसा कर सकते हैं और करते हैं. वे एक साथ दोनों दरवाज़ों से ( या पतली झिर्रियों से ) प्रवेश करते हैं.

यह हैरान करने वाली बात है. आदमी एक समय पर दो दरवाज़ों से नहीं जा सकता, हाथी नहीं जा सकता, घोड़ा या कार भी नहीं. लेकिन इलेक्ट्रॉन जा सकता है, फ़ोटॉन जा सकता है और परमाणु भी. क़्वांटम-भौतिकी के कई रहस्यों में से एक अद्भुत रहस्य यह भी है.

दो झिर्रियों से इन नन्हें कणों को गुज़ार कर वैज्ञानिक अरसे से कई प्रयोग करते आ रहे हैं और नये-नये गच्चे खा रहे हैं. परमाणुओं और उनसे छोटे कणों का संसार अजीब है. इसका बर्ताव कदापि वैसा नहीं, जैसा हमें आस-पास नज़र आता है. आपका कॉमन-सेन्स यहाँ आपके किसी काम नहीं आता.

वैज्ञानिकों से परमाणुओं और इनसे लघुतर कणों की जासूसी भी करके देख डाला. एक साथ कई परमाणु दोनों झिर्रियों से नहीं गुज़ारे, बारी-बारी से एक-एक गुज़ारा और देखा कि कौन किस झिर्री से जा रहा है. अब जो पता चला, वह आपके होश उड़ा देगा.

जब आप परमाणु पर नज़र गड़ा कर उसकी जासूसी करते हैं, तो वह एक ही झिर्री से एक बार में गुज़रता है. और जैसे ही आप नज़र हटाते हैं, वह बदमाश फिर एक साथ दोनों झिर्रियों से एक साथ गुज़र जाता है.

गोया ये कण हमसे कह रहे हों कि हमारी बदमाशी नाप न सकोगे. नापोगे तो एक बार में एक ही झिर्री से जाएँगे. नहीं नापोगे तो फिर अपना क़्वांटमपना दिखाएँगे.

(मैंने यहाँ भौतिकी की शब्दावली का प्रयोग न करके सरलतम भाषा में जिस बात को समझाने का प्रयास किया है , वह दरअसल सुपरपोज़ीशन कहलाता है. क़्वांटम की दुनिया में ये कण ऐसा क्यों करते हैं, यह आज भी रहस्य है जिसपर भौतिकी-जगत् श्रमरत है. )

विज्ञान और वैज्ञानिक – 6 : समय का फैलाव

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