विचारधारा : तथ्य, झूठ और अवधारणा…

कल दो घटनाएं हुईं. दोनों को मिलाकर देखिएगा, उसके बाद यह लेख पढ़िएगा. मदद मिलेगी.

कल पांच शहरी नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई. इसी के साथ इन नक्सलियों की सबसे बड़ी झंडाबरदार, सबसे बड़ा चेहरा अरुंधित ‘सुजैन’ रॉय का औपनिवेशिक-अहंकार से ग्रस्त चैनल बीबीसी पर नया या पुराना एक इंटरव्यू नमूदार हुआ.

अरुंधति कनवर्टेड ईसाई हैं, यह याद रखिएगा. वह जॉन दयाल और सोल-हार्वेस्टिंग वाली टीम की एक सदस्य है, यह भी भूलिएगा मत.

मेरे एक मित्र हैं. बड़े संपादक. उन्होंने इन शहरी-नक्सलों की गिरफ्तारी पर ऐसा सिद्धांत दिया कि मैं हंसते-हंसते लोटपोट हो गया, कुर्सी समेत नीचे ज़मीन पर गिर गया.

उसी क्रम में उन्होंने कहा कि इस सरकार के पहले साल में ईसाइयों पर हमले हुए, पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए उन्हें बख्श दिया गया.

भले आदमी यह बताना भूल जाते हैं कि एकाध टी.वी. स्टूडियो को छोड़कर पूरा देश-विदेश उस मामले में तटस्थ ही था.

हां, जब पता चल गया कि किसी शराबी ईसाई ने ही उस चर्च की ईंट निकाली थी, तो इनके बौद्धिक साथी माफी मांगना भूल गए थे.

बाक़ी रही बात अंतरराष्ट्रीय दबाव की, तो अरुंधति भी बीबीसी पर क्या कर रही थी, वह छिपी बात नहीं है. आप लोगों ने देश की फिक्र ही कब की, कॉमरेड. 1947, 1962, 1999, 2002, 2004, 2014 इत्यादि आपके जगमगाते कीर्तिस्तंभ हैं.

सारी उलटबांसियों का सार निकालते हुए भाई यह फतवा दे डालते हैं कि अब जब मोदी सरकार (संघ) के सारे पांसे पिट गए हैं, वह देख चुकी है कि दलित-मुहम्मडन युति पर हमला ठीक नहीं, तो उसने शहरी-नक्सल का यह तुरुप निकाला है, क्योंकि बीते कुछ वर्षों से यह इलाका शांत था.

मेरे भाई, मेरे दोस्त. अवधारणा-निर्मिति (नैरेटिव-बिल्डिंग) में दिक्कत यही है कि तुम तथ्यों को याद नहीं रखते, अपनी सुविधानुसार उन्हें मिटा देते हो. तुम्हारे सिद्धांत में दो पेंच हैं…

पहला तो यह कि माओवादियों का खात्मा खरामा-खरामा सरकार कर रही है, तुम लोग अब हल्ला नहीं करते या नहीं कर पा रहे, तो यह तुम्हारी समस्या है.

दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है जिन पांच की गिरफ्तारी हुई है, उनमें तीन तो तथाकथित तौर पर दलित-आंदोलन से ही जुड़े हैं.

वह रोना विल्सन ही तो था, जिसने जेएनयू में सीपीआइ-माओवादी की स्टूडेंट विंग बनायी, जेहादी बालक को तैयार किया, भीम के साथ लाल सलाम का कड़वा कॉकटेल तैयार किया. इनमें से दो को तो भीमा-कोरेगांव की हिंसा के लिए ही गिरफ्तार किया गया है.

फिर, या तो तुम्हारी पहली प्रस्थापना गलत है कि सरकार दलित आंदोलन से डर गयी है, या फिर यह कि तुम भूल गए हो कि कहना क्या चाहते हो? खैर…

धर्म-परिवर्तित ईसाई अरुंधति को यह पता भी नहीं होता कि वह क्या बोल रही है? होश खो बैठने के बाद यह स्थिति कई की हो जाती है. उसका नामोल्लेख भी मैं नहीं करना चाहता था, लेकिन नैरेटिव-बिल्डिंग और झूठ का महापुलिंदा बनाने का जब भी उदाहरण देना होगा, तो ऐसी टुच्ची वामपंथी कार्यकर्त्री का नाम देना ही होगा.

तो, उसने कहा, ‘आज मुहम्मडन समुदाय को बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा है. भारत में हिंसक ध्रुवीकरण की स्थिति बहुत भयावह है. मीडिया, न्यायपालिका और सेना प्रधानमंत्री के रवैये से चिंतित है. लेकिन भारत में सभी विशिष्ट संस्थाओं पर कब्जा कर लिया गया है. स्कूली पाठ्य पुस्तकों के मुखपृष्ठों पर हिटलर के चित्र छापे जा रहे हैं.’

जैसा कि पहले भी कहा है, दो कौड़ी की वामपंथी कार्यकर्त्री से मुझे उम्मीद नहीं कि वह पढ़े-लिखे, वरना, उसे यह पता होता कि चमड़े से लेकर लोहे तक, लोहे से लेकर हस्तशिल्प के तमाम कुटीर उद्योगों पर आज मुहम्मडन का ही कब्जा है.

जो काम-धंधे हिंदुओं के थे, उसे तो तथाकथित अंबेडकरवादियों ने भड़का कर किसी लायक ही नहीं छोड़ा. न अब उसे नौकरी मिल रही है, न ही पारंपरिक उद्योग उसके रह गए हैं.

भारत में हिंसक ध्रुवीकरण नहीं हुआ है, ईसाई कुमारी. दरअसल, तुम्हारे आकाओं की फंडिंग बंद हो गयी है, सोल-हार्वेस्टिंग पर थोड़ी सी रोक लग गयी है, तुम्हें अब चिंता हो रही है कि ईशु को मुंह कैसे दिखाओगी… इसलिए अलबला रही हो.

यह दरअसल, प्रस्थापना-निर्मिति का वक्त है. सब कुछ के बावजूद धर्म-परिवर्तित अरुंधति केरल में एक दलित की हत्या के बारे में बात नहीं करेगी, क्योंकि उसकी हत्या सीरियन ईसाइयों ने की (अरुंधति भी वही है).

वह जुनैद के सच के बारे में नहीं बोलेगी, वह कश्मीर का झूठ आंखों में आंखे डालकर बोलेगी, जबकि सच यह है कि कठुआ का जुलूस बलात्कारियों को बचाने या उनके पक्ष में नहीं निकला था, सीबीआई जांच की मांग को लेकर निकला था.

वह ये सब कुछ नहीं बोलेगी, क्योंकि यह उसका विषय ही नहीं है.

This is an all-out war, mates! इसलिए, मैं सेल्फीग्रस्त भाजपाइयों, शेर-चीतों से कहता हूं कि तुम्हारा पाला बड़े धूर्तों से है. हर वक्त तुमको सावधान रहना है, वे तो प्रस्थापना-निर्मिति, अवधारणा-प्रसरण कर रहे हैं… और तुम?

है तुममें वो जोश, वो जुनून?

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