नमो नामा : 4 बार CM रह चुके PM पर एक पाई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं

बहुत गूढ़ भाषा मैं नही जानता. आंकड़ों को लेकर मेरी नॉलेज लगभग शून्य है. न ही मेरा आंकलन इतना सटीक है कि सोशल मीडिया के हल्ले से आने वाले इलेक्शन की भविष्यवाणी कर दूं. खैर…

मेरे लिए मोदी का किसी भाषण में कुरान की शिक्षाओं के संज्ञान देना या अज़ान के लिए दो मिनट भाषण रोकना इनका कोई महत्व नहीं है.

उनका मस्जिद में जाना न जाना, हरा दुशाला ओढ़ना न ओढ़ना मेरे लिए महत्व नहीं रखता, जिसे लेकर हल्के पेट वाले हल्ला मचाए है.

मोदी के हृदय में किनके चरणों का निवास है उसकी अग्निपरीक्षा वो कई बार दे चुके है. और वैसे भी प्रधानमंत्री कोई व्यक्ति नहीं एक पद है जो किसी देश प्रतिनिधित्व करता है. प्रधानमंत्री पद पर उस पर बैठे व्यक्ति के निजी पूर्वाग्रहों का प्रभाव पड़ना भी नहीं चाहिए. क्योंकि जब ऐसा होता है तो किसी देश को 1962 के युद्ध की हार और कभी इमरजेंसी तो कभी 2g 3g और कोयला स्कैम जैसे नतीजे झेलने पड़ते है.

मेरे लिए कैराना की चुनावी हार कोई मायने नहीं रखती. ना मैं इसे 2019 के चुनाव से जोड़ता हूँ. क्योंकि गली के क्रिकेट मैच का वर्ल्ड कप से कुछ लेना देना नहीं. क्योंकि चुनाव में अकेले BJP ने 46% वोट पाए जो 2014 से 4% कम है जब कि एक तरफ सभी दल थे. ये हार नहीं जीत का सूत्र है. तबस्सुम के फोटोशॉप सत्य है या नहीं इस पर मैं कोई बहस करना पसंद नहीं करता. उड़ते हुए तीर का लक्ष्य बनाना निरी मूर्खता है.

पेट्रोल दाम इतने बढ़ने पर उल्टे सीधे तर्क देकर इन्हें सही या गलत आंकना, इसके पक्ष विपक्ष में अंतरराष्ट्रीय आंकड़े फेंकना निरी जड़ता है. GST टैक्स व्यस्वस्था की जटिलता पर अपनी इकनॉमिक्स झाड़ने से भी कोई फायदा नहीं.

लेकिन मैं ये सोच कर सन्तोष करता हूँ कि किसी भी कर (टैक्स) वो चाहे पैट्रोल पर लगे या आय पर, आप उसके कर के खर्च की जानकारी rti लगाकर ले सकते हैं. उसके प्रति सरकार जवाबदेय है. पर अफसरों के जेब में जाने वाली घूस और रिश्वत की कोई RTI नहीं लगाई जा सकती.

और मोदी को वोट देने के लिए जिसे बड़े-बड़े कारण चाहिए वो ढूंढे, मेरे लिए इतना काफी है कि 4 बार CM रहे और आज PM रह चुके व्यक्ति पर एक पाई के भष्ट्राचार के लिए उंगली उठाई नहीं जा सकती.

मोदी अपने जीवन संघर्ष का उच्चतम परिणाम पा चुके हैं. उन्हें जो बनना था बन चुके. हमें देखना है इस जुझारू व्यक्तित्व से हम अपने देश की अवस्था को कितना सुधरवा सकते हैं.

मोदी तो झोला लेकर आये थे, वो झोला लेकर मुस्कुराते हुए निकल जाएंगे. और पिछले कई दशकों से सड़ता हुआ अपाहिज़ सिस्टम और आप यहीं रह जाएंगे.

मर्ज़ी है आपकी भविष्य है आपका

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