सिर्फ ब्रा उछालना ही नहीं, अपनी असीम क्षमताओं का सार्थक उपयोग है नारीवाद

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Feminism अर्थात ‘नारीवाद”, आजकल कुछ ज्यादा ही Facebook पर दिख रहा है. मुझे वाकई इस शब्द का विस्तार से नहीं पता. जैसे कुछ महीनों पहले तक मुझे वामपंथी शब्द का मतलब नहीं पता था. खैर, आजकल जो दिख रहा है, उससे feminism एक तरह से anti-men का पर्याय सा हो गया है.

मुझे नहीं पता कि fb की ये महिलाएँ या लड़कियाँ उभरती या स्थापित कवयित्री हैं; जिनको कुछ सौ या हजार तक के like मिलते हैं feminism की posts पर या ये social workers हैं या ये पीड़ित हैं… या सच कहूँ तो feminism को वैसे ही अति (extreme ) में ले जाने वाली महिलाएँ हैं. जैसे सैकड़ों सालों तक नारी को शोषित कर अति में रखा गया था.

शिक्षा और स्त्री का नौकरी कर अपने पैरों पर खड़ा होना ही सक्षम था – उचित “नारीवाद” के लिए. यहाँ fb पर bra, panty और अवैध संबंधों की ज़रूरतों पर लंबे-लंबे लेख लिखती ये स्त्रियाँ कौन सा नारीवाद चाहती हैं, समझ नहीं आता! क्या कभी पुरुष ऐसे लंबे लेख लिखते हैं कि हमारे under garments पर publicly बोलना चाहिए?

एक कोई fb celebrity महिला, जिनको उनके लेख पढ़कर पहले ही दिन मैं unfriend कर चुकी, उन्होंने एक खबर के विरोध में अपनी एक coloured bra हाथ में लेकर fb post की. खबर थी- किसी private school या schools में बच्चियों के coloured bra पहनने पर रोक.

बस; सब feminist चमक उठे धड़ाधड़ posts करके. अब क्या गलत किया principal ने? मेरा खुद का अनुभव रहा है कि schools में एक-दो female teacher जानबूझकर attention पाने को transparent white या pink कुरते के नीचे coloured bra पहन आती थी और बड़ी classes के बच्चे पूरे 40 minutes तक disturb रहते थे, हंसते थे. लेकिन बाकी teacher जो सभ्य परिधान में आती थी, उस teacher का सम्मान भी होता था और लड़के पढ़ाई में भी मन लगा पाते थे.

मूढ़ता की हद यह कि कुछ और नारीवाद समर्थक ये comments में लिख रही कि हम भी ऐसे ही अपनी discarded ब्रा के साथ selfie ले विरोध करेंगे. और भी मूढता कि ऐसी posts को धड़ाधड़ पुरूषो के comments मिलते हैं कि वाह ! आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी!

अगर ये हिम्मत है तो फिर मेरे गांव के सब छोरे हिम्मत वाले हैं जो नदी पर नहाने के बाद घर तक पूरे रास्ते अपना underwear हाथ में लहराते हुए या सर पर टांगे हुए आते थे.

इन feminist को ये भी नहीं पता कि पुरुष श्रोता या दर्शक वर्ग ऐसी posts के सिर्फ मजे ले रहा है और तारीफ करके उकसा रहा है; और उघड़ने को!

स्त्री का अभिप्राय ही हमारे देश में थोड़ा छिपना थोड़ा उघड़ना रहा है; ताकि एक रहस्य बना रहे ! मगर आजकल का ये feminist concept मेरे छोटे से दिमाग से बाहर की बात है.

मेरी नज़र में नारीवाद शब्द ही हीनता लिए हुए है. फिर भी अगर ये शब्द उपयोग करना पड़े तो रानी लक्ष्मीबाई, एनी बेसंट, निवेदिता, मा शारदा, भामती, भूरिबाई ऐसी हस्तियों के लिए प्रयोग करूँगी; जिन्होंने नारी शरीर की असीम क्षमताओं का सार्थक उपयोग किया.

  • वनकन्या शून्यो

BRA, जकड़न नहीं, तुम्हारी अपनी इजाद की हुई कुण्ठा है

 

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