पैसा होने में और रईस होने में फर्क होता है

हिंदुस्तान में पहलवानी अखाड़ों में होती है. आधुनिक Wrestling Academy को भी हम अखाड़ा ही बोलते हैं.

हर अखाड़े में 8 – 10 कमरे बने होते हैं जिनमें लड़के रहते हैं. हर कमरे में कुछ तख्त, खाट, पलंग या डबल bed होते हैं.

इसके अलावा हर कमरे में एकाध फ्रिज TV भी होता ही है. कई कमरों में AC कूलर भी लगे होते हैं.

कौन लगवाता है ये AC, कूलर, पंखे या फिर TV या फ्रिज…

छोड़ कर जाने वाले ये सामान छोड़ जाते हैं.

अब तो अखाड़ों की ये परंपरा सी हो गयी है. एक बैग में दुइ ठो लंगोटी और एक लुंगी ले के लड़का आता है अखाड़े में और कुछ सालों में नामी पहलवान हो जाता है.

शुरुआत होती है किसी सीनियर पहलवान का बादाम रगड़ने से और उसकी मालिश करने से और कुछ सालों में खुद बड़ा पहलवान बन जाता है.

फिर दंगल लड़ता है… नाम कमाता है, पैसा भी कमाता है, उस पैसे से अपनी खुराक भी manage करता है और अपने दो junior Partners की भी… कमरे के लिए TV, fridge, AC खरीदता है…

और फिर जब कभी जाता है तो उसी तरह एक bag में दुइ ठो लंगोटी और एक लुंगी ले के निकल जाता है… अपने खून पसीने की गाढ़ी कमाई से खरीदा गया वो AC, Fridge, TV वहीं छोड़ जाता है, उन लड़कों बच्चों के लिए जिनके साथ रहा इतने दिन.

1984 में मैं दिल्ली के कैप्टन चांद रूप अखाड़े में रहता था. 1986 में मेरा सिलेक्शन Sports Hostel भिवानी में हो गया.

कैप्टन चांद रूप अखाड़े में मेरा वो तख्त आज भी है जिसपे लड़के सोते हैं… पटियाला के अखाड़े में मेरे छोटे बेटे का फ्रिज, और तख्त आज भी है…

हम अपने पीछे एक विरासत छोड़ जाते हैं, आने वाली संततियों के लिए. लोग पेड़ लगाते हैं जिनके फल आने वाली पीढ़ियाँ खाती हैं…

बचपन में जब पिता जी का ट्रांसफर हो जाता और जब हम क्वार्टर खाली करते तो माँ उस घर को झाड़ पोंछ के, चमका देतीं थीं… आने वाले ये न कहें कि कितनी फूहड़ औरत थी, इतना गंदा घर छोड़ गई…

कल अखिलेश उर्फ टिप्पू यादव ने सरकारी बंगला खाली कर दिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर… वो बंगला जो उन्होंने यूपी की गरीब जनता, करदाताओं के पैसे से सुसज्जित कराया था, उसमे इटालियन मार्बल और बेल्जियन कांच लगवाया था…

कल जाते जाते सारे बंगले को तहस नहस कर गए टिप्पू यादव और उनके चेले… ड्राइंग रूम में मल त्याग (शौच) कर गए… स्विमिंग पूल की टाइल्स उखड़ी हुई थीं…

सब संस्कारों का फेर है… पैसा होने में और रईस होने में फर्क होता है. टिप्पू यादव से इस से ज़्यादा उम्मीद भी नहीं की जा सकती.

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