स्थिति उलट देता है बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत

नवंबर 2005 में बिहार के विधानसभा चुनाव हुए. श्रीमती राबड़ी देवी 35 हज़ार 891 वोट पाकर विधायक बनीं.

उनके विरोधी उम्मीदवार सतीश राय 30 हज़ार 601 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे. इस चुनाव में राघोपुर विधानसभा सीट पर कुल 84 हज़ार 822 वोट पड़े थे.

बिहार – कुल मत प्रतिशत – 45.85%

राघोपुर असेंबली सीट

राबड़ी देवी 35,891 वोट
सतीश राय 30,601 वोट
प्रमोद सिंह 15,137 वोट
कुल वोटिंग 84,822 वोट

लेकिन साल 2010 में अगले विधानसभा चुनाव में बिहार का कुल मत प्रतिशत में 7% का उछाल (45% से 52.67%) आया. राघोपुर में कुल वोट 84 हज़ार 822 से बढ़कर 1 लाख 33 हज़ार 641 वोट पोल हो गया.

और श्रीमती राबड़ी देवी 51 हज़ार 216 वोट पाकर चुनाव हार गई और 2005 में 30 हजार वोट पाकर द्वितीय स्थान पाए सतीश राय को 2010 में 64 हज़ार 222 वोट मिल गए और वे विजयी हुए. पिछले चुनाव से इस बार 48 हज़ार 819 वोट ज्यादा पड़ गए थे.

बिहार – कुल मत प्रतिशत – 52.67%

राघोपुर असेंबली सीट

सतीश राय 64,222 वोट
राबड़ी देवी 51,216 वोट
कुल वोटिंग 1,33,641 वोट

जो राबड़ी देवी 35 हजार वोट लाकर जीत गई थी, वो 51 हजार वोट लाकर हार गईं.

पूरे बिहार में 7% का वोट उछाल था तो हर सीट पर वोट शेयर बढ़ गया था.

आम चुनाव में भाजपा को हुई शहरी मतदाता की ताबड़तोड़ वोटिंग कई बार हारी हुई बाजी जिता देती है… ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं.

जिन्हें बड़ा युद्ध जीतना हो, वो छोटा युद्ध हार भी जाते हैं.

तो कैराना पर रुदाली न करें, ये मुस्लिम इलाकों वाली कई सीटें जो भाजपा यूपी में जीत गई थी वो एक्सिडेंटल विजय थी क्योंकि विपक्ष बिखरा हुआ था. भाजपा यहां आज अपने हिन्दू मतदाता के दम पर 55-60 सीट जीत सकती है.

विशेष : बिहार में अब राजद बनाम भाजपा ही है. कभी सतीश राय राघोपुर से जेडीयू के सिंबल पर लड़ते थे. आज 91 हजार वोट लाकर राघोपुर के विधायक तेजस्वी यादव हैं और सतीश राय भाजपा के सिंबल पर 69 हजार वोट लाकर दूसरे स्थान पर हैं.

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