आओ 15 लाख ले जाओ! फिर क्या होगा? यथार्थ के करीब कुछ कल्पनाएँ

अधिकतर लोगों को मालूम है कि मैं योजनाओं को ध्यान से पढता हूँ… उनके क्रियान्यवन, असर, योजना का फायदा लेने वालो की जनसँख्या, मौके पर काम करने आदि के बारे में डाटा भी इकठ्ठा करता हूं.

समय समय पर इन पर लिखता भी हूँ… बहुत लोगों के पोस्ट पढता भी हूँ. कई तरह के पोस्ट पढ़कर उनके प्रतिक्रियाओं को देने के तरीके से लोगों को समझ रहा हूँ …

चलिए फ़र्ज़ कीजिए कि :

कल मोदी घोषणा कर दें कि “काला धन वापस आया है. चूँकि मैंने इसका उल्लेख किया था 2014 चुनाव के समय. अब धन का surplus हो चुका है अतः हर भारत के नागरिक को कुछ ज़रूरी कागज़ लेकर आना है, 7 Race Course Road पर गेट के सामने लाइन लगाओ, कागज़ जमा कराओ और 15 लाख ले जाओ.”

इसका असर और प्रतिउत्तर क्या होगा…

‘संप्रदाय विशेष’ वाले : बस इतना करेगा कि उन सभी ज़रूरी कागज़ों को लेकर 7 Race Course Road पर लाइन में लग जाएगा… जन्म लिए दुधमुँहे का भी कागज़ लेकर आएगा… लाइन चाहे दिल्ली से दरभंगा तक की लगी हो वो चुप कर के लाइन में लगेगा… घर के हर सदस्य का 15 लाख लाएगा… उसका उपभोग करेगा… चुनाव आने पर मोदी को वोट नहीं करेगा…

‘धर्म विशेष’ वाले हैं… इनमें ख़ास गुण होते हैं… ये कई तरह के दिव्य ज्ञान से लैस होता है और फटाफट इस पर अपना काम करने लग जाएगा – ये काम होगा प्रतिक्रिया देना और उनकी प्रतिक्रिया कुछ इस प्रकार होगी –

‘मोदी का ये 7 रेस कोर्स वाला फैसला गलत है, मोदी को लखनऊ, गोरखपुर, जयपुर, भोपाल, कलकत्ता, लुंमडिंग, वगैरह सब जगह जाकर देना चाहिए… हमारे ही 15 लाख के लिए मोदी ने इतना परेशान कर दिया, हम काहे दौड़ें… Finally – चुनाव में मोदी को पता चल जाएगा.’

कुछ सुरक्षा विशेषज्ञ भी होंगे – ‘कोई दूर से दिल्ली आएगा तो पैसे लेकर जब जाएगा तब उसके सुरक्षा का क्या – Finally – चुनाव में मोदी को पता चल जाएगा.’

कुछ ट्रेन के चक्कर में गरिया रहे होंगे… ‘हमारी ट्रैन लेट हो गई, हमारे गाँव का संकठा और कतवारू पहले पहुँच गए, उनको पहले मिलेगा… हमारी लेट करा दी ट्रेन… Finally, इस बार चुनाव में देख लेंगे.’

कुछ बाऊ साहब, पंडी जी… उनके गाँव का पुद्दन जैसे ही 15 लाख लेकर पहुंचेगा… ‘ये मोदिया सवर्णों के लिए कुछ नहीं किया, दलित तुष्टिकरण में लगा है… Finally, इस बार चुनाव में देख लेंगे.’

यादव जी, हरिजन जी और मल्लाह जी व अन्य – ‘हमारा शोषण हुआ है वर्षों से, इन ब्राह्मणों ने किया है, हमको मिले ठीक लेकिन ये ब्राह्मणों को क्यों मिल रहा है, ब्राह्मणवादी शक्तियों के हाथ में खेल रहा है मोदी… Finally, इस बार चुनाव में देख लेंगे.’

कुछ होंगे जिनके कागज़ पूरे नहीं होंगे – चीख चीख के गला फाड़ लेना है योजना के पहले मोदी ने कि खाता खुलवा लो, आधार ले आओ, PAN ले आओ लेकिन अब तक नहीं बनाया, अब दौड़ रहे हैं – मोदी को गाली निकाल रहे हैं कि ‘परेशान कर दिया है टर्म्स लगा कर, – Finally, इस बार चुनाव में देख लेंगे.’

कुछ इकोनॉमिस्ट भी आ जाएंगे… ‘मोदी ने चालाकी कर लिया है, इतने वर्षों से हमारे पैसे फंसे पड़े थे… इसका ब्याज नहीं जोड़ा है जिससे नुकसान हुआ है… Finally, इस बार चुनाव में देख लेंगे.’

कुछ और बड़े इकोनॉमिस्ट बताएंगे कि ‘मोदी के भाषण 2013-2014 के हैं तो तब से अभी तक का Arier नहीं जोड़ रहा है… Finally, इस बार चुनाव में देख लेंगे.’

कुछ कट्टर भी दिल्ली से दरभंगा तक की लगी हुई लाइन का मुआयना कर के आएँगे… ‘मोदी की पॉलिसी से पता चल रहा है कि उसको सेक्युलर कीड़ा काट चुका है और वो नोबल प्राइज़स लेने के चक्कर में है… मजहब विशेष वालों को पैसा बाँट रहा है… धर्म विशेष (वही ऊपर वाले) ठगा महसूस कर रहे हैं… Finally, इस बार चुनाव में देख लेंगे.’

अगर सब प्रतिक्रयाएँ लिखूंगा तो लेख लंबा हो जाएगा… ये तो न्यूनतम होना ही है.

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