TIPS : गर्मियों का मौसम और मटके की खरीददारी के लिए

गर्मियों का मौसम इन दिनों अपने चरम पर है. ऐसे में हर कोई ठंडा पानी चाहता है. जब हमारे घर में फ्रिज नहीं आया था, तब ठंडे पानी के लिए घर में मटकों का ही राज हुआ करता था. इतना ही नहीं, लोग ट्रेन और बसों में भी मटके या सुराही ठंडे पानी के लिए साथ ले जाते थे. विशेषज्ञों का मानना है कि सेहत के लिए मटके का पानी फायदेमंद है. आइए जानते हैं ऐसे ही मटकों के बारे में जो पानी को कूल तो रखेंगे ही, आपको सेहतमंद भी बनाएंगे. पूरी जानकारी दे रहे हैं मुकुलः

मेकअप के साथ मार्केट में मटके

1. हाल में लोगों की सुविधा और जरूरत के अनुसार मटकों में कई बदलाव भी आए हैं. लोगों की सुविधा के लिए मटकों, सुराही और टंकी तीनों में ही पानी की टोंटी को लगाया गया है ताकि लोगों को पानी निकालने के लिए मटके में गिलास डालने जैसी परेशानी ना हो.

2. बाजार में आजकल खूबसूरत पेंट की हुई टंकियां भी मिल रही हैं. आर्ट से लगाव रखने वाले लोग पानी की इन खूबसूरत मिट्टी की टंकियों को काफी पसंद कर रहे हैं.

3. मिट्टी की बोतल इन सभी से काफी आगे है. लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं. मिट्टी की बोतल भी खूबसूरत पेंटिंग की हुई मिलती हैं. सस्ते में पानी पीने के लिए यह मुफीद है.

कौन-सी मिट्टी के बने हैं ये मटके

मटके बनाने के लिए वैसे तो चिकनी मिट्टी का ही उपयोग किया जाता है क्योंकि चिकनी मिट्टी से बने मटके ज्यादा दिनों तक चलते हैं. इसके अलावा रेत और मिट्टी से मिलाकर भी मटके बनाए जाते हैं इन्हें झज्जर कहा जाता है. कई सजावटी मटकों को बनाने के लिए टेराकोटा मिट्टी का प्रयोग किया जाता है. दिल्ली में बनने वाले मटकों के लिए मिट्टी अधिकतर दिल्ली-हरियाणा के बॉर्डर के गांवों और हरियाणा के झज्जर इलाके से आती है.

मटकों की तशरीफ स्टैंड पर

मिट्टी के बर्तनों को सीधा जमीन पर रखना ठीक नहीं. पहले लोग कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर इन्हें रखा करते थे लेकिन बाजार में आजकल इन्हें रखने के लिए स्टैंड पर मिल रहे हैं. इससे इनके टूटने का भी खतरा नहीं रहता.

स्टैंड तीन तरह के मिलते हैं:

1. लोहे के स्टैंड पर गोल्डन पेंट वाला स्टैंड,
2. लोहे के स्टैंड पर प्लास्टिक के कवर वाला स्टैंड,
3. स्टेनलेस स्टील का स्टैंड.
इनकी कीमत 30 रुपये से शुरू होकर 100 रुपये तक है.

किस साइज का घड़ा खरीदें

बाजार में मटकों की वरायटी लोगों की जरूरत के मुताबिक हर साइज में मिलती है. बस आप जाइए और अपनी पसंद का मटका घर ले आइए. 4 लोगों के परिवार के लिए 10 लीटर का घड़ा काफी रहता है. परिवार में चार से ज्यादा सदस्य हैं तो 15 या 20 लीटर का घड़ा ले सकते हैं. सरोजिनी नगर के मटके वाली गली में मटके की दुकान चला रहीं गीता ने हमें मटकों के साइज के बारे में बताया.

बाजार में जब आप इन्हें खरीदने जाएंगे तो आपको इनकी कीमत का भी कुछ अंदाजा होना चाहिए. हालांकि गर्मियों में मटकों की बढ़ती मांग को देखकर इनकी कीमत में भी उतार-चढ़ाव आता रहता है. आइए हम आपको इनकी बाजार की और प्रजापति कालोनी उत्तम नगर की थोक मार्केट की कीमतें बताते हैं:

1. मटका: मार्केट में आपकी जरूरत के अनुसार हर साइज में ऐसे मटके उपलब्ध हैं. इनमें अमूमन चार साइज मिलते हैं: सबसे छोटा 5 लीटर से शुरू होता है और सबसे बड़ा साइज 30 से 35 लीटर के बीच में मिल जाता है. आमतौर पर सबसे बड़े साइज का प्रयोग प्याऊ लगाने के लिए किया जाता है. लेकिन अगर परिवार बड़ा है तो इस मटके का प्रयोग घर पर भी किया जा सकता है.

साइज रिटेल कीमत थोक कीमत

5 लीटर 60-70 रुपये 12-16 रुपये
8-10 लीटर 70- 85 रुपये 32-45 रुपये
15-20 लीटर 90-120 रुपये 40-60 रुपये
25 लीटर 150 रुपये 70 रुपये
30-35 लीटर 200-250 रुपये 85-100 रुपये

2. सुराही: आजकल इसका चलन बढ़ा है. सुराही 2 लीटर से शुरू होकर 10 लीटर तक मिलती है.
साइज मार्केट रेट थोक रेट
2 लीटर 30-40 रुपये 15 रुपये
5 लीटर 50-70 रुपये 20-25 रुपये
10 लीटर 70 रुपये 30-40 रुपये

3. टंकी: इसमें ण्टोंटी लगी होती है इसीलिए इस वरायटी का नाम टंकी रखा गया है. मार्केट में मौजूद टंकी का साइज 5 लीटर से शुरू होकर 20 से 25 लीटर तक जाता है.
साइज मार्केट रेट थोक रेट
5 लीटर 80-100 रुपये 35 रुपये
8-10 लीटर 125-150 रुपये 50-70 रुपये
15-20 लीटर 200-250 रुपये 70-100 रुपये

4. सजावटी टंकियां: बाजार में सफेद रंग की सजावटी टंकियों की भी वरायटी आई है. इन पर रंगबिरंगी पेटिंग्स बनी होती है. ये टंकियां गुजरात से आती हैं. बाजार में लोगों के बीच ये सजावटी टंकियां लोकप्रिय हो रही हैं. बताया जा रहा है कि ये टंकियां गुजरात से बनकर आ रही हैं और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनती हैं. प्रजापति कॉलोनी के कुम्हार वेद प्रकाश बताते हैं कि इन टंकियों पर पेंट किए जाने के कारण ये पानी को ज्यादा ठंडा नहीं कर पातीं. पेंट होने से टंकी के सूक्ष्म सुराख बंद हो जाते हैं जिससे पानी ठंडा नहीं हो पाता.

साइज मार्केट रेट थोक रेट
10 लीटर 250 रुपये से शुरू 150 रुपये
15-20 लीटर 300-550 रुपये 220-240 रुपये

5. सुपर कूल घड़ाः आजकल मार्केट में गहरे लाल रंग का एक नया मटका भी मिल रहा है. यह अंदर से काले रंग का होता है. बताते हैं कि यह राजस्थान की काली मिट्टी से बना है. इसका वज़न काफ़ी कम होता है. इसमें रखा पानी बाकी मटकों की तुलना में ज़्यादा ठंडा मिलता है लेकिन एक बड़ी कमी यह है कि इसमें से थोड़ा-सा पानी हर वक्त रिसता रहता है. 15 लीटर की कीमत 150 लेकर 200 रूपये है.

6. मिट्टी की बोतल: मिट्टी की बनी बोतलों का काफी क्रेज है क्योंकि आप आसानी से इन्हें कहीं भी अपने साथ ले जा सकते हैं. आप इसे आराम से अपने साथ ऑफिस ले जा सकते हैं. बस आते जाते इसका ध्यान रखना पड़ेगा, कहीं यह टकराकर टूट ना जाए. मिट्टी की बोतल में 1 लीटर तक पानी स्टोर किया जा सकता है.

साइज मार्केट रेट थोक रेट
1 लीटर 100 से 150 रुपये 50 रुपये

नोट: यहां दी गई कीमतों में कमी-बेशी मुमकिन है.

ये हैं मटकों के ठिकाने:

दिल्ली में मटके आसानी से बाजारों में मिल जाते हैं. कई बाजार तो मटका बाजार या कुम्हार कॉलोनी नाम से ही मशहूर हैं. इनके अलावा दिल्ली हाट, आइएनए में भी सजावटी मटके और मिट्टी के बर्तन आसानी से मिल जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ जगहों के बारे में:

1. मटका कालोनी, सरोजनी नगर मार्केट के पास. सरोजनी नगर डीटीसी बस डिपो के सामने है.

2. कुम्हार कालोनी,(प्रजापति कालोनी) उत्तम नगर. यहां आपको राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार भी मिल जाएंगे. अगर आपको थोक में मिट्टी के बर्तन चाहिए तो आप उत्तम नगर का रुख कर सकते हैं.

3. आजकल ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर भी मटके मिलते हैं, लेकिन वहां इनकी कीमत काफी ज्यादा होती है – Mitticool.com, Amazon आदि.

मटका खरीदते वक्त ध्यान रखें

1. मटका हमेशा चिकनी मिट्टी से ही बना हुआ खरीदें. इसे पहचानने के लिए मटके को उंगलियों से बजा कर देखना चाहिए. अच्छी मिट्टी से बने मटके की आवाज वैसी ही होती है जैसी मटके की आवाज हम गानों में सुनते हैं.
2. कच्चे और पके हुए मटके की पहचान का भी यही तरीका है. अच्छी तरह पके हुए मटके की आवाज गूंजती है.
3. आप मटके में पानी डाल कर जरूर चेक करें कि पानी कहीं लीक तो नहीं हो रहा.

मटके की देखभाल के टिप्स

1. मटके का सारा पानी रोज नहीं तो दो-तीन दिनों में जरूर बदलें. इस बात का ध्यान रखें कि मटके के अंदर काई ना जमा हो पाए. अंदर या बाहर काई जमा होने पर मटके को बर्तन साफ करने वाले लोहे के जूने (डिश वॉशर) या नारियल के रेशों से हल्के हाथों से साफ करना चाहिए.

2. मटके के अंदरूनी हिस्से को कभी भी हाथ से साफ ना करें. सफाई का सबसे अच्छा तरीका है मटके में कुछ पानी डालकर उसे जोर से घुमाकर फेंक दें. फिर मटके को थोड़ी देर के लिए उल्टा करके रख दें. इसका सारा पानी सूख जाएगा. मटके में महक नहीं रहेगी.

3. मटके को कभी भी साबुन से साफ नहीं करना चाहिए. साबुन से साफ करने से मटके में महक रह जाती है.

4. मटके के पानी को ठंडा रखने के लिए उस पर कोई भी गीला कपड़ा या मिट्टी का लेप आदि लगाने की कोई जरूरत नहीं होती. अच्छी मिट्टी से बना मटका पानी को खुद ही ठंडा करने का काम करता है.

5. मटके को गैस, धूप या किसी भी गर्म चीज से दूर रखना चाहिए. मटके को खुली हवादार जगह में रखें ताकि उसे अच्छी हवा मिल सके.

6. मटका एक ही सीजन चलता है इसलिए गर्मी के हर सीजन में मटके को बदलना चाहिए और दूसरा मटका लेना चाहिए.

सेहतमंद भी बना देंगे मटके:

1. गर्मियों में अचानक फ्रिज का ठंडा पानी पीने से तबीयत खराब हो सकती है, लेकिन मटके के पानी से कोई परेशानी नहीं होती क्योंकि इसका पानी बहुत तेज ठंडा नहीं होता जिससे शरीर को कोई तकलीफ हो.

2. मटके का पानी पीने से गले से संबंधित बीमारियां जैसे खांसी आपसे दूर रहती हैं.

3. प्लास्टिक की बोतल में पानी रखने से पानी में शरीर के लिए हानिकारक तत्व आ जाते हैं इससे बचने के लिए मटके का इस्तेमाल बेहतर रहता है.

  • श्री राजेश मित्तल के सौजन्य से श्री मुकुल का लिखा लेख

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