मोदी ने क्या किया हिन्दू के लिए-2

1999 कारगिल युद्ध के समय फौजी परिवार मित्र अखिलेश तखी के घर बात चीत में श्रीराम चाचा जो BRO में थे, ने बताया कि वे 1965 के लड़ाई में अखनूर सेक्टर में तैनात थे, उनका काम 5 गोरखा राइफल्स के लिए रास्ता बनाना था…

सीमा पर बराबर पाकिस्तान से शेलिंग हो रही थी जिससे काम करना मुश्किल था… गोरखा राइफल्स के कप्तान ने दो दिन इंतज़ार के बाद अपने टुकड़ी को इकट्ठा किया और कहा कि इन शेलिंग करने वालों को सबक सिखाना है…

बहुत ओजस्वी लेक्चर दिया उसने… और उसके बाद अगले कुछ घंटे उन गोरखा सैनिकों ने खुखरी से ऐसा तांडव मचाया कि पाकिस्तानी सैनिक अमेरिका के दिए हथियारों को वहीं छोड़ कर भाग खड़े हुए…

ये एक छोटी सी घटना मात्र है… नेपाली लोगों से भरी गोरखा राइफल्स ने 1948, 65, 71, कारगिल में भारत को विजयश्री दिलाने में अमूल्य योगदान दिया है…

1950 में भारत नेपाल समझौते के अनुसार नेपाल की सुरक्षा और विदेश नीति भारत के देख रेख से चलेगी… ये चीन से आने वाले खतरे को भांपते हुए किया गया समझौता था…

इसके बदले नेपाल के लोगों को भारत में कई सुविधाएं मिली हुई थी… नेपाल के लोग भारत आ सकते थे, काम कर सकते थे, घर बना सकते थे आदि आदि…

[मोदी ने क्या किया हिन्दू के लिए-1]

सब कुछ ठीक चल रहा था… लेकिन पश्चिम बंगाल – नेपाल की सीमा पर सही नहीं चल रहा था… भारत का विदेश विभाग जो कि दिल्ली के कम्युनिस्ट मोहल्ले से संचालित होता था, उसने चीन के इशारे पर नेपाल के साथ अलग ही खेल खेलने चालू कर दिए…

इसका नतीजा ये हुआ कि नेपाल में भारत के प्रति असंतोष बढ़ता ही गया… 1987 में राजीव गाँधी ने नेपाल की यात्रा की… कम्युनिस्टों को इससे मूर्ख प्रधानमंत्री मिल नहीं सकता था और न जाने किस बात को उन्होंने राजीव गाँधी के लिए अहम् का मुद्दा बना दिया.

इसके बाद भारत नेपाल संबंधों के बीच सबसे बड़ा बवाल हुआ जब राजीव गाँधी ने नेपाल में blockade (नाकाबंदी) किया… कई महीनों तक किल्लत झेलने वाले नेपाल ने भारत के इस कदम से कई सबक सीखे… अभी तक जो चीन-नेपाल की दीवार बंद थी उसको उन्होंने खोल दिया.

जरा सा मौका मिला और चीन ने उसका भरपूर लाभ उठाया… चीन का साथ भारत के कम्युनिस्टों ने दिया… इन्होने धीरे धीरे नेपाल में माओवादी संगठन खड़ा कराना चालू कर दिया.

थाईलैंड, हॉन्ग कॉन्ग, मलेशिया से माल नेपाल आने लगा… नेपाल के बाजार और भारत के सीमावर्ती बुटवल, भैरहवा, बीरगंज आदि में थाई और चीनी सामान यहाँ तक कि चड्डी बनियान भी आने लगे… कम्युनिस्टों ने इस तरह नेपाल की भारत पर निर्भरता ख़त्म कर दी.

चीन ने पाकिस्तान को भी नेपाल में एंट्री दिलाना चालू कर दिया. पाकिस्तान ने नेपाल में ISI का जाल बुनना चालू कर कर दिया. भारत और पाकिस्तान के अपराधी नेपाल – पाकिस्तान – हॉन्ग कॉन्ग – बैंकाक में अंतर्राष्ट्रीय गिरोह बनाने लगे.

इसमें पाकिस्तान ने दाऊद इब्राहम की मदद से नकली नोट – ड्रग्स – मानव तस्करी – हथियार तस्करी आदि का धंधा नेपाल में खूब जोर से फैलाया.

इस सब के बीच कम्युनिस्ट सोच वाले भारतीय विदेश सेवा के लोग चुपचाप तमाशा देखते रहे और नेपाल में भारत विरोध की हवा भी चलाते रहे.

इस बीच उत्तर प्रदेश के देवरिया का मिर्ज़ा दिलशाद बेग जो कि एक बड़ा अपराधी था वो भाग के नेपाल गया और उधर उसने अपनी जड़े जमाई. उसको पाकिस्तान, चीन और भारतीय – नेपाली माओवादियों ने मदद कर के चुनाव जिताया तथा मजबूत मंत्री भी बनवाया.

मिर्ज़ा दिलशाद बेग ने मधेसी इलाके में खूब गैर कानूनी व्यवसायों को बढ़ाया… उधर नेपाली माओवादी नेता पुष्प कुमार दहल उर्फ़ प्रचंड ने चीन सीमा वाले नेपाल में भारत विरोध और चीन प्रेम का आधार मजबूत किया…

इधर भारत का विदेश मंत्रालय और सरकारें नेपाल को लेकर उदासीन बनी रहीं. 1950 के समझौते के अनुसार नेपाल की विदेश नीति भारत के मदद से संचालित होनी थी लेकिन अब वो पाकिस्तान और चीन के मदद से चलने लगी…

नेपाल में भारत विरोधी अभियान को भारत के ही कम्युनिस्टों ने NGO की मदद से आगे किया… ये NGO मधेसियों को पैसे खिला कर भारत से आने वाले सामान का भारत सीमा पर ही blockade करके उसको उत्तर नेपाल में नहीं जाने देते थे… यही NGO उधर उत्तरी नेपाली लोगों को इस कारण भड़काता भी था. भारत पूरी तरह से नेपाल के अंदरूनी और बाहरी मामलों से बाहर हो चुका था.

1998 से 2001 के बीच नेपाल में दो घटनाएँ और घटी जिसमें से एक भारत के लिए अच्छी थी दूसरी बहुत बुरी…

भारत के दो डॉन दाऊद और छोटा राजन दुश्मन बन चुके थे… 1998 में छोटा राजन ने मिर्ज़ा दिलशाद बेग और दाऊद के कई और लोगों को मरवा दिया जिससे भारत विरोध और तस्करी आदि के उसके नेपाली अभियान को बड़ा झटका लगा… भारत के लिए मिर्ज़ा दिलशाद बेग का मरना स्वतः ही फायदेमंद रहा…

दूसरी घटना में नेपाल के पूरे राजपरिवार को एक रात में ही मौत के घाट उतार दिया गया… किसने मारा, ये आज तक पता नहीं चला… इसकी कई थ्योरी चल रही हैं…

जब तक राजा बीरेंद्र जीवित थे वो भारत के साथ संबंधों को काफी हद तक बचाए हुए थे लेकिन उनके मरने के बाद चीन समर्थक ज्ञानेंद्र राजा बने और उन्होंने पूरी तरह चीन और माओवादी सरकार के समर्थन को आगे बढ़ाया… नेपाल में माओवादियों की सरकार भी बनी… ये सरकार भारत विरोधी थी और उसने चीन के साथ अनेक समझौते किए.

जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने नेपाल से सम्बन्ध सुधारने का पहल की. चीन द्वारा तिब्बत पर कब्ज़े के बाद से सिर्फ नेपाल ही चीन से भारत का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है… जिसको किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जा सकता…

नेपाल और उसके नागरिक हमारे गोरखा रेजिमेंट के महत्वपूर्ण सिपाही है… नेपाल ही भारत के बाद दूसरा और अंतिम हिन्दू बाहुल्य देश है जहाँ से भारत के रोटी – बेटी वाले ऐतिहासिक सीधे सम्बन्ध रहे हैं…

नेपाल से सम्बन्ध को मज़बूत करना और नेपाल को मज़बूत करना भारत के लिए फायदेमंद है… ये बात मोदी को मालूम है इसलिए मोदी ने अब तक 4 बार नेपाल यात्रा की…

पिछले वर्ष विदेश मंत्रालय में बैठे चीन परस्त भारतीय कम्युनिस्टों के शुभचिंतकों ने एक बार फिर से तमाम NGO को आगे कर के और मधेसियों के कन्धे पर रखकर खूब बन्दूक चलाई… और blockade को फिर से अंजाम दिया…

इस blockade ने नेपाल की जनता को फिर से भारत के विरोध में करना चालू कर दिया… पहले के मोदी के दौरों को फेल करने के लिए चीन और पाकिस्तान प्रायोजित भारतीय कम्युनिस्ट और NGO ने काम करना चालू करा दिया…

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल ने इसका स्वयं संज्ञान लिया… और सारी ख़ुफ़िया रिपोर्ट पर सीधे प्रधानमंत्री से बात की… इसके लिए मोदी ने जनकपुर और काठमांडू दौरा तत्काल किया जिससे नेपाली जनता का भरोसा और विश्वास, जिसको राजीव गाँधी ने तोड़ना और बिखेरना चालू किया था, उसको फिर से मजबूत बनाया जा सके…

जिससे बाबा पशुपतिनाथ और काशी के बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से भारत और नेपाल के सम्बन्ध एक बार फिर से मजबूत बन सकें… एक बार फिर नेपाल और भारत साथ चलने लगें… और दुनिया को पता चले कि हम मजबूत रिश्तेदार हैं…

नेपाल नरेश – काशी नरेश – जम्मू कश्मीर – होल्कर घरानों में शादी विवाह के सम्बन्ध और अयोध्या – जनकपुर वाला समय वापस लाना है… यही मोदी कर रहे हैं… एक पूर्ण हिन्दू देश से सम्बन्ध को नए शिखर पर ले जाने की जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं…

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