भारत में जान फूँक रहे हैं मोदी, बना रहे हैं उसे फिर से भारत माँ

यह बात तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी भी मानते हैं कि उन्होंने सत्ता में आने के बाद देश के इंफ्रास्ट्रक्चर (मूलभूत संरचना जैसे कि सड़क, बिजली, फ़ोन इत्यादि) में ज़बरदस्त सुधार किया है.

राष्ट्रीय हाईवे, रेल, मेट्रो, बंदरगाह, हवाई यात्रा, बिजली की उपलब्धता में कई गुना सुधार देखने को मिला है. कई सुविधाएं तो एकदम विश्वस्तरीय हो गई है. पिछली सरकार तुलना में हज़ारों मील आगे.

लेकिन यह तो हुआ भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर जो हम अपनी आंखों से देख सकते हैं या महसूस कर सकते हैं.

एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर इंटरनेट और टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं के क्षेत्र में खड़ा किया जा चुका है.

सोनिया सरकार के समय में केवल 350 किलोमीटर फाइबर ऑप्टिक केबल्स – जिनमें टेलीकम्युनिकेशन और ब्रॉडबैंड सिग्नल बेरोक-टोक दौड़ते हैं और जिनका जाल सभी विकसित देशो में है – बिछाये गए थे.

मोदी सरकार में पिछले चार वर्षों में प्रभावशाली तरीके से 2 लाख 74 हज़ार किलोमीटर फाइबर ऑप्टिक केबल्स बिछाये जा चुके हैं, जिससे पूरे देश को फ़ास्ट स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा जा सके. इन्ही केबल्स पर सरकार, निजी क्षेत्र और हर भारतीय के डाटा दौड़ रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के पहले आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग नगण्य था. अधिकांश जनसंख्या को बैंकिंग सुविधा प्राप्त नहीं थी.

कई लोगों ने फर्जी बैंक अकाउंट खोल रखे थे. फर्जी कंपनियों के द्वारा भी उन बैंक अकाउंट को चला रहे थे और मनमाने तरीके से देश से नंबर दो का पैसा बाहर भेज रहे थे और विदेशों से उसी पैसे को भारत में नंबर 1 का करके मंगवा रहे थे.

एम्प्लोयी प्रोविडेंट फंड की पोर्टेबिलिटी नहीं थी मतलब यदि आपने नौकरी बदली तो आपका प्रोविडेंट फंड ऑटोमेटिकली दूसरे एंप्लायर के यहाँ ट्रांसफर नहीं होगा. पेंशन के लिए दिन-रात भागते-दौड़ते थे.

सेल्स टैक्स और एक्साइज़ ड्यूटी में भयंकर घपला था. राज्यों में प्रवेश करने के पहले ट्रक सीमाओं पर खड़े रहते थे और बहुत कम लोग आय कर देते थे.

दूसरे शब्दों में अधिकांश भारतीयों का राष्ट्र की आर्थिक स्थिति में कोई समावेश नहीं था, ना ही कोई सार्थक योगदान.

लेकिन राष्ट्र के बाहर भी मोदी सरकार द्वारा भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर बिछाया जा रहा है. ईरान में भारत द्वारा विकसित चाहबहार बंदरगाह, मॉरीशस और सेशेल्स में नौसेना के बेस, भारतीय महासागर में सोमालिया से लेकर साउथ चाइना समुद्र तक के विशाल क्षेत्र में हर समय उपस्थित कम से कम 15 नौसेना के पोत और पनडुब्बियां राष्ट्रिय हितों की रक्षा कर रही हैं.

इन सबसे बढ़कर विदेशों में रहने वाले कई करोड़ भारतीयों को भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने व्यक्तिगत टच से राष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर में सम्मिलित कर लिया है.

जब भी मैं अमेरिका के स्टोर्स में शॉपिंग करने जाता हूँ, तो यह अवश्य देखता हूँ कि प्रोडक्ट किस देश में बने है.

जब भी मैं आतंकी देश में बनी हुई वस्तु (उस देश में बनी हुई बेड शीट, टेबल कवर, तौलिये इत्यादि ही मिलते थे) देखता था तो स्टोर मैनेजर को बुलाकर कहता था कि इसी देश के आतंकियों ने अमेरिकावासियों का खून बहाया है और आप इस देश का सामान अपने यहाँ रखते है.

कल मैं शॉपिंग करने के लिए चार स्टोर में गया था और किसी में भी उस आतंकी देश का सामान नहीं मिला.

शरीर बाहर से स्वस्थ दिखाई दे, लेकिन हड्डिया जर्जर हो, धमनियों में फैट चढ़ा हो या फिर स्नायु तंत्र कमजोर हो तो वह संरचना सिर्फ एक चलता फिरता ढांचा है, और कुछ नहीं.

प्रधानमंत्री मोदी भारत में जान फूँक रहे हैं, उसे फिर से भारत माँ बना रहे हैं.

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