मोदी सरकार के चार साल पूरे : बधाई हम सब को

इस लेख के बाद चाहे तो मुझे देशद्रोही घोषित कर देना, चाहे पाकिस्तान चले जाने की सलाह दे देना…

बात सिर्फ इतनी सी है कि राष्ट्रगान के समय खड़ा होना, स्कूल में सिर्फ अनुशासन के चलते किया और 15 अगस्त – 26 जनवरी को टीवी पर पापा के साथ परेड देखते हुए, उनके खड़े हो जाने और फिर पलट कर मुझे घूरने की वजह से किया.

दिल से, स्वप्रेरणा से पहली बार सावधान की मुद्रा में चार वर्ष पूर्व खड़ा हुआ, जब शपथग्रहण समारोह में राष्ट्रगान की धुन बजी…

और वो दृश्य तो आज भी आँखों में वैसा ही ताज़ा है, जब ‘वे’ शपथ लेने पहुंचे और राष्ट्रपति के “मैं…” कहने के पश्चात बोले – “मैं, नरेंद्र दामोदर दास मोदी…” और आवाज़ कुछ टूट सी गई… शायद ‘उन’ का हृदय भर आया है, गला रुंध गया है, इस विचारमात्र से मुझे अपने गले में कुछ अटकता सा महसूस हुआ और आँखें भर आईं…

और आज चार साल बाद अति ज्ञानी होने के मिथ्याभिमान से ग्रस्त अपने ही पक्ष के कुछ लोगों को ‘उन’ के बारे में निंदनीय स्वर में बात करते पढ़-सुन कैसा-कैसा तो नहीं लगता होगा मुझे…

विरोधी स्वरों को चुपचाप पी जाना ‘उन’ से बेहतर और कौन कर सकता है, कोशिश मैं भी करता हूँ… पर जब अति हो जाती है तो कभी कभार उबल भी पड़ता हूँ… क्योंकि ये स्वर विरोधियों के नहीं वरन अपने ही साथियों के होते हैं.

इतनी परीक्षाओं के बाद भी लोग संतुष्ट नहीं हैं, तो मुझे लगता है कि ये भी इन लोगों का ‘उन’ के प्रति उत्कट प्रेम ही होगा, जो हर कोई अपनी अपेक्षाएं ‘उन’ से जोड़े बैठा है.

मैं जानता हूँ कि अगले शपथ ग्रहण समारोह में ‘उन’ की आवाज़ नहीं टूटेगी, पर यह भी जानता हूँ कि मेरा गला तो रुंधेगा ही और आँखें भी भर आएंगी.

हाँ, राष्ट्रगान के समय सावधान की मुद्रा में खड़ा भी होऊँगा.

देश को सिर्फ आपकी ही ज़रुरत है श्री Narendra Modi, बधाई और शुभकामनाएं हम सबको…

मोदी को प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने के लिए रचा गया षडयंत्र!

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