जब गरीब की थाली से हुई 38000 करोड़ की लूट

यूपीए शासन में चीनी के बहाने हुई 60 हज़ार करोड़ सालाना की लूट के बाद आज दूसरा शर्मनाक उदाहरण कि उसी वर्ष गेंहू के दाम के बहाने किस तरह हुई 38 हज़ार करोड़ की लूट.

वर्तमान में भारत सरकार किसानों को गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 1750 रूपये प्रति क्विंटल दे रही है. बाज़ार में आटा बिक रहा है 22 रूपये प्रति किलो.

अब जरा ध्यान दीजिए कि 2009-10 में भारत सरकार किसानों को गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 1080 रूपये प्रति क्विंटल दे रही थी.

आज सरकार उससे लगभग 65% अधिक MSP किसानों को दे रही है. लेकिन 2010 में बाजार में आटा बिक रहा था 20 रूपये प्रति किलोग्राम. आज उससे 10% महंगा बिक रहा है.

यह भी निश्चित है कि कोई भी व्यापारी घाटा उठाकर तो आटा बेच नहीं रहा होगा. जबकि यहां उल्लेखनीय यह भी है कि 2010 की तुलना में आज लदाई ढुलाई और पिसाई की कीमत काफी बढ़ी है. लेकिन मैं उस अंतर को यहां शामिल ही नहीं कर रहा.

इसके बावजूद तबके गेंहू के MSP और आज के MSP में अंतर था 6 रूपये 70 पैसे का और आटे के तब के बाजार भाव और आज के बाजार भाव में अंतर है केवल 2 रूपये का. अर्थात शुद्ध अंतर हुआ 4 रुपये 70 पैसे का.

अब यह भी जानिए कि 2010 में देश में गेंहू का उत्पादन हुआ था 8.08 मीट्रिक टन. जिसपर व्यापारी को 4 रूपये 70 पैसे का अतिरिक्त मुनाफा हो रहा था.

अर्थात वर्ष 2010 में गेंहू के व्यापारियों को 4700 रूपये प्रति टन अतिरिक्त मुनाफा हो रहा था. अर्थात 2010 में गेंहू के नाम पर लगभग 38000 करोड़ रूपये की अतिरिक्त मुनाफाखोरी, जिसे लूट कहना ज्यादा उचित होगा, हुई.

ध्यान रहे कि डीज़ल पेट्रोल की तरह सरकार गेंहू नहीं बेचती.

आज डीज़ल पेट्रोल पर जो भी टैक्स वसूला जा रहा है वो देश के सरकारी कोष में जा रहा है. इस टैक्स के एक एक पैसे का हिसाब सरकार को देना होता है, सरकार दे भी रही है. क्योंकि इस हिसाब किताब का सबसे बड़ा दस्तावेज़ सरकार का बजट होता है.

लेकिन गेंहू को सरकार नहीं बेचती. गेंहू की बिक्री से होने वाला मुनाफा देश के सरकारी कोष में नहीं जाता. गेंहू की बिक्री से होनेवाला मुनाफा आटा मिल के मालिकों तथा आटा बेचनेवाले बड़े व्यापारियों की निजी तिजोरियों में जाता है.

अतः उस कांग्रेस को आज देश को यह बताना चाहिए कि उसके शासनकाल में आटा मिल मालिकों और बड़े गेंहू व्यापारियों द्वारा केवल गेंहू की बिक्री के बहाने गरीब गन्ना किसानों और जनता से की गई प्रतिवर्ष लगभग 38 हज़ार करोड़ रूपयों की लूट का जिम्मेदार कौन था? यह गरीब की थाली के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से की जघन्य लूट थी.

इस लूट का जिम्मेदार क्या गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी थे? या वो सोनिया गांधी जो उस यूपीए की चेयरपर्सन थी जिसकी सरकार देश पर राज कर रही थी? या वो मनमोहन सिंह जिम्मेदार जो उस यूपीए सरकार के कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे?

यहां स्पष्ट कर दूं कि मैने जानबूझकर यूपीए शासनकाल के वर्ष 2010 को आधार बनाया है क्योंकि उससे पहले के 5 वर्ष और उसके बाद के 5 वर्ष तक देश में यूपीए सरकार ही थी इसलिए कांग्रेस ऐसी भ्रष्टाचारी लूटों की जिम्मेदारी किसी और पर नहीं डाल सकती.

2010 और 2018 में गेंहू के MSP की पुष्टि का लिंक : Procurement : Food Corporation of India

2010 में गेंहू के उत्पादन की कुल मात्रा की पुष्टि करता लिंक : India Wheat Production by Year

आजकल आटे की कीमत 22 रूपये प्रति किलोग्राम की पुष्टि का लिंक : 10 Kg Wheat Flour at Rs 220 per bag

2010 में आटा 20 रूपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था इसकी पुष्टि इस लिंक पर जाकर देखिए सुनिये :

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