जिन्हें जनता से खतरा था, उन्होंने विकसित ही नहीं होने दिए यात्रा और संचार के साधन

उत्तरी अफ्रीका का एक देश सिएरा लिओने को अंग्रेजी उपनिवेश से वर्ष 1961 में स्वतंत्रता मिली.

1967 में सिएका स्टीवेंस ने चुनाव में कुछ सीटों के अंतर से सत्ता जीत ली. अधिकतर वोट उसे उत्तरी सिएरा लिओने से मिले थे. देश के उत्तर और दक्षिण भाग को रेलवे जोड़ती थी.

सरकार बनाने के बाद स्टीवेंस ने देश से रेलवे लाइन उखड़वा दी, ट्रेन और पटरियां बिकवा दी जिससे देश में कोई ट्रेन ना चल सके क्योंकि उसे भय था कि जनता के मिलने-जुलने से उसके विरोधी सशक्त होंगे.

हालांकि रेल ना चलने से देश की आर्थिक स्थिति विकट हो गयी थी. लेकिन जब आर्थिक विकास और सत्ता बनाये रखने के मध्य एक विकल्प चुनना था, तो स्टीवेंस ने एक धूर्त राजनैतिज्ञ की तरह सत्ता को चुना.

उसने जनता की भलाई के नाम पर उनका शोषण इस हद तक किया कि एक समय किसानों की 90 प्रतिशत आय स्टीवेंस हथिया लेता था.

यही हाल रूस के शासक निकोलस 1 के समय था जिसने 1825 से 1855 तक शासन किया. निकोलस 1 के मंत्री कंक्रीन को रेलवे से खतरा दिखाई देता था क्योकि ट्रेन से लोगो के लिए मिलना जुलना आसान हो जाता था.

अतः निकोलस 1 और कंक्रीन ने रूस में ट्रेन का विकास होने ही नहीं दिया, जबकि 1870 तक पश्चिमी यूरोप में रेल का जाल बिछ गया था.

14वीं से 17वीं सदी के मिंग राजवंश शासकों को चीन के विशाल समुद्र तट से खतरा लगता था क्योकि चीनी लोग विदेश जा सकते थे, या विदेशी चीन आ कर वहां की जनता से घुल मिल सकते थे और स्थानीय लोगों को नए विचारो से अवगत करा सकते थे.

अतः उन्होंने आदेश दिया कोई भी नागरिक विदेशियों के साथ व्यापार नहीं करेगा और ना ही नौका से विदेश जाएगा.

1661 में चीन के राजा कांग्सी ने आदेश दिया कि समुद्र तट के पास रहने वाले सभी लोग तट से 17 मील अंदर बस जाएं. तट पर सेना पहरा देती थी यह देखने के लिए कि वहां पर कोई नागरिक तो नहीं आया है. सन 1693 तक किसी भी देश की नौका तट पर नहीं आ सकती थी.

यह कहानी मैं क्यों सुना रहा हूं?

क्योंकि आज पढ़ा कि स्वतंत्रता के 70 से भी अधिक वर्षों के बाद पहली बार अरुणाचल प्रदेश हवाई यात्रा से जुड़ा है. इसी प्रकार त्रिपुरा में पहली बार ब्रॉड गेज ट्रेन आई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत की जनता के मिलने-जुलने से, उनकी प्रगति से, नए विचारों के आदान प्रदान से कोई खतरा नहीं है.

जिन्हें जनता से खतरा था उन्होंने देश में यात्रा और संचार के साधन विकसित ही नहीं होने दिए और देश की जनता को जानबूझकर गरीब रखा.

जिससे वे गरीबी हटाने के नारे के नाम पर वोट लेते रहें.

प्रधानमंत्री मोदी रचनात्मक विकास कर रहे हैं क्योंकि इसके बिना वे जमे हुए अभिजात्य वर्ग की जड़े नहीं उखाड़ सकते. देश को ट्रांसपोर्ट और संचार के माध्यम से जोड़ना की प्रक्रिया इस रचनात्मक विकास का एक अभिन्न अंग है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY