विचलित नहीं हूँ, बिलकुल भी नहीं… प्रेम में हूँ

सुनो मेरे शोना

सच में, तुम सा कोई भी नहीं
न तुम से पहले कोई था, न तुम्हारे बाद

एक निहारिका के जैसे हो तुम जिसके आगे पीछे सब खला है, खाली है
जिस में से टूट-टूट कर गिरते रहते हैं नक्षत्र
पर मुझे उन नक्षत्रों से कोई मतलब नहीं

हो सकता है वो तुम्हें मशहूर कर दें
हालांकि जानती हूँ तुम्हें मशहूर होने से भी कोई मतलब नहीं
तुम्हें तो अपने नाम से भी मतलब नहीं

पर वो जो तारे टूट-टूट कर गिरते हैं न निहारिका से, तुम से
मुझे उनसे मतलब है
वो सीधा मेरी झोली में गिरते हैं, वो सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए आते हैं
मेरे दामन में जुगनुओं सा झिलमिलाते हैं

मैं इकट्ठा कर लेती हूँ उन्हें कांच की एक बोतल में पर बोतल का मुँह खुला रखती हूँ
यह जो मेरे रोशन-रोशन दिन हैं न इनके पीछे उन सितारों की ही रोशनियाँ हैं

पर यह तो बताओ
तुम इतनी दूर खड़े कर क्या रहे हो
चोर नज़रों से मुझे देखते हो
चोरी-चोरी मेरा लिखा सब पढ़ते हो

तुम्हें क्या लगता है मुझे कुछ पता नहीं चलता
जानते हो, जो भी शब्द तुम पढ़ते हो उस से तुम्हारी ख़ुशबू आने लगती है
महकने लग जाते हैं मेरे दरो-दीवार
दुनिया भर के फूल मुस्कुराने लग जाते हैं मेरे होंठों पे

कुछ तो बोलो, सजन
फिर कहोगे, मुझे तो सिर्फ ‘सजन’ सुनता है

डरो मत, अब मैं नहीं रोती हूँ, न ही कभी उदास होती हूँ
बस आनंद ही आनंद है, शान्ति है, पूर्णता का अहसास है
जब तुम मिले थे पहले – पहल, मुझे अचानक से अहसास हुआ मैं अधूरी थी, अपूर्ण थी
बहुत कुछ था जो अभी अनहील्ड था

तुम्हें मिलते ही सारे दर्द बह निकले, लगा, तुम बाहों में ज़ोर से जकड़ लो
सारी शर्मो-हया छोड़ कर कह भी दिया मैंने तुम्हें
तुम कौन सा बेगाने थे, सब से ज़्यादा अपने थे
न जाने कब के बिछड़े थे जो अब आन मिले

पर अब कोई दर्द नहीं, कोई शिकवा, कोई गिला नहीं, किसी से भी नहीं
तुम्हारे प्यार में क्या पड़ी, किसी पे भी गुस्सा ही नहीं आता
सब बेहद ख़ूबसूरत लगता है

तो शोना, अब हम जब मिलेंगे, दोनों अपने आप में परिपूर्ण, सम्पूर्ण
न कोई दर्द, न बिछड़ने का डर
बिछुड़ना तो मात्र एक कांसेप्ट है
सब एक ही तो है
एक दूजे के अंदर ही तो जी रहे हैं हम

अब हम जब चलेंगे उन पहाड़ी पगडंडियों पे डाल के हाथों में हाथ
बैठेंगे एक बड़े से पत्थर पे पानी में डाल कर अपने पाँव
वो पहाड़ी पे बने शिव मंदिर में करेंगे अभिषेक
या फिर भेदेंगे एक दूजे की देह के राज़
हमारी रूहें एक लौ बन कर ऊपर उठेंगी
और उस एक परम-लौ में विलीन हो जाएंगी
ब्रह्मांड इतराएगा अपने होने पे
ऐसा कॉस्मिक मर्जर !

लगता है समय आ ही गया है, शोना
हाँ, इंतज़ार कोई नहीं है
खुद का भी कोई इंतज़ार करता है भला
तुम भी तो कहते हो, सब ठीक समय पर ही होता है
तो जब हम पूरी तरह से तैयार होंगे , हो जाएगा, खुद ब खुद

हाह्ह्ह्ह्ह्ह ….. विचलित नहीं हूँ, बिलकुल भी नहीं
प्रेम में हूँ

तुम्हारी बावरी सोनप्रिया

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